Akshay Kumar की Sarfira पिछले हफ्ते बड़े पर्दे पर रिलीज़ हुई. पॉज़िटिव रिव्यूज़ के बाद भी ये फिल्म धड़ल्ले से कमाई नहीं कर पा रही. चार दिनों में इसने घरेलू बॉक्स ऑफिस से सिर्फ 13 करोड़ रुपए का ही कलेक्शन किया. इसी फिल्म के प्रमोशन के दौरान अक्षय ने फिल्मों के चलने ना चलने और पैन इंडिया फिल्मों के कॉन्सेप्ट पर बात की. उन्होंने कहां कि वो नहीं जानते पैन इंडिया फिल्में क्या होती हैं. उन्हें ये टर्म समझ ही नहीं आता.
मुझे नहीं पता पैन इंडिया फिल्में क्या होती हैं - अक्षय कुमार
Akshay Kumar के इस बयान का लोग मज़ाक बना रहे हैं. कह रहे हैं कि अक्षय को अगर Pan India का कॉन्सेप्ट पता होता तो उनकी फिल्में फ्लॉप नहीं होती.
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'बाहुबली' फिल्म के बाद पैन इंडिया फिल्मों का क्रेज़ बढ़ गया. बड़े बजट और बड़े स्केल पर बनी एक ऐसी फिल्म जिसकी पॉपुलैरिटी पूरे इंडिया में हो उसे ही पैन इंडिया फिल्म बोला जाने लगा. इसी पर अक्षय से जब सवाल किया गया कि उनके हिसाब से पैन इंडिया फिल्म का क्या मतलब होता है तो बोले,
''मुझे नहीं लगता कि पैन इंडिया फिल्में सिर्फ किसी मूवी के स्केल पर निर्भर करती है. ये नहीं है कि ज़्यादा पैसा लगाया जाए तो ये पैन इंडिया फिल्म बन जाएगी. ये तो गलत है. मुझे तो मालूम ही नहीं है कि पैन इंडिया फिल्म होती क्या है. मेरे हिसाब से तो फिल्म को फिल्म की तरह ही करना चाहिए. अगर हम ये सोच कर फिल्म करने लगे कि इसका बिज़नेस पैन इंडिया होगा, तो ये तो बिज़नेस हो गया ना, सिनेमा कहां बचा.''
अक्षय के इस बयान को लेकर लोग उनका मज़ाक भी बना रहे हैं. कह रहे हैं कि अक्षय को अगर पैन इंडिया का कॉन्सेप्ट पता होता तो उनकी फिल्में फ्लॉप नहीं होती. वो भी हिट फिल्में देते.

इसी इंटरव्यू में अक्षय ने ये भी कहा कि उनके लिए सबसे ज़रूरी काम करना है. वो कहते हैं,
''जब लोग एक्टर्स को नंबर वन, नंबर टू और थ्री में कैटेगराइज़ करने लगते हैं तो मुझे महालक्ष्मी के घोड़े जैसी फीलिंग आने लगती है. जो रेस में दौड़ते हैं. हिंदी सिनेमा में हर साल करीब 200 फिल्में बनती हैं. फिर तमिल और तेलुगु, कन्नड़ा फिल्में बनती हैं. सभी के पास काम हैं. हिंदी सिनेमा में बनती हैं करीब 200 फिल्में और हीरो हैं गिनती के 8-12. क्या लड़ेंगे? सब के पास फिल्में हैं, सब के पास काम है.''
अक्षय ने आगे कहा,
''मेरा पूरा दिमाग सिर्फ काम पर रहता है. लोगों को मुझसे दिक्कत है कि मैं एक साल में चार फिल्में क्यों करता हूं? मैंने पहली बार ऐसा सुना है कि लोगों को किसी के इतना काम करने से दिक्कत हो रही है. फिल्में करना तो मेरा काम है ना तो मुझसे ये सवाल क्यों पूछा जाता है कि मैं अपना काम क्यों कर रहा हूं.''
अक्षय ने आगे ये भी कहा कि उन्हें ऐसी ट्रोलिंग से और नेगेटिव रिस्पॉन्स से कोई फर्क नहीं पड़ता. जब कोई गुड क्रिटिक उनके पास आकर चीज़ों को बताता है तब वो उसकी बात पर ध्यान ज़रूर देते हैं. ट्रोल्स की बातों का उनपर कोई असर नहीं पड़ता.
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