देखो मैं किसी पार्टी का प्रशांत किशोर नहीं हूं. न किसी का सोशल मीडिया हैंडल करने वाला. मेरा उद्देश्य मोदी जी से मेल खाता है. सबका साथ सबका विकास. तो यहां जो भी तरीके बता रहा हूं वो कानून के दायरे में आते हों या नहीं, सियासत के दायरे में जरूर आते हैं. जैसा कि अभी दुनिया ने देखा. DNA तिवारी, नवजोत सिद्धू, स्वामी प्रसाद मौर्य, रीता बहुगुणा जोशी वगैरह मेढक की तरह उछलकर दूसरी पार्टियों में गए. बुरा इनका दूसरी पार्टियों में जाना नहीं है. ये अगर दल बदल नहीं करेंगे तो बुरा लगेगा. दिक्कत की बात ये है कि कुछ गड़बड़ी हो जाती है. जिससे विरोधियों को मौका मिल जाता है कांव कांव करने का. वैसे तो दल बदलने वालों में अंतरात्मा नाम की कोई चीज होती नहीं है. फिर भी कभी शर्मिंदगी न उठानी पड़े और लाभ चोखा हो, उसके लिए निम्नलिखित गाइडलाइन्स पर ध्यान दें.
1.
कॉरपोरेट कल्चर से कुछ सीखें नेताजी. जैसे दूसरी कंपनी में जाते ही इंटरव्यू के दौरान ये नहीं बताने लगते कि पुरानी कंपनी (गंदी वाली गाली) थी. वैसे ही नई पार्टी में जाते ही पुरानी पार्टी की इज्जत उतारना न शुरू करें. हो सकता है कि 24 घंटे के अंदर फिर पुरानी पार्टी में वापस आना पड़े. इसलिए बहुत भद्दे इल्जाम न लगाएं.
2.
नई पार्टी में जाने से पहले पुराने ट्वीट और फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दें. भले चार लड़कों को पैसे देकर अपना हैंडल उनको सौंपना पड़े, लेकिन ये काम सलीके से करा लें. ये होशियारी इस बार नवजोत सिद्धू ने दिखाई है. उनका ट्विटर खोलकर देख लो.
3.
एनडी तिवारी की तरह एक ही पार्टी को सपोर्ट करने की मूर्खता न करें. बेटे को जीतने वाली पार्टी में भेज दें और खुद हारने वाली पार्टी में रहकर उसके अंदर से जानकारी लीक करें. अपने बेटे तक पहुंचाएं. इसके बाद लौंडा इतनी तेजी से तरक्की करेगा दूसरी पार्टी में कि आपकी पुश्तें सेट हो जाएंगी. जितने लड़के हों उतनी पार्टी में भेज दो.
4.
दूसरी पार्टी में जाने के बाद अपनी जबान पर कंट्रोल रखें. नहीं, बोलने पर नहीं. खाने पर. उधर का पार्टी अध्यक्ष आपको लड्डू खिलाता है तो मुंह फाड़कर पूरा न खा लें. नहीं तो ऐसा लगेगा कि आप लड्डू खाने ही इस पार्टी में आए हैं. ये कितना घिनापे का काम है. आप कितनी गालियां खाकर एक जगह पर पहुंचें और अगला आपको सिर्फ लड्डू खिलाकर टरका दे. तो मुंह थोड़ा छोटा खोलो. लड्डू को ये कहकर नकार दो कि "अब तो चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद ही मुंह मीठा करेंगे."
5.
ये पॉइंट सबसे खास है. अगर इस पर ध्यान नहीं दिया तो कुछ नहीं हो पाएगा. निम्नलिखित लाइनें अपने दिमाग की हार्डडिस्क में फीड कर लो. अलग अलग पार्टियों में जाने के लिए अलग अलग जुमले हैं. नोट कल्लो. अगर बीजेपी छोड़कर किसी पार्टी में जा रहे हो "हमें सांप्रदायिक ताकतों को हराना है. देश को धर्म के नाम पर बांटने वालों के साथ राजनीति नहीं हो सकती." BSP छोड़कर किसी पार्टी में जाओ तो "मायावती एक टिकट का रेट पांच करोड़ मांग रही हैं." इससे एक भी रुपए ऊपर नीचे न करो नहीं तो आपके दावे का लोग मजाक बनाने लगेंगे. सपा छोड़कर जा रहे हो तो "समाजवाद को ताक पर धरकर परिवारवाद फैला रही है पार्टी. इसे जीतने नहीं देना है." कांग्रेस छोड़कर जा रहे हो तो "70 साल देश को लूटा. जितने समय इस मां बेटे की पार्टी ने देश पर शासन किया है, देश गड्ढे में गया है." बस इन जुमलों की गोली हाजमोला की तरह चूस लो फिर किसी भी पार्टी में बेरोकटोक आओ जाओ. कोई कुछ नहीं कर पाएगा.
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जब जमीर को बेचकर इतना महंगा सौदा किए हो तो पूरा फायदा क्यों न उठाओ.
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फोटो - thelallantop
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