The Lallantop

ये पांच नेता अपने बेटों की वजह से विवादों में रहे

अमित शाह और जय शाह का मामला पहला नहीं है, इससे पहले भी नेताओं को उनके बेटों की वजह से परेशानी हो चुकी है.

Advertisement
post-main-image
अमित शाह के बेटे जय शाह के साथ प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी.
अमित शाह. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. शाह और विवाद एक-दूसरे के साथ चलते रहते हैं लेकिन इस बार कारनामा उनके बेटे का है. न्यूज़ वेबसाइट thewire.com का दावा है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमित शाह के बेटे जय शाह का कारोबार कई गुना बढ़ गया है. वेबसाइट का दावा है कि 2015-16 में जय शाह की कंपनी टेंपल इंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड का सालाना कारोबार 50 हज़ार रुपए से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपए तक बढ़ गया. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि बीजेपी के सत्ता में आने के एक साल के भीतर ही शाह की कंपनी का टर्नओवर 16 हज़ार गुना बढ़ा. वेबसाइट के मुताबिक,
टेंपल इंटरप्राइज, 2004 में बनी. जय शाह और जितेंद्र शाह का नाम इसके निदेशकों के तौर पर दर्ज किया गया. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की पत्नी सोनल शाह की भी इस कंपनी में हिस्सेदारी थी. 2014-15 में टेंपल इंटरप्राइज के पास कोई अचल संपत्ति नहीं थी. न ही इसके पास कोई इनवेंट्री या स्टॉक था. इसे 5,796 रुपये का इनकम टैक्स रिफंड भी मिला. 2014-15 में इसका राजस्व 50,000 रुपये रहा लेकिन 2015-16 में कंपनी का राजस्व आश्चर्यजनक ढंग से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपए हो गया. यह 16 लाख प्रतिशत की वृद्धि थी.
इसके बाद बीजेपी जय शाह के बचाव में उतर आई है. केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सारी बातों को निराधार बताया है, वहीं कांग्रेस ने पूरी तरह से हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया है,


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर आरोप लगाए
लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है, जब किसी राजनेता को अपने बेटे की वजह से विवादों का सामना करना पड़ा. उदाहरण और भी हैं.

1. मोरारजी देसाई और कांति देसाई

Morarji and son
मोरारजी देसाई और उनके बेटे कांति देसाई (दाएं)

1977 में जनता पार्टी की जीत के बाद मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने थे. उन्होंने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, 'मैं भारत सोवियत संधि को दोबारा देखूंगा और अगर वो भारत के हित में न हुई तो उसे खत्म कर दूंगा.' उन्होंने ये भी कहा था कि भारत की मध्यपूर्व नीति पर दोबारा नज़र दौड़ाएंगे. उसके बाद मोरारजी मॉस्को गए थे. उनके साथ उनके बेटे कांति देसाई भी थे. वापसी में उनका जहाज कुछ देर के लिए तेहरान में रुका. कांति देसाई हिंदुजा बंधुओं से मिलने वहीं रुक गए. इसके बाद खूब हंगामा हुआ.
उसके कुछ दिन बाद ही इज़राइल के विदेश मंत्री मोशे दायान मोरारजी देसाई के घर आए थे. उन्हें कांति देसाई ने ही वहां बुलाया था. इसके बाद जनता पार्टी में आपस में मतभेद हो गए थे. इसके अलावा जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मधु लिमये ने एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि कांति देसाई ने पिता मोरारजी देसाई की राजनीतिक ताकत का गलत इस्तेमाल कर पार्टी के लिए 80 लाख रुपए इकट्ठा किए थे. चरण सिंह ने भी कांति देसाई के खिलाफ पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि कांति देसाई वित्तीय अनियमितता कर रहे हैं. इसके अलावा एक और वरिष्ठ नेता राजनारायण ने कहा था-
हमसे क्या पर्दा है कांति के हाथ में गर्दा है.
इसके बाद मोरारजी देसाई ने राजनारायण को मंत्रीपद से हटा दिया. इसके अलावा जगुआर विमानों की खरीद में भी कमीशन लेने के आरोप कांति देसाई पर लगे, जिसकी वजह से मोरारजी देसाई की खासी फजीहत हुई.

2. जगजीवन राम और सुरेश राम

कहा जाता है कि सुरेश राम की वजह से उनके पिता जगजीवन राम प्रधानमंत्री बनने से चूक गए.
कहा जाता है कि सुरेश राम की वजह से उनके पिता जगजीवन राम प्रधानमंत्री बनने से चूक गए.

इंदिरा गांधी ने 1975 में देश में आपातकाल लागू किया था. 1977 में जब आपातकाल हटा और चुनाव हुए तो इंदिरा गांधी हार गईं. जनता पार्टी चुनाव जीत गई. उस दौरान जगजीवन राम प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार थे. 1978 में सूर्या नाम की एक पत्रिका में जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम और यूपी के बागपत की एक महिला की आपत्तिजनक स्थिति में तस्वीर छापी गई थी.
पत्रिका की संपादक इंदिरा गांधी की बहू और फिलहाल बीजेपी सांसद मेनका गांधी थीं. इस सेक्स स्कैंडल का जिस वक्त खुलासा हुआ उस वक्त जगजीवन राम, मोरारजी देसाई की सरकार में रक्षा मंत्री थे. उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी, लेकिन स्कैंडल ने उनके पीएम बनने के सपने को तोड़ दिया. बाद में सुरेश और उस युवती की शादी हो गई थी. युवती दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज की छात्रा थी. कहा जाता है कि इस सेक्स स्कैंडल का खुलासा जगजीवन राम के राजनैतिक करियर को खत्म करने के लिए किया गया था, जिसके लिए उनकी ही पार्टी के नेता जिम्मेदार थे. इस चर्चित सेक्स स्कैंडल का सूत्रधार खुशवंत सिंह को माना जाता है. वह उस समय कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड के प्रधान संपादक और मेनका की पत्रिका सूर्या के कंसल्टिंग एडिटर थे. कहा जाता है कि वो बंद लिफाफे में तस्वीरें लेकर पहुंचे. इसके बाद उसे सूर्या पत्रिका में छाप दिया गया.

3. पी चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम

Chidambaram and son
कार्ति चिदंबरम (बाएं) की वजह से पी चिदंबरम लगातार घिरते जा रहे हैं.

2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 फीसदी की हिस्सेदारी हासिल कर ली. उस वक्त वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. आरोप लगा कि एयरसेल मैक्सिस मामले में अप्रूवल वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने दिया था. मामले की जांच ईडी और सीबीआई को सौंपी गई. ईडी ने दावा किया कि पी चिदंबर के बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी भतीजी को मैक्सिस ग्रुप से दो लाख डॉलर मिले थे. इस केस में तत्कालीन टेलिकॉम मिनिस्टर दयानिधि मारन पर भी आरोप लगे कि उन्होंने एयरसेल के मालिक सी शिवकृष्णन पर मलयेशियाई कंपनी मैक्सिस को कंपनी की हिस्सेदारी बेचने का दबाव बनाया.
एयरसेल-मैक्सिस केस में ईडी ने चेस ग्लोबल अडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की तलाशी ली थी. पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति इस कंपनी के डायरेक्टर थे. उस दौरान ईडी के अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान मिले डॉक्युमेंट्स के आधार पर पता चला है कि कार्ति ने पिता के पद का दुरुपयोग किया है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कार्ति के विदेशों में कई बैंक अकाउंट हैं, जिन्हें वो बंद करवा चुके हैं. इसके अलावा ये भी आरोप हैं कि चिदंबरम जिस वक्त यूपीए सरकार में मंत्री थे उस वक्त कार्ति ने आईएनएक्स मीडिया को कई रियायतें दिलवाईं और बदले में दलाली ली. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्ति पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के खिलाफ 45 करोड़ रुपए की धांधली का एक और आरोप है.

4. लालू यादव और तेजस्वी यादव

Lalu and son
लालू और तेजस्वी के खिलाफ सीबीआई और ईडी जांच कर रही हैं.

सीबीआई के मुताबिक 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे को दो होटलों के रखरखाव के लिए एक प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया गया. बदले में लालू को तीन एकड़ की जमीन दी गई. इसमें लालू के साथ ही उनके बेटे तेजस्वी पर भी केस दर्ज किया गया. इसके अलावा बीजेपी नेता सुशील मोदी ने आरोप लगाए थे कि तेजस्वी यादव और उनके भाई तेजप्रताप के नाम पर एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बेनामी संपत्तियां हैं. बीजेपी नेता ने आरोप लगाए थे कि पटना में लालू परिवार का जो मॉल बन रहा है, वो ज़मीन पार्टी नेता प्रेमचंद गुप्ता ने लालू के बेटों के नाम की है.
प्रेमचंद गुप्ता की कंपनी इस ज़मीन की मालिक थी. इसके अलावा तेजस्वी और तेजप्रताप को चाचा और नाना से भी करोड़ों के उपहार मिले, जिसकी जांच चल रही है. इन सभी आरोपों का नतीजा ये हुआ कि जिस लालू ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर बिहार में महागठबंधन की सरकार बनाई थी, तेजस्वी पर लगे आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया. तेजस्वी बिहार में उपमुख्यमंत्री थे. उनके हाथ से सत्ता चली गई. इसके तुरंत बाद ही नीतीश ने बीजेपी से हाथ मिला लिया और एक बार फिर मुख्यमंत्री बन गए.

5. पवन बंसल और मनीष बंसल

Pawan vijay
भांजे विजय सिंगला (दाएं) की वजह से पवन बंसल को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

पवन बंसल यूपीए 2 के शासन काल में रेल मंत्री थे. 2006 से 2012 के बीच बंसल वित्त राज्यमंत्री से संसदीय कार्यमंत्री, जल संसाधन मंत्री, विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री के पद पर पहुंचे थे. उन पर आरोप लगे कि उनके मंत्री रहने के दौरान बंसल के परिवार से जुड़ी कंपनियों के टर्नओवर काफी ज्यादा हो गए थे. तीन मई 2013 को सीबीआई ने पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला को कथित तौर पर महेश कुमार को रेलवे बोर्ड में मेंबर (इलेक्ट्रिक) का पद दिलाने के लिए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. हालांकि इसके बाद पवन बंसल को इस्तीफा देना पड़ा था. वहीं बीजेपी शासन काल में इसी साल अगस्त में हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित थियोन कंपनी में इनकम टैक्स के अधिकारियों ने छापेमारी की. थियोन कंपनी पवन बंसल के बेटे मनीष बंसल की है, जिसपर टैक्स चोरी के आरोप लगे हैं. कंपनी की सबसे बड़ी शेयर धारक पवन की पत्नी मधु बंसल हैं.


लल्लनटॉप शो के सेशन में यूपी के मुख्यमंंत्री योगी आदित्यनाथ का वीडियो:

ये भी पढ़ेंं:
तमिलनाडु में एक हुए AIADMK के दोनों धड़े, यहां भी अमित शाह!

जिस आदिवासी मजदूर के घर अमित शाह ने खाना खाया, उसका हाल बुरा है, बहुत बुरा

अमित शाह को भाजपा सरकार के नियम की वजह से मुंह की खानी पड़ी!

Advertisement
Advertisement