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BJP खली के ज़रिए बंगाल में वही 'ग़लत' काम कर रही है जो ममता बनर्जी ने किया था

Election 2019: ना जाने अभी और क्या-क्या देखना बाकी है?

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एक तरफ़ हैं बांग्लादेशी एक्टर फ़िरदौस और दूसरी और हैं दी ग्रेट खली... एकदम रेस्लिंग वाली फ़ील आ रही है
चुनाव चल रहे हैं.साथ ही प्रचार भी. इस ख़बर में आपको चुनाव, प्रचार, आचार और विचार सब कुछ मिलेगा.
पश्चिम बंगाल में जादवपुर संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार अनुपम हाजरा का चुनाव प्रचार कर रहे हैं दी ग्रेट खली. अब चुनाव प्रचार का आचार से गहरा रिश्ता है. आचार संहिता से. विचार की बात हम थोड़ा आगे करेंगे.
लेकिन खली के कोलकाता आने से चुनावी खलबली क्यों मच उठी.
असल में हुआ ये था कि अभी हाल ही में बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद को तुरंत भारत से वापस जाने का आदेश दिया गया. साथ ही बिजनेस वीजा भी रद्द कर दिया गया है. अभिनेता के खिलाफ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी  और इससे अच्छा ख़ासा बवाल खड़ा हो गया था.
जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से अनुपम हाजरा के लिए प्रचार करते खली 
जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से अनुपम हाजरा के लिए प्रचार करते खली

तब पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि -

जिस प्रकार से बांग्लादेश से घुसपैठिए आ रहे हैं, अगर उसी तरह से बांग्लादेश के आर्टिस्ट भी आकर चुनाव प्रचार करेंगे तो ये अंतर्राष्ट्रीय मर्यादाओं का भी उल्लंघन है. और सबसे बड़ी शर्म की बात ये है, कि ममता जी के पास यहां अपने देश में काम  करने वाला एक आदमी नहीं है और उन्हें बांग्लादेश से कलाकार बुलाकर अपना प्रचार करवाना पड़ रहा है. इससे ये भी पता चलता है कि ममता जी के पास जनाधार रह नहीं गया है. उनकी ज़मीन खिसक चुकी है. 

बांग्ला देश के टीवी अभिनेता गाज़ी नूर भी ऐसे ही आए थे लपेटे में 

दमदम लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार हैं सौगत राय. वर्किंग वीज़ा लेकर भारत आए थे बांग्ला देश के टीवी अभिनेता गाज़ी नूर. गाज़ी नूर ने सौगत राय के लिए प्रचार किया था. और इसकी शिकायत भी भाजपा ने बाक़ायदा चुनाव आयोग से की थी.  इसी शिकायत के बाद नूर को वीजा शर्तों के उल्लंघन के लिए वापस भेज दिया गया था.

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यह कार्य वीजा की शर्तों का उल्लंघन है, साथ ही यह एक विदेशी द्वारा भारत के कानून बनाने वाले सर्वोच्च निकाय लोकसभा की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का मामला है. यह लोकतांत्रिक संरचना की बुनियादी बातों का घोर उल्लंघन है

पश्चिम बंगाल भाजपा उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने चुनाव आयोग में शिकायत कराने के बाद कहा- तो भाजपा को अमेरिका से खली क्यों बुलवाना पड़ गया?

यहीं आचार के साथ विचार का कनेक्शन है मितरों. जब ममता बनर्जी या उनके लोग करें तो देखा गया आचार. और जब भाजपा ने किया तब समझने लगे विचार. इसी को कहते हैं मीठा-मीठा गप गप, कड़वा-कड़वा थू.  अब हो सकता है कुछ लोग कहें कि फ़िरदौस तो पूरी तरह बांग्लादेशी है, लेकिन खली तो यहीं भारत से गए हैं. लेकिन आप ख़ुद सोचिए कि फ़िरदौस कोई अमरीकी पॉप स्टार नहीं हैं, भाषा संस्कृति के आधार पर कुछ भी बेमेल नहीं है. और इस हिसाब से तो खली के पास भी अब अमरीकी नागरिकता है. इस तरह ये दोनों मामले भले ही अलग दिखते हों, लेकिन बाहरी व्यक्ति के चुनाव प्रचार को लेकर बनाए नियमों के हिसाब से बात एक ही है.

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अगर नियम क़ायदे बने ही हुए हैं तो सबके लिए होने चाहिए. और इसी से सभी के आचार-विचार का पता चलता है.
 


वीडियो देखें:

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