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कोलकाता की 11 सीटों पर SIR में कटे लाखों महिला-मुस्लिम वोट, पर खेल सिर्फ TMC का नहीं बिगड़ रहा!

West Bengal Election 2026: इन सीटों पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत हटाए गए नामों का एक बड़ा हिस्सा मुसलमान, महिलाओं और गरीब वोटरों का है, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कोर वोट बैंक हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि TMC के कई मजबूत गढ़ कमजोर हो गए हैं. लेकिन कहानी बस इतनी ही नहीं है.

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बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा. (सांकेतिक फोटो: आजतक)

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत किला रहा है. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत कोलकाता की सभी 11 विधानसभा सीटों से लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनाव के जीत-हार के अंतर से कहीं ज्यादा है. ऐसे में माना जा रहा है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं.

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द टेलीग्राफ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि SIR के तहत हटाए गए नामों का एक बड़ा हिस्सा मुसलमान, महिलाओं और गरीब वोटरों का है, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कोर वोट बैंक हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के कई मजबूत गढ़ SIR के बाद कमजोर हो गए हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में, TMC सभी 11 विधानसभा सीटों में से 9 पर और बीजेपी 2 सीटों पर आगे रही थी. 

कोलकाता की इन सीटों से लाखों नाम हटे

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के सूत्रों से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि चौरंगी सीट से 80,000 से ज्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. तीन दूसरी सीटों से हर एक से 70,000 से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए हैं. एक सीट से 60,000 से ज्यादा, दो सीटों पर हर एक से 50,000 से ज्यादा और बाकी चार सीटों पर हर एक से 40,000 से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए हैं. सबसे कम नाम ‘मानिकतला’ से हटाए गए हैं, जिनकी संख्या 42,603 ​​है.

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इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के हटने से बीजेपी इन सीटों पर टीएमसी को कड़ी टक्कर दे सकती है. उदाहरण के लिए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के क्षेत्र भवानीपुर में लगभग 47,000 वोट हटाए गए हैं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां टीएमसी की बढ़त केवल 8,297 वोटों की थी. इसका मतलब है कि यहां मामूली सा स्विंग भी नतीजे बदल सकता है. इस बार BJP के बड़े नेता सुवेंदु अधिकारी इस सीट से ममता बनर्जी को टक्कर देंगे.

टीएमसी कोलकाता पोर्ट, राशबिहारी, बालीगंज, चौरंगी, एंटाली, बेलेघाटा, मानिकतला और काशीपुर-बेलगाछिया सीटों पर भी आगे रही थी. इनमें से चार सीटों पर तृणमूल की बढ़त 10,000 वोटों से कम थी. राशबिहारी (1691 वोट), भवानीपुर (8297), मानिकतला (3575) और काशीपुर-बेलगाछिया (7268). एक और सीट पर तृणमूल की बढ़त 15,000 वोटों से कम थी- चौरंगी (14,645 वोट). एक सूत्र ने बताया, 

“ये सभी पांच सीटें तृणमूल के लिए मुश्किल भरी हो गई हैं, क्योंकि जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर मुसलमान हैं. पिछले कुछ चुनावों में इन लोगों ने ज्यादातर तृणमूल को ही वोट दिया है. लेकिन पार्टी उन चार दूसरी सीटों पर भी सुरक्षित नहीं है, जहां उसे 25,000 से ज्यादा वोटों की बढ़त मिली थी. क्योंकि इन सीटों से भी बहुत बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए हैं.”

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सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल को कोलकाता पोर्ट से 42,893 वोटों की बढ़त मिली थी, जहां 77,125 वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. इनमें से 70 प्रतिशत से ज्यादा वोटर मुस्लिम थे. एक पॉलिटिकल एक्सपर्ट का कहना है कि वोटरों के नाम हटाए जाने का असर दोनों तरफ पड़ सकता है, इसलिए BJP को भी बहुत ज्यादा निश्चिंत नहीं होना चाहिए.

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साल 2024 में, BJP को श्यामपुकुर से 1599 वोटों की बढ़त मिली थी, जबकि जोरासांको से उसे 7401 वोटों की बढ़त हासिल हुई थी. इन दोनों सीटों से क्रमशः 44,693 और 76,524 वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. 

पॉलिटिकल एक्सपर्ट ने बताया कि इन दोनों सीटों पर अल्पसंख्यकों के मुकाबले हिंदी भाषी हिंदू वोटरों के नाम ज्यादा हटाए गए हैं. चूंकि यह माना जाता है कि 2024 में हिंदी भाषी हिंदुओं ने बड़े पैमाने पर BJP के पक्ष में वोट दिया था, इसलिए बीजेपी के लिए भी यह चिंता का विषय है.

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