सुरेश खन्ना पंजाबी खत्री समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसकी क्षेत्र में केवल एक फीसद आबादी है. 67 साल के सुरेश खन्ना ने 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय की स्टूडेंट पॉलिटिक्स से राजनीति में क़दम रखा. उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1980 में शाहजहांपुर से लोक दल के टिकट पर पर लड़ा था. तब वे कांग्रेस उम्मीदवार नवाब सादिक अली खान से हार गए थे. फिर 1985 में भाजपा ने उन्हें टिकट दिया. इस बार उन्हें कांग्रेस के नवाब सिकंदर अली खान ने लगभग 4,000 वोटों से हराया था. इसके बाद 1989 में लहर पलटी और उन्होंने नवाब सिकंदर अली को हरा दिया. तब से अब तक सुरेश खन्ना आठ बार शाहजहांपुर विधानसभा सीट से जीतते आ रहे हैं. सुरेश खन्ना यूपी के नगर विकास मंत्री भी हैं. उनकी लोकप्रियता को देखते हुए BJP ने उन्हें 2004 में शाहजहांपुर लोकसभा सीट से खड़ा किया था, लेकिन वे कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद से हार गए थे. ये पहली बार नहीं है कि ऐसा रिकॉर्ड बना है. प्रमोद तिवारी कांग्रेस के टिकट पर रामपुर खास से 'एक निशान-एक विधान' पर लगातार नौ बार जीत चुके हैं. अमेठी की जगदीशपुर विधानसभा सीट से राम सेवक भी 9 बार के विधायक रहे हैं. 1969 में जनसंघ के टिकट पर, फिर 1974 से कांग्रेस के टिकट पर.
UP Election Results: 9वीं बार विधायक बने सुरेश खन्ना
समाजवादी पार्टी के तनवीर खान को 9,313 वोटों से हराया.
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सुरेश खन्ना यूपी के नगर विकास मंत्री हैं (तस्वीर - PTI)
योगी सरकार में मंत्री रहे सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने शाहजहांपुर (Shahjahanpur) विधानसभा सीट जीत कर एक खास श्रेणी में अपना नाम दर्ज करा दिया है. बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सुरेश खन्ना ने 9वीं बार जीत दर्ज की है. उन्होंने समाजवादी पार्टी के तनवीर खान को 9,313 वोटों से हरा दिया है. सुरेश खन्ना और तनवीर खान की पुरानी सियासी अदावत है. 2017 में सुरेश खन्ना ने सपा के तनवीर खान को 19,203 वोटों से हराया था. उससे पहले 2012 में भी खन्ना ने खान को 16,178 मतों से मात दी थी. तनवीर खान के अलावा बसपा से सुरेश चंद्रा उर्फ धंधू मिश्रा और कांग्रेस से पूनम पांडे मैदान में थे. जहां बीजेपी ने ज़िले में बड़े पैमाने पर प्रचार किया, वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस ने इलाक़े में 'एंटी-इन्कम्बेंसी' का फ़ायदा उठाने की भरपूर कोशिश की थी. राजनीतिक विशेषज्ञों का कयास था कि शहर में सिखों की आबादी और अक्टूबर में हुए लखीमपुर खीरी की घटना का भी यहां की वोटिंग पर असर पड़ेगा. हालांकि, ये हाइपोथिसिस फेल हो गई.
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सुरेश खन्ना पंजाबी खत्री समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसकी क्षेत्र में केवल एक फीसद आबादी है. 67 साल के सुरेश खन्ना ने 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय की स्टूडेंट पॉलिटिक्स से राजनीति में क़दम रखा. उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1980 में शाहजहांपुर से लोक दल के टिकट पर पर लड़ा था. तब वे कांग्रेस उम्मीदवार नवाब सादिक अली खान से हार गए थे. फिर 1985 में भाजपा ने उन्हें टिकट दिया. इस बार उन्हें कांग्रेस के नवाब सिकंदर अली खान ने लगभग 4,000 वोटों से हराया था. इसके बाद 1989 में लहर पलटी और उन्होंने नवाब सिकंदर अली को हरा दिया. तब से अब तक सुरेश खन्ना आठ बार शाहजहांपुर विधानसभा सीट से जीतते आ रहे हैं. सुरेश खन्ना यूपी के नगर विकास मंत्री भी हैं. उनकी लोकप्रियता को देखते हुए BJP ने उन्हें 2004 में शाहजहांपुर लोकसभा सीट से खड़ा किया था, लेकिन वे कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद से हार गए थे. ये पहली बार नहीं है कि ऐसा रिकॉर्ड बना है. प्रमोद तिवारी कांग्रेस के टिकट पर रामपुर खास से 'एक निशान-एक विधान' पर लगातार नौ बार जीत चुके हैं. अमेठी की जगदीशपुर विधानसभा सीट से राम सेवक भी 9 बार के विधायक रहे हैं. 1969 में जनसंघ के टिकट पर, फिर 1974 से कांग्रेस के टिकट पर. 








