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5 साल में कितनी बढ़ी सोनिया गांधी की संपत्ति?

इन पांच सालों में सोनिया गांधी का बैंक बैलेंस घट गया है.

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इस बार सोनिया गांधी का मुकाबला बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह से है.
यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने 11 अप्रैल को रायबरेली से नामांकन दाखिल किया. कांग्रेस दफ्तर में सोनिया ने पूजा की. वहां से जब वो डीएम कार्यालय गईं तो साथ में पूरा परिवार था. राहुल, प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा. रायबरेली कांग्रेस की पारंपरिक सीट है. 2004 से यह सोनिया के पास है. इस बार उनका सामना दिनेश प्रताप सिंह से होना है. सिंह सूबे में कांग्रेस अध्यक्ष रहे हैं और हाल ही में भाजपा में गए हैं.
सोनिया गांधी ने अपनी संपत्ति घोषित कर दी है. हलफनामे के मुताबिक उनके पास 11 करोड़ 81 लाख की संपत्ति है. 2014 में उन्होंने अपनी संपत्ति 9 करोड़ 28 लाख घोषित की थी. गांधी के पास इनहैंड कैश 60 हजार है, जबकि बैंक डिपोजिट 16 लाख 60 हजार है. सोनिया गांधी ने अपने बेटे और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को 5 लाख रुपए लोन दिया है.
नामांकन भरने से पहले सोनिया गांधी ने परिवार के साथ पूजा-अर्चना की
नामांकन भरने से पहले सोनिया गांधी ने परिवार के साथ पूजा-अर्चना की

सोनिया गांधी के पास 4 करोड़ 29 लाख से ज्यादा की चल संपत्ति है. 2014 में यह 2 करोड़ 81 लाख थी. गांधी के पास अचल संपत्ति लगभग साढ़े 7 करोड़ की है. 2014 में यह 6 करोड़ 47 लाख की थी. दिल्ली के डेरामंडी में खेती योग्य जमीन है. इसकी कीमत 7 करोड़ से ज्यादा है. इटली में एक घर है जिसकी कीमत 23 लाख रुपए है. हालांकि उनके पास कोई कार नहीं है.
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पारंपरिक सीट का किस्सा क्या है जवाहरलाल नेहरू ने अवध में किसान आंदोलन चलाया था. जब नेहरू कांग्रेस में नीतिगत काम देखने लगे, तो अवध में ज़मीनी काम मिला लाल बहादुर शास्त्री और फिरोज़ गांधी जैसे नेताओं को. मुल्क आज़ाद हुआ और पहला चुनाव नेहरू ने फूलपुर से लड़ा. अब बात चली कि फिरोज़ गांधी को भी चुनाव लड़वाया जाए. उन दिनों वह नेशनल हेराल्ड का काम देखते थे. लेकिन कौन सी सीट से चुनाव लड़वाया जाए? इसका जवाब दिया रफी अहमद किदवई ने.
सोनिया गांधी ने नामांकन भरने के बाद रोड शो भी किया.
सोनिया गांधी ने नामांकन भरने के बाद रोड शो भी किया.

उन्होंने कहा कि रायबरेली इलाहाबाद और लखनऊ दोनों से लगा हुआ है. आजाद भारत के पहले चुनाव में फिरोज ने रायबरेली से पर्चा भरा और जीते. इसके बाद से रायबरेली का कांग्रेस के साथ नत्थी हो गया. हालांकि दो अपवाद रहे -77 जब जनता पार्टी के राज नारायण ने इंदिरा गांधी को हराया. फिर 1996-1998 के बीच दो चुनाव जब भाजपा के अशोक सिंह यहां से जीते. 2004 से राय बरेली सोनिया के पास है. रायबरेली में छठवे चरण के तहत 6 मई को वोटिंग है.


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