और आखिरकार सिद्धू ने बोल ही दिया... 'खटैक'.
सिद्धू ने कांग्रेस में आने को जस्टीफाई किया, दो नेताओं की मिसाल देकर!
नवजोत सिंह सिद्धू का 'सुबह जलंधर शाम नूं दिल्ली' वाला अंदाज.
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पिछले चार साल से सिद्धू को पार्टी में बड़ा पद दिए जाने की चर्चा चल रही है. (फाइल फोटो)
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कभी बीजेपी को मां बताने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को ये कहकर कांग्रेस जॉइन कर ली कि वो पैदायशी कांग्रेसी हैं और ये उनकी घरवापसी है. 10 साल तक बीजेपी से सांसद रहे सिद्धू की अकाली लीडरशिप से बन नहीं रही थी और इस वजह से बीजेपी लीडरशिप से भी नहीं बनी. इसीलिए उन्होंने पिछले साल 14 सितंबर को पत्नी नवजोत कौर के साथ बीजेपी छोड़ दी थी. नवजोत कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस जॉइन कर चुकी हैं.
एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी जॉइन करते समय नेताओं को जवाब देने में अक्सर झेंपना पड़ता है. पिछले बयान, किस्से और ट्वीट्स इतनी आसानी से पीछा कहां छोड़ते हैं. लेकिन सिद्धू ने मुश्किल सवालों का सामना अपने बोलने के हुनर से किया. वो बोले,
https://twitter.com/bhaiyyajispeaks/status/820851959460548608
https://twitter.com/bhaiyyajispeaks/status/820553548790276096
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एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी जॉइन करते समय नेताओं को जवाब देने में अक्सर झेंपना पड़ता है. पिछले बयान, किस्से और ट्वीट्स इतनी आसानी से पीछा कहां छोड़ते हैं. लेकिन सिद्धू ने मुश्किल सवालों का सामना अपने बोलने के हुनर से किया. वो बोले,
'मेरे पिता ने 40 साल तक कांग्रेस की सेवा की थी. मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहेंगे. सिद्धू पार्टी को मां कहता था और आज भी कहता है, लेकिन मां तो कैकेयी भी थी. अब ये तो पंजाब की जनता बताएगी कि कैकेयी कौन है और कौशल्या कौन है. कांग्रेस में शामिल होकर मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे मैं अपनी जड़ों में लौट आया हूं. बात करके आपस के मतभेद भुलाए जा सकते हैं. अगर लालू-नीतीश एक हो सकते हैं, तो कुछ भी हो सकता है. अभी तो पार्टी शुरू हुई है.'कांग्रेस की ये प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह सिद्धू के नाम रही. नाटकीयता, भावुकता, तथ्य... सब कुछ था उनकी बातों में. उन्होंने कहा...
मिले सुर मेरा तुम्हारा...
'ये मेरी लड़ाई नहीं है, पंजाब के स्वाभिमान की लड़ाई है. मैं कभी पार्टी पर टिप्पणी नहीं करता हूं. पार्टी कोई भी बुरी नहीं होती, उसे चलाने वाले बुरे होते हैं. अकाली दल भी एक पवित्र जमात था, लेकिन अब एक जायदाद बन गया है. बीजेपी से मेरा कोई मन-मुटाव नहीं था. उन्होंने गठबंधन चुना और मैंने कांग्रेस चुनी. मैंने बीजेपी में रहकर आवाज उठाई थी कि कैसे बादलों ने पंजाब को लूटा है. कभी हरित क्रांति के लिए जाना जाने वाला पंजाब आज चिट्टे की वजह से जाना जाता है. जवान फौज में भर्ती नहीं हो पा रहे हैं और अन्नदाता किसान भिखारी बन रहा है.'कांग्रेस जॉइन करने से पहले लंबे समय तक ये अटकलें लगाई जाती रहीं कि सिद्धू आम आदमी पार्टी (AAP) जॉइन करेंगे. ऐसा नहीं हुआ. बीच में उनकी खुद की पार्टी बनाने की भी खबरें आईं, लेकिन वो भी नहीं हुआ. अब स्थिति साफ है. सिद्धू का हाथ कांग्रेस के साथ है.
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