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वैध दस्तावेज के बाद भी वोटर लिस्ट से नाम कटा, फिर महताब शेख विधायकी कैसे जीते?

बंगाल में चुनाव से पहले वोटर्स लिस्ट के स्पेशल रिवीजन की प्रक्रिया चली. इसका मकसद चुनाव आयोग ने फर्जी वोटर्स को हटाना बताया था, लेकिन सभी वैलिड डॉक्युमेंट्स होने के बाद भी महताब शेख का नाम वोटर्स लिस्ट से हटा दिया गया.

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महताब शेख कांग्रेस के जीते दो उम्मीदवारों में से एक हैं. (फोटो- India Today)

बंगाल के महताब शेख का नाम स्पेशल रिवीजन के दौरान वोटर लिस्ट से काट दिया गया था. अब वो बंगाल के फरक्का सीट से विधायक हैं. वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े. वही कांग्रेस जिसके सिर्फ दो उम्मीदवार इस चुनाव में जीत पाए. महताब शेख उन दो विजेताओं में से एक हैं. 

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शेख के लिए ये जीत खास तो है, लेकिन एक और चीज है जो इसे और भी ज्यादा स्पेशल बना देती है. वो है चुनाव लड़ने के लिए उनका संघर्ष, जिसमें उन्हें अपने उम्मीदवार होने को ही नहीं बल्कि भारत का वोटर होने को भी साबित करना पड़ा था. कारण था कि उनका नाम तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट से हटा दिया था. 

बंगाल में चुनाव से पहले वोटर्स लिस्ट के स्पेशल रिवीजन की प्रक्रिया चली. इसका मकसद चुनाव आयोग ने फर्जी वोटर्स को हटाना बताया था, लेकिन इस सभी वैलिड डॉक्युमेंट्स होने के बाद भी महताब शेख का नाम वोटर्स लिस्ट से हटा दिया गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने वजह बताई- ‘तकनीकी कारण’. शेख को चुनाव लड़ना था. टिकट फाइनल हो गया था, लेकिन वोटर लिस्ट में नाम ही नहीं है तो चुनाव कैसे लड़ेंगे? ऐसे में वोटर लिस्ट में नाम जोड़वाने के लिए महताब शेख सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए.

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महताब शेख 8 हजार वोटों से चुनाव जीत गए. (फोटो- ECI)
सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुआई वाली बेंच ने उनके मामले को सुना. उन्होंने पश्चिम बंगाल में नए बने अपीलीय ट्रिब्यूनल को महताब शेख के केस की तुरंत समीक्षा करने का निर्देश दिया. इसके बाद उन्हें सिर्फ मंजूरी ही नहीं मिली, बल्कि वो रिव्यू के तकरीबन 27 लाख आवेदकों में पहले ऐसे व्यक्ति बने, जिनका केस मंजूर हुआ. बाद में प्रक्रिया के तहत इनमें से सिर्फ 1600 मामलों का ही निपटारा हो पाया.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश तो दे दिया लेकिन मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई थी. बंगाल में अपीलीय ट्रिब्यूनल 5 अप्रैल को बना था. यानी पहले चरण के नामांकन से ठीक एक दिन पहले. 6 अप्रैल को फरक्का सीट से पर्चा भरने की आखिरी तारीख थी. शेख के पास टाइम बहुत कम था. देरी हो जाती तो वह चुनाव नहीं लड़ पाते. लेकिन उन्होंने गजब की फुर्ती दिखाई. वो एकदम सही समय पर सुप्रीम कोर्ट गए. इससे उन्हें ट्रिब्यूनल में सबसे पहले सुनवाई का मौका मिल गया. 

ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?

कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. सिवज्ञानम ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कर रहे थे. उन्होंने अपने आदेश में कहा कि चुनाव आयोग ने ये नहीं बताया कि महताब शेख का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के पीछे क्या-क्या हुआ? इसकी पूरी जानकारी नहीं दी. चुनाव आयोग ने सिर्फ ‘तकनीकी कारण’ बताकर पल्ला झाड़ लिया. ट्रिब्यूनल ने ये भी कहा कि महताब शेख के पास सारे वैलिड डॉक्युमेंट्स थे. उनके पास वैध पासपोर्ट था. रिकॉर्ड में उनके पिता के नाम में भी कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि महताब शेख को अलग से एक लिस्ट जारी कर कानूनन वोटर घोषित किया जाए. 

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इस तरह से महताब की ‘वोटरी’ बहाल हुई. इस फैसले के बाद राहत की सांस लेते हुए शेख ने अपना नामांकन दाखिल किया. वह फरक्का सीट से चुनाव लड़े और 63 हजार 50 वोट पाकर शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने बीजेपी के सुधीर चौधरी को 8 हजार से ज्यादा वोटों से हराया.

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