भले ही बॉलिवुड स्टार्स वोटर्स को जागरूक करने में पीछे रह गए हों, लेकिन दुमका के डीएम मुकेश कुमार ने मूक बधिर मतदाताओं को वोट देने के प्रति जागरूक करने के लिए शानदार पहल की है. कहते हैं कि किसी को अपनी बात समझाने के लिए उसकी भाषा में बात करनी पड़ती है. ऐसी भाषा जो सामने वाले की समझ में आए. मुकेश कुमार ने पहले वो भाषा सीखी और मूक-बधिरों से साइन लैंग्वेज में वोट देने की अपील कर रहे हैं. झारखंड की उप राजधानी दुमका में सातवें चरण के तहत 19 मई को वोटिंग है.
हालांकि साइन लैंग्वेज में मूक बधिरों से बात करने की शुरुआत रांची के डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर राय महिमापत ने की थी. इसके बाद झारखंड के लगभग हर जिले के डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर ने इसे अपनाया और मूक बधिरों को वोटिंग के लिए जागरूक कर रहे हैं.
दुमका के जिला अधिकारी मुकेश कुमार ने लल्लनटॉप को बताया कि इस तरह के मतदाताओं के लिए हर तरह की सुविधा उपल्बध कराई जा रही है. जैसे रैंप, वाहन, स्पेशल ऑफिसर, व्हीलचेयर और ट्राइ साइकिल की सुविधा. दुमका लोकसभा क्षेत्र में बूक बधिर 7000 लोग हैं. इनमें 2000 वोटर्स हैं. दिव्यांगों के लिए ऑडियो रिकॉर्ड किए जा रहे हैं. यानी ऑडियो के माध्यम से उन्हें मतदान का महत्व समझाया जा रहा है और उनसे वोट देने की अपील की जा रही है.
इतना ही नहीं अधिकारी इन लोगों के घर-घर जाकर बता रहे हैं कि वोट कैसे करना है. हर एक वोट जरूरी होता है. इसलिए चुनाव आयोग एक-एक व्यक्ति से अप्रोच कर रहा है. लोकल न्यूज पेपर्स में लोगों की फोटो छपवाई जा रही है, जिससे वह अपने वोटिंग राइट के प्रति जागरूक हों. बैलेट पेपर इस बार ब्रेल लिपि में भी छपवाए गए हैं. यानी कुल मिलाकर इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि कोई भी नागरिक जो वोट देने का अधिकार रखता है वह न छूट जाए.
कौन हैं मुकेश कुमार? मुकेश कुमार 2009 बैच के आईएएस हैं. इस समय झारखंड में डिप्टी कमिश्नर कम डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं. दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुके मुकेश कुमार ने बताया कि इससे पहले वह शिक्षा विभाग में काम कर चुके हैं. बूक बधिरों से बात करने के लिए उन्होंने साइन लैंग्वेज सीखी. इसके लिए एनजीओ की मदद ली गई. 2014 का लोकसभा इलेक्शन और झारखंड का विधानसभा इलेक्शन. दो चुनावों में काम करने का अनुभव उनके पास है.

डीसी मुकेश कुमार ने मूक-बधिरों को जागरूक करने के लिए साइन लैंगवेज सीखी.
क्यों झारखंड की राजनीतिक राजधानी है दुमका? झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. 2014 में वह 6वीं बार दुमका से सांसद चुने गए. आदिवासी बहुल इस सीट पर झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबू लाल मरांडी को 1991 में बीजेपी ने दुमका से उतरा लेकिन वह हार गए. 1996 लोकसभा चुनाव में उनके सामने शिबू सोरेन खड़े थे. इस मुकाबले में मरांडी को फिर हार मिली, लेकिन हार का अंतर केवल 5 हजार वोट था. मरांडी का कद पार्टी में बढ़ गया. उन्हें भाजपा ने झारखंड का अध्यक्ष बना दिया था. हालांकि बाद में उन्होंने खुद की पार्टी बना ली.
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