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ममता बनर्जी ने सच में इस्तीफा नहीं दिया तो? कानून क्या कहता है?

पश्चिम बंगाल की मौजूदा सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने 5 मई, मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी.

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ममता बनर्जी ने कहा है कि हार के बाद भी वो इस्तीफा नहीं देंगी. (फोटो- India Today)

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने इशारा दिया है कि वो इस्तीफा नहीं देंगी. हालांकि, पहले उन्होंने ये भी कहा कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं, लेकिन फिर बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने चुनाव में धांधली की है. 100 सीटें 'धोखे' से जीती हैं. ऐसे में उनके इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं है. वह राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ममता बनर्जी सच में इस्तीफा नहीं देंगी तो क्या होगा?

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ममता बनर्जी ने इस्तीफा नहीं दिया तो क्या होगा?

इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीशा माथुर ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े से बात की. नाफड़े ने कहा कि चुनाव हो चुके हैं. चुनाव आयोग ने जरूरी अधिसूचना भी जारी कर दी है. उनकी पार्टी टीएमसी चुनाव हार भी गई है. ऐसे में ममता बनर्जी अगर इस्तीफा देने से इनकार करती हैं तो वह संविधान के विपरीत काम कर रही होंगी. शेखर नाफड़े ने कहा, 

“ऐसे में संविधान के तहत राज्यपाल उनकी सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं. उनके पास एकमात्र यही विकल्प बचेगा कि वह ममता को पद से हटा दें.”

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नाफड़े ने कहा कि 2026 का ये चुनाव तब तक वैध माना जाएगा जब तक कोई सक्षम अदालत उसे रद्द न कर दे. जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हर कोई चुनाव आयोग के नतीजों को मानने के लिए मजबूर है. ऐसी हालत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दायित्व बनता है कि वह अपना इस्तीफा सौंप दें. अगर वो ऐसा नहीं करती हैं और उनका जनादेश (mandate) समाप्त हो चुका है, तो राज्यपाल के पास एकमात्र विकल्प यही बचता है कि वह उनकी सरकार को बर्खास्त कर दें. ऐसा करना संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही होगा.

नाफड़े ने आगे कहा, 

"दूसरी बात ये है कि वह (ममता बनर्जी) चुनाव के नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने के लिए पूरी तरह से आजाद हैं. कोई भी उनके इस अधिकार पर पाबंदी नहीं लगा सकता. लेकिन अगर वो ऐसा नहीं करती हैं और कोर्ट से चुनाव के नतीजों को रोकने से जुड़ा कोई आदेश नहीं आता तो उन्हें चुनाव आयोग के घोषित रिजल्ट को मानना ही पड़ेगा."

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लोकसभा के पूर्व महासचिव क्या कहते हैं?

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य के मुताबिक, जब कोई पार्टी चुनाव हार जाती है और दूसरी पार्टी को बहुमत मिल जाता है तो आमतौर दूसरी पार्टी सरकार बनाती है. यानी नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति होती है. ऐसा होने तक जो मुख्यमंत्री चुनाव हारा है, उसे गवर्नर तब तक पद पर बने रहने के लिए कहेंगे, जब तक कि कोई नया मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं हो जाता. यही प्रक्रिया बंगाल में भी जारी रहेगी.

आचार्य ने कहा, “ममता के पास ये विकल्प नहीं है कि वो इस्तीफा न दें. उन्हें जाना ही होगा. वह बेशक 8 मई तक मुख्यमंत्री बनी रह सकती हैं. उसके बाद वह मुख्यमंत्री नहीं रह पाएंगी. अगर वो आज इस्तीफा भी दे देती हैं तो भी गवर्नर उनसे मुख्यमंत्री के तौर पर काम जारी रखने के लिए कहेंगे, जब तक कोई नया मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं हो जाता.”

पीडीटी आचार्य ने कहा कि अगर ममता कहती हैं कि वो सीएम पद से इस्तीफा नहीं देंगी तो उन्हें ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है. 7 मई को बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाएगा. इसके बाद वो अपने आप ही मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी. वह सिर्फ 8 मई तक ही मुख्यमंत्री रह सकती हैं. उसके बाद संवैधानिक प्रावधानों के लागू होने के कारण वह मुख्यमंत्री नहीं रह जातीं. जहां तक चुनाव को चुनौती देने की बात है तो इसकी उन्हें आजादी है. वह 30 दिनों के अंदर चुनाव के नतीजों को कोर्ट में चुनौती दे सकती हैं.

इस्तीफा देने न देने से फर्क नहीं पड़ेगा?

इंडिया टुडे के लिए कानूनी मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तब भी नई विधानसभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ेगा. राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बगैर भी नई विधानसभा में नई सरकार का नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं. 

संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदलने को लेकर तो संवैधानिक अड़चन है, लेकिन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद नई विधानसभा के लिए कोई अड़चन नहीं होती. ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या न देने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. निर्वाचन आयोग ने जिन्हें जीत का प्रमाण पत्र दिया है वही मान्य होगा. 

बता दें कि बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा हो जाएगा.

वीडियो: ममता को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी ने जीत के तुरंत बाद क्या कहा?

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