The Lallantop

बीजेपी का 'अंग-बंग-कलिंग' मिशन क्या था जो बंगाल चुनाव की जीत ने पूरा कर दिया?

बंगाल की जीत के बाद 24 अप्रैल को यानी मतगणना से ठीक 10 दिन पहले अमित शाह का आत्मविश्वास से भरा एक बयान याद आता है. इसमें शाह कहते हैं कि आजादी के बाद ऐसा पहली बार होगा जब अंग-बंग-कलिंग तक बीजेपी की सरकार होगी.

Advertisement
post-main-image
पश्चिम बंगाल में जीती बीजेपी. (फोटो- PTI)

‘गंगोत्री से गंगा सागर तक. कमल ही कमल.’ पश्चिम बंगाल के नतीजे आने के बाद दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बात कही तो पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक आवाज में इसका अभिवादन भी किया. उत्तराखंड से शुरू होकर उत्तर प्रदेश और बिहार से गुजरने वाली गंगा नदी बंगाल के गंगासागर में समुद्र से मिल जाती है. गंगा की यात्रा के इन सभी पड़ावों पर अब बीजेपी का शासन है. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

बंगाल की जीत के बाद 24 अप्रैल को यानी मतगणना से ठीक 10 दिन पहले अमित शाह का आत्मविश्वास से भरा एक बयान याद आता है. इसमें शाह कहते हैं कि आजादी के बाद ऐसा पहली बार होगा जब अंग-बंग-कलिंग तक बीजेपी की सरकार होगी.

ये तीनों प्राचीन भारत के राजनैतिक नक्शे के वो राज्य हैं, जो इतिहास में निर्णायक महत्व रखते हैं. तीनों ही राज्य ऐसे थे, जहां बीजेपी के ‘अश्वमेध घोड़े’ को ताकतवर क्षेत्रीय पार्टियों ने बार-बार रोक दिया. लेकिन अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह की आक्रामक रणनीतियों ने अंग से लेकर कलिंग तक बीजेपी का झंडा फहरा ही दिया. 

Advertisement
अंग में बीजेपी

अंग राज्य का जिक्र महाभारत में आता है. हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने यह राज्य अपने मित्र कर्ण को गिफ्ट दे दिया था. आज के बिहार को ही प्राचीन अंग राज्य माना जाता है. बाद में यह मौर्य साम्राज्य का हिस्सा बन गया. बीजेपी हमेशा से बिहार की सत्ता पर अपना कब्जा चाहती थी लेकिन प्रदेश की जाति आधारित राजनीति ने उसके मंसूबे कभी पूरे नहीं होने दिए. पार्टी राज्य में सरकार का हिस्सा तो लंबे समय से रही लेकिन उसके अपने मुख्यमंत्री का सपना बार-बार सपना ही रह गया. लेकिन ये सपना पूरा हुआ साल 2025 के चुनाव के बाद.

बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू की अगुआई वाले गठबंधन ने 202 सीटों पर जीत हासिल की. इसमें विपक्ष का गठबंधन सिर्फ 35 सीटों तक सिमट कर रह गया. बीजेपी को 89 सीटें मिलीं. जेडीयू को 85. चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने लेकिन 2026 में एक नाटकीय घटनाक्रम में नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा के सांसद बनकर दिल्ली आ गए. इसके बाद पहली बार बिहार में बीजेपी को अपना पहला मुख्यमंत्री मिला. सम्राट चौधरी की बीजेपी के पहले सीएम के तौर पर ताजपोशी हुई और बिहार एक तरह से बीजेपी शासित राज्य बन गया.

कलिंग में तोड़ा पटनायक का किला

कलिंग को एक सम्राट का हृदय बदल देने वाले राज्य के तौर पर याद किया जाता है. अशोक ने कलिंग के खिलाफ युद्ध लड़ा. ऐसा रक्तपात हुआ, जिसे देखकर राजा अशोक बेहद व्यथित हुए. उन्होंने इस जंग के बाद ही हथियार छोड़ दिया और किसी भी तरह की हिंसा को अलविदा कह दिया. यह कलिंग राज्य आज का ओडिशा है, जो तकरीबन 25 सालों तक क्षेत्रीय नेता नवीन पटनायक के अटूट प्रभुत्व में रहा. नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल (बीजेडी) ने लगातार 24 सालों तक ओडिशा में भाजपा और कांग्रेस दोनों का विरोध किया.

Advertisement

ओडिशा में बीजेपी को संगठनात्मक रूप से बेहद कमजोर पार्टी माना जाता रहा. उसे ‘सिग्नल पार्टी’ कहकर उसका मजाक उड़ाया जाता था. लेकिन साल 2024 में ये धारणा धराशायी हो गई, जब भाजपा ने ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 78 पर जीत हासिल कर ली. नवीन पटनायक के 24 साल के शासन का अंत हो गया बीजद सिर्फ 51 सीटों पर सिमट गई. इतना ही नहीं, बीजेपी ने बीजद को सबसे बड़ा झटका लोकसभा चुनाव में दिया. कभी ओडिशा में अदम्य दबदबा रखने वाली बीजद 2024 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई. वहीं भाजपा ने 20 सीटें जीतकर दिखा दिया कि विधानसभा में उसकी जीत कोई तुक्का नहीं थी. 

अब बंग में भी राज

अंग और कलिंग पर कब्जा होने के बाद बीजेपी का सबसे ज्यादा वांछित राज्य बंग था. ये वही राज्य है, जहां बीजेपी के राजनैतिक आदर्श माने जाने वाले जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था. इस राज्य की सत्ता में बीजेपी की अनुपस्थिति उसे लंबे समय से कचोटती थी. भारत के इस पूर्वी राज्य का ऐतिहासिक महत्व भी है. यह एक जमाने में भारत की बौद्धिक शक्ति के रूप में मशहूर था. इसने बंगाली पुनर्जागरण को जन्म दिया. 

बीजेपी बार-बार यहां की सत्ता के दरवाजे पर दस्तक देती, लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती थी. एक तरह से बीजेपी के लिए यह सबसे कठिन परीक्षा बन गई थी. लेकिन पिछले एक दशक में पार्टी ने यहां जमकर मेहनत की और सोमवार 4 मई को हुई काउंटिंग में ये बाधा टूट गई. बीजेपी ने बंगाल चुनाव में 206 सीटें हासिल कर 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की विदाई तय कर दी. अब पहली बार ऐसा होगा जब बंगाल में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा.

इस तरह से दशकों की कोशिश के बाद बीजेपी ने दो साल के भीतर मोदी के ‘गंगोत्री से गंगासागर तक’ और अमित शाह के ‘अंग-बंग-कलिंग तक’ बीजेपी के शासन का सपना साकार कर दिया. 

वीडियो: ममता को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी ने जीत के तुरंत बाद क्या कहा?

Advertisement