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पंजाब में रहना था तो राज्यसभा गए ही क्यों थे सिद्धू जी?

सिद्धू आए, प्रेस कॉन्फ्रेंस में खूब बोले, मगर असली बात पर चुप्पी चिपका गए.

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नवजोत सिंह सिद्धू
टीवी पर सुबह से सलमान खान छाए थे. वजह, चिंकारा मामले में बरी होना. फिर दोपहर पौने बारह बजे उनकी पिक्चर उतारने आ गए सिद्धू. वजह, राज्यसभा इस्तीफे पर सफाई. जैसे सलमान की फिल्मों में तत्व नहीं होता. वैसे ही सिद्धू की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं था. सिर्फ लफ्फाजी थी, जिसके लिए वह मशहूर हैं. उन्होंने खूब शेर सुनाए, कविताएं पढ़ीं. राष्ट्रप्रेम पर निबंध लिख डाला माइक के सामने. मगर असल बात का जवाब नहीं दिया. किस पार्टी में जाएंगे, सीएम फेस बनना चाहते हैं क्या, विधायक का चुनाव लड़ेंगे क्या. इन तीनों सवालों पर सबसे बड़ा पंजाब का राग गाते हुए कट लिए. आइए देखें उन्होंने क्या कहा:

1

'कहा गया था कि पंजाब छोड़ दो'

राज्यसभा से इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि मुझे ये कहा गया था कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे. धर्मों में सबसे बड़ा धर्म, राष्ट्रधर्म. फिर कैसे छोड़ दे नवजोत सिंह सिद्धू अपना घर. अपनी जड़. अरे पंछी भी उडारी मारता है ना, तो शाम को आकर घोंसले में टिकता है. ये उसका हक है. (फिर सिद्धू एक राष्ट्रभक्त पक्षी की कहानी सुनाते हैं, जो उनकी पुरानी फेवरेट कहानी है. कई बार सुना चुके हैं.) वृक्ष में आग लग गई तो राष्ट्रभक्त पक्षी से लोग कहते हैं कि उड़ जाओ आग लगी इस वृक्ष को जलने लगे हैं पात, उड़ जाओ ऐ पंक्षियों जब पंख तुम्हारे साथ इस पर राष्ट्रभक्त पक्षी कहता है फल खाए इस वृक्ष के गंदे कीन्हे पात, यही हमारा धर्म है, जल मरें इसी के साथ लल्लन उवाच: ये शर्त तो पहले से पता थी, तो सांसदी क्यों स्वीकार की. क्या मंत्रि परिषद विस्तार का मुंह देख रहे थे. उसके बाद राष्ट्रधर्म जागा.

2

'आंधियों में मैं लड़ता था BJP के लिए'

मैं 2004 में पाकिस्तान में कमेंट्री कर रहा था. बीजेपी के छह सात लीडरों के फोन आए, अमृतसर से चुनाव लड़ो. मैंने न की. फिर वाजपेयी ने कहा, कमर कसो. वहां क्या हाल थे. छह बार का एमपी कांग्रेस का. 9 के 9 एमएलए कांग्रेस के. मेयर कांग्रेस का. फिर भी 14 दिन में सवा लाख वोटों से जीता मैं. जब आंधियां चलती थीं तो उन्हें सिद्धू लड़ता था. लल्लन उवाच: अटल की टेक रणनीतिक रूप से अच्छा दांव है. मोदी और आडवाणी, दोनों ही कैंप उनको मानते हैं.

3

'नॉर्थ इंडिया में जब BJP साफ थी, सिद्धू डटा हुआ था'

साल 2009 में नॉर्थ की 50 सीटों पर सब साफ था बीजेपी का. उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू कश्मीर. अकेला सिद्धू जीता. उसके पहले 2007 में बाई इलेक्शन जीता. 2012 में पत्नी ने विधायक का चुनाव जीता. लल्लन उवाच: ये बात दुरुस्त है. सिद्धू का इलेक्टोरल रिकॉर्ड तगड़ा है. इसीलिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों उन्हें अपने साथ चाहते हैं.

4

'मोदी लहर में सिद्धू को डुबो दिया'

मोदी साहब की लहर आई, विरोधी तो डूबे, सिद्धू को भी डुबो दिया. बोले अमृतसर से मत लड़ो. कुरुक्षेत्र से लड़ो या फिर वेस्ट दिल्ली से लड़ो. मैंने कहा कोई पद की इच्छा नहीं. लडू़ंगा तो अमृतसर से. आज कहते हो कि सिद्धू पंजाब छोड़कर चला जाए. https://twitter.com/ANI_news/status/757471217011929089 उसे यह फ़िक्र है हरदम तर्ज़-ए-ज़फ़ा क्या है हमें भी शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है लल्लन उवाच: सही बात. सिद्धू ने राजनीतिक नफा नुकसान की परवाह नहीं की. अरुण जेटली से मोर्चा लिया. जो कि मोदी के खास हैं. इंतजार किया. इसीलिए अमित शाह ने जेटली के विरोध के बावजूद सिद्धू को राज्यसभा भेजा. जबकि जेटली मानते हैं कि वह सिद्धू के चलते लोकसभा का इकलौता लड़ा चुनाव हारे.

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'100 बार पंजाब को चुनूंगा, परिवार से ऊपर'

100 बार परिजन, परिवार और पंजाब में से एक को चुनने को कहा जाएगा, तो 100 बार पंजाब को चुनूंगा. जहां पंजाब का हित होगा, सिद्धू को खड़ा पाओगे. जो कहना था, वो कह दिया. सिद्धू हमेशा पंजाब और अमृतसर की सेवा करना चाहता था. चाहता है.

जो सिद्धू ने नहीं कहा, मगर सबने सुना

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सिद्धू फंस गए हैं. बीजेपी छोड़ दी. हल्ला गुल्ला मचा लिया. मगर जिन शर्तों के साथ आम आदमी पार्टी में जाना चाह रहे हैं, वह पूरी होती नहीं दिख रहीं. वर्ना अब तक ऐलान क्यों नहीं किया झाड़ू पर सवार होने का.

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बीजेपी छोड़ी, मगर मोदी-शाह के खिलाफ एक लफ्ज नहीं बोला. यानी वापसी के सब रास्ते बंद नहीं कर रहे हैं.

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कांग्रेस के खिलाफ भी एक लफ्ज नहीं बोला. अगर आम आदमी पार्टी में बात नहीं बनती है, तो पंजाब के हित के नाम पर कांग्रेस में भी जा सकते हैं. कैप्टर अमरिंदर सिंह बार बार कह चुके हैं कि सिद्धू का स्वागत है.
 

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