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जिसे 'प्रेस्टिट्यूट' कहा, उसने वीडियो डालकर जनरल वीके सिंह को झूठा साबित किया

जनरल वीके सिंह ने पत्रकार से पूछा था, कितना पैसा मिला.

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बीबीसी के इंटरव्यू का स्क्रीनशॉट (सोर्स- ट्विटर)
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह. चूंकि नाम के साथ रिटायर्ड जनरल लगा है और सेनाध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसलिए इनसे बदजुबानी की उम्मीद नहीं की जाती. लेकिन हर बार जनरल साहब उम्मीदों पर पानी फेर देते हैं. और विवाद बढ़ने पर मीडिया को जिम्मेदार ठहरा देते हैं. 4 अप्रैल की शाम किए एक ट्वीट में वीके सिंह ने मीडिया के लिए प्रेस्टिट्यूट शब्द का इस्तेमाल किया है. और ये पहली बार नहीं है. 2015 में भी वह ऐसा कर चुके हैं. योगी आदित्यनाथ द्वारा भारतीय सेना को मोदी जी की सेना बताए जाने पर की गई अपनी टिप्पणी से वीके सिंह पलट गए हैं. पहले उन्होंने सेना को मोदी जी की सेना बताने वालों को देशद्रोही कहा था. अब वे इसे मीडिया की काट छांट बता रहे हैं. बीबीसी ने वीडियो ट्वीट कर सफाई दी योगी आदित्यनाथ के इसी बयान पर बीबीसी ने वीके सिंह से एक इंटरव्यू में सवाल किया. जवाब में वीके सिंह ने कहा, ''अगर कोई कहता है कि भारत की सेना मोदी जी की सेना है तो वो ग़लत ही नहीं, वो देशद्रोही भी है. भारत की सेनाएं भारत की हैं, ये पॉलिटिकल पार्टी की नहीं हैं. भारत की सेनाएं तटस्थ हैं.'' बीबीसी ने इंटरव्यू के उस हिस्से को ट्वीट भी किया है, जिसमें वह देश की सेना को किसी पॉलिटिकल पार्टी से जोड़ने वाले को देशद्रोही कह रहे हैं. क्या कहा था योगी आदित्यनाथ ने? 31 मार्च 2019. गाजियाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह के समर्थन में प्रचार करने आए थे. प्रचार के दौरान उन्होंने भारतीय सेना को मोदी जी की सेना बोल दिया. बोले, ''कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे. और 'मोदी जी की सेना' उन्हें सिर्फ गोली और गोला देती है. ये अंतर है. कांग्रेस के लोग मसूद अजहर जैसे आतंकियों के लिए जी का इस्तेमाल करते हैं. मगर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार आतंकियों के कैंप पर हमले कर उनकी कमर तोड़ती है.'' उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने तो आपत्ति जताई है. साथ ही कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी नाराजगी जाहिर की. और कहा कि सेना देश की होती है, किसी नेता की नहीं. पहले भी कह चुके हैं प्रेस्टिट्यूट 2015 में वीके सिंह यमन में थे. वहां फंसे भारतीयों को नौसेना, वायुसेना और एयर इंडिया की मदद से स्वदेश वापस लाया जा रहा था. वीके सिंह निगरानी के लिए गए थे. इसी दौरान उन्होंने कहा, ''यमन से भारतीयों को निकालने का मिशन, दिल्ली में पाकिस्तान दूतावास के भोज में जाने से कम रोमांचक है.'' इस बयान पर बवाल हुआ तो उन्होंने मीडिया के ही खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कहा, ''दोस्तों, आप प्रेस्‍टिट्यूट्स से और क्या उम्मीद कर सकते हैं.'' योगी से चुनाव आयोग ने रिपोर्ट तलब की सेना को लेकर इस तरह के बयानों की लोग जमकर आलोचना कर रहे हैं. भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल रामदास और नॉर्दन कमांड के हेड रहे जनरल डीएस हुड्डा ने कहा है कि सेना का इस्तेमाल राजनीतिक हित साधने के लिए किया जा रहा है. चुनाव आयोग ने भी गाजियाबाद के डीएम से इस मामले में रिपोर्ट तलब की. इसके बाद योगी आदित्यनाथ को नोटिस जारी किए जाने की खबरें हैं. योगी से पूरे मामले में जवाब तलब किया गया है.
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