30 अप्रैल को एक बार फिर से तेज बहादुर यादव के बारे में चर्चा शुरू हुई. और इसकी वजह ये थी कि उन्हें चुनाव आयोग की ओर से एक नोटिस मिल गया है. इसके बाद ये कयास लगाए जा रहे हैं कि तेज बहादुर यादव का नामांकन खारिज हो सकता है.
क्या है मसला?
तेज बहादुर यादव ने 24 अप्रैल को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था. नामांकन के दौरान तेज बहादुर को बताना था कि क्या सरकारी सेवा में रहने के दौरान उन्हें भ्रष्टाचार की वजह से सेना से निकाला गया था. तेज बहादुर ने जवाब हां में दिया था और कहा था कि 19 अप्रैल 2017 को उन्हें सेना से निकाल दिया गया था.

तेज बहादुर यादव (बाएं) आयरन लेडी इरोम शर्मीला (दाएं) के साथ, जिन्होंने अफस्पा हटाने के लिए 16 साल तक भूख हड़ताल की थी.
29 अप्रैल 2019 को तेज बहादुर ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया. इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग को बताया कि उन्हें भ्रष्टाचार की वजह से नौकरी से नहीं निकाला गया था. तेज बहादुर ने बताया कि पहले पर्चे में गलती से नहीं की जगह हां लिख दिया गया था.
अब 30 अप्रैल को जब चुनाव आयोग की ओर से रिटर्निंग ऑफिसर सुरेंद्र सिंह ने दस्तावेज की जांच शुरू की तो एक ही आदमी के दो अलग-अलग शपथ पत्र मिले, जिसमें नौकरी से निकाले जाने की अलग-अलग वजह थी. इसे देखते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने तेज बहादुर को नोटिस जारी करते हुए कहा कि 1 मई, 2019 की सुबह 11 बजे तक उन्हें नौकरी से निकाले जाने का प्रमाण पत्र पेश करना होगा. अगर तेज बहादुर यादव तय वक्त पर प्रमाण पत्र पेश नहीं कर पाते हैं, तो चुनाव आयोग उनकी उम्मीदवारी को रद कर सकता है.

चुनाव आयोग ने यही नोटिस तेज बहादुर यादव को जारी किया है.
अब प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ तेज बहादुर यादव चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं, फैसला 1 मई को होगा. लेकिन इस बीच सपा, बीएसपी और दूसरे विपक्षी दलों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि तेज बहादुर से प्रमाण पत्र मांगना बीजेपी की साजिश है और इसी वजह से प्रमाण पत्र जमा करने के लिए सिर्फ 24 घंटे का वक्त दिया गया है.









