''हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छूटा करते...''
जब मुलायम ने अखिलेश की बेटी से कहा 'तुम्हारे पापा बहुत ज़िद्दी हैं'
सपा की तमाम उठापटक के बीच मुलायम परिवार का एक इमोशनल किस्सा.
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फोटो अखिलेश यादव के फेसबुक पेज से
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मुलायम और अखिलेश के दिल की दूरी भले बढ़ी हो, लेकिन घर की दूरी नहीं बढ़ी है. अखिलेश की बेटियां अदिति (15) और टीना (10) अपने दादा मुलायम से मिलने उनके घर आ-जा रही हैं. अब उन्हें क्या खबर कि बाप-बेटे के बीच क्या चल रहा है. उनके लिए तो मुलायम अब भी वैसे ही हैं, जैसे पहले थे. अखिलेश को भी इससे कोई तकलीफ नहीं है.यादव परिवार में भसड़ मची है. पापा, बेटा, चाचा... न जाने किसके बीच क्या-क्या चल रहा है. लेकिन, इस भसड़ में एक चीज मौजूं है. घर का बड़ा-बुजुर्ग घरवालों से चाहे जितना नाराज़ चल रहा हो, अपने नाती-पोतों से बातचीत करना बंद नहीं करता. बच्चे भी उनसे लिपटे रहते हैं. ऐसे में ऊपर लिखी ग़ज़ल की ये लाइन यूं ही याद आ जाती है. ज्यादा दिन नहीं हुए, जब मुलायम ने टीना से मजाक में कहा था,''तुम्हारे पापा बहुत जिद्दी हैं.'' टीना ने ये बात अखिलेश को बताई, तो अखिलेश हंसते हुए बेटी से बोले, ''हां, वो तो मैं हूं.'' वैसे मुलायम का पुत्र-प्रेम जब-तब झलक ही जाता है. अब पिता हैं. कर भी क्या सकते हैं. अभी पिछले दिनों ही उन्होंने कहा था, 'अखिलेश हमारा लड़का है. क्या करें, उसे गोली थोड़ी ही ना मार देंगे.'
वैसे ऐसा नहीं कि बाप-बेटे के बीच सिर्फ तल्खियां ही हैं. रिश्ते को नर्म करने की कोशिश दोनों तरफ से हो रही हैं. NDTV के मुताबिक जब पिछले हफ्ते मुलायम इलेक्शन कमीशन के पास गए थे, तो उनके लखनऊ वापस लौटते समय अखिलेश ने मन बनाया कि वो एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने जाएं. पत्नी डिंपल और बेटियां भी साथ जाने वाली थीं, लेकिन मुलायम के साथ अमर सिंह भी थे. जैसे ही अखिलेश को पता चला, उन्होंने पापा से मिलने का प्लान बदल दिया.
मुलायम लगातार ऐसा जताने की कोशिश कर रहे हैं कि बाप-बेटे के बीच ज्यादा तनाव नहीं है, लेकिन उनका बस नहीं चल रहा है, इसलिए अंदर के झगड़े बाहर आ रहे हैं. संडे को मुलायम ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. लेकिन, कलह बरकरार है और बाप-बेटे के गुट अब भी बंटे हुए हैं. बाप के साथ शिवपाल और पार्टी के 'बाहरी' अमर सिंह साथ खड़े हैं, तो अखिलेश के साथ रामगोपाल हैं.सोमवार को मुलायम साइकिल चुनाव निशान पर दावा ठोंकने इलेक्शन कमीशन पहुंचे थे. इससे पहले रामगोपाल ने डेढ़ लाख पन्नों का एक हलफनामा चुनाव आयोग में जमा करवाया, जिसमें ज्यादातर विधायकों के सिग्नेचर थे. उन्होंने कहा कि भले ही साइकिल चुनाव निशान न रहे, अखिलेश अपने आप में यूपी में एक चेहरा है. हम चुनाव में जाएंगे. https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8 सपा में साइकिल पर दावे की बातें चल रही हैं. फिलहाल बाप-बेटे के गुट में कौन इसकी सवारी करेगा, ये तय नहीं है और सबसे बड़ी बात, अगर 17 जनवरी तक ये तय नहीं हुआ, तो चुनाव-आयोग ये चुनाव निशान फ्रीज कर देगा. फिर न साइकिल की गद्दी हाथ आएगी, न उसका हैंडल. हालांकि, चुनाव चिन्ह के मामले में रामगोपाल ने दूरदर्शिता दिखाते हुए इलेक्शन कमीशन से कहा है कि अगर साइकिल फ्रीज होता है, तो वो मोटरसाइकिल लेना पसंद करेंगे.
तमाम उठापटक के बीच दादा मुलायम की आगे की पीढ़ियों को ये नहीं बताया गया है कि दादा और पापा आपस में लड़ रहे हैं. दूरियां बहुत आगे तक नहीं पहुंची हैं. ये अच्छी बात है.
ये स्टोरी निशांत ने की है.
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