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CGPSC घोटाला क्या है? चेयरमैन समेत कई ताकतवर लोगों की औलादों को डिप्टी कलेक्टर बनाने का आरोप

CGPSC परीक्षा का नोटिफिकेशन साल 2021 में जारी किया था. भर्ती के लिए कुल पद थे 171. परीक्षा का प्री एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया था.

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कोर्ट ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन को याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने को कहा है. (फोटो- आजतक)

छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC). जिसका काम राज्य में विभिन्न विभागों में भर्तियां कराने का होता है. इसी में से एक भर्ती राज्य सरकार के प्रशासनिक पदों पर बैठने वालों के लिए आयोजित कराई जाती है. इसके तहत DSP, डिस्ट्रिक्ट एक्साइज ऑफिसर, ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर, एक्साइज सब-इंस्पेक्टर जैसे पदों के लिए भर्ती होती है. CGPSC की ऐसी ही एक भर्ती में घोटाले का आरोप लग रहा है. परीक्षा में धांधली के आरोप लगाए गए हैं. 18 अभ्यर्थियों के सिलेक्शन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CGPSC के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, राजभवन सेक्रेटरी अमृत खलको समेत कई अधिकारियों के बेटे-बेटियों और करीबी रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर नियुक्ति देने के आरोप लगे हैं. मामले को लेकर पूर्व बीजेपी नेता ननकी राम कंवर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है.

171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित हुई थी

CGPSC परीक्षा का नोटिफिकेशन साल 2021 में जारी किया था. भर्ती के लिए कुल पद थे 171. परीक्षा का प्री एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया. जिसमें कुल 2 हजार 565 पास हुए थे. इसके बाद आई मेंस एग्जाम की बारी. 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को मेंस परीक्षा कराई गई. जिसमें कुल 509 अभ्यर्थी पास हुए. इनको इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. जिसके बाद 11 मई 2023 को परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ. 170 अभ्यर्थियों का इसमें फाइनल सिलेक्शन हुआ.

PSC चेयरमैन के करीबियों का सिलेक्शन हुआ

अब इस भर्ती परीक्षा में कथित घोटाले की बात सामने आई है. 18 लोगों की लिस्ट जारी की गई है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि मेरिट लिस्ट में PSC चेयरमैन के रिश्तेदारों और कांग्रेस पार्टी के नेताओं के करीबियों का सिलेक्शन हुआ है. प्रदेश के पूर्व बीजेपी नेता ननकी राम कंवर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भर्ती पर रोक लगाने की बात कही है.

ननकी राम कंवर ने एडवोकेट संजय अग्रवाल के माध्यम से हाई कोर्ट में दायर याचिका में PSC पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा,

“PSC में अधिकारी और नेताओं के बेटे-बेटियों सहित रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP जैसे पदों पर नियुक्त किया गया है. वहीं होनहार बच्चों को दरकिनार किया जा रहा है. अफसरों के रिश्तेदारों को अच्छे पद दे दिए गए हैं. जिसका असर दूसरे अभ्यर्थियों पर हुआ और उन्हें निचले पदों के लिए सिलेक्ट किया गया है.”

याचिका में ये भी कहा गया है कि साल 2020 की परीक्षा में सिलेक्ट हुए तीन अभ्यर्थियों के नाम 2021 वाली नियुक्ति में जोड़ दिए गए हैं.

किसको किस पद पर नियुक्त किया गया?

हाई कोर्ट में दायर याचिका में PSC के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के पांच करीबियों की नियुक्ति के बारे में बताया गया है. इनकी लिस्ट सौंपी गई है. दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सोनवानी के अपने परिवार, उनके करीबी रिश्तेदारों के बच्चों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे बड़े और ताकतवर पदों के लिए चुना गया है. वहीं छत्तीसगढ़ के कुछ बड़े अधिकारियों के बच्चों को भी आबकारी, श्रम विभाग में ऊंचे ओहदों पर नियुक्त कर दिया गया.

परीक्षा से जुड़े एक अभ्यर्थी अमीन ने आजतक से बात करते हुए बताया,

“जब से टामन सिंह PSC के चेयरमैन बने हैं, तब से PSC की कार्यप्रणाली में अनियमितता देखने को मिली है. कुछ विशेष वर्ग के लोगों के परीक्षा में ज्यादा नंबर आ रहे हैं, जबकि परीक्षा साल दर साल कठिन होती जा रही है. अब ये पता नहीं कि वो लोग क्या खास पढ़ रहे हैं.”

याचिका में बताया गया है कि आयोग के एक सचिव के रिश्तेदार को डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्ति दी गई है. वहीं राज्यपाल के एक सचिव की बेटा-बेटी को भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की बेटी और कांग्रेस के एक नेता से जुड़े व्यक्ति के रिश्तेदार को भी डिप्टी कलेक्टर बनाया गया है. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता की बेटी को भी इसी पद पर नियुक्ति दिए जाने का आरोप है.

मामला कोर्ट पहुंचा

सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पूछा है कि इस मामले में PSC के चेयरमैन को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया है. चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की बेंच के सवाल का जवाब देते हुए एडवोकेट संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि चेयरमैन का पद एक संवैधानिक पद है, इस कारण उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया है.

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि PSC सहित दूसरी संस्था में अधिकारी के बच्चों का चयन होना स्वाभाविक है. लेकिन, PSC के चेयरमैन के करीबी रिश्तेदारों का चयन होना कुछ सवाल खड़े करता है. कोर्ट ने मामले की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट में चयनित अभ्यर्थियों ने बताया कि भर्ती परीक्षा में पांच नियुक्तियां हो चुकी हैं. ऐसे में रोक लगाना सही नहीं है. इस पर कोर्ट ने पांच अभ्यर्थियों को छोड़कर बाकी लिस्ट की नियुक्ति पर रोक लगा दी है. ये भी सामने आया है कि जिस नितेश सिंह को PSC चेयरमैन टामन सिंह का बेटा बताया जा रहा था, वो सरपंच रहे राजेश नाम के शख्स का बेटा है. इसके साथ ही प्रज्ञा नायक नाम की अभ्यर्थी की तरफ से भी मामले में हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया गया है.

सरकार ने क्या बताया?

CGPSC भर्ती परीक्षा में धांधली के आरोपों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया कि कोर्ट में सरकार ने अपना पक्ष रख दिया है. उसने एक स्टेटमेंट जारी कर बताया,

“PSC भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है. सरकार ने अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा है. मामले की जांच की जाएगी और उसको कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. जिन कैंडिडेट्स पर आरोप लगे हैं, उनकी नियुक्ति कोर्ट के अगले आदेश तक रोक दी गई है. वहीं जिन कैंडिडेट्स को नियुक्ति मिल गई है, उनकी नियुक्ति कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगी.”

सरकार की तरफ से बताया गया है कि कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई आने वाले हफ्ते में की जाएगी. कोर्ट ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन को याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने को कहा है. इतना ही नहीं, कोर्ट की तरफ से ये भी कहा गया है कि अगर मामले में कोई भी जानकारी तथ्यात्मक नहीं पाई गई, तो याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

बीजेपी ने कई और आरोप लगाए

CGPSC की भर्ती परीक्षाओं में बीजेपी की तरफ से लगातार गड़बड़ी के दावे किए जा रहे हैं. अब तो CBI जांच की मांग भी उठने लगी है. बीजेपी के महामंत्री ओपी चौधरी ने परीक्षा की एक आंसर शीट सामने रखते हुए कहा,

"परीक्षा में 8 अंकों का एक प्रश्न पूछा गया था. प्रश्न 1857 क्रांति में वीर हनुमान सिंह के योगदान से जुड़ा हुआ था. इस प्रश्न के उत्तर में एक अभ्यर्थी ने हनुमान सिंह की जगह वीर नारायण सिंह लिखा. इस अभ्यर्थी को 8 में से साढ़े 5 नंबर दिए गए. वहीं जिस अभ्यर्थी ने वीर हनुमान सिह के बारे में लिखा उसे सिर्फ 4 अंक दिए गए."

चौधरी ने कहा कि इस तरह की आंसर शीट का मूल्यांकन एग्जामिनर, डिप्टी हेड एग्जामिनर और हेड एग्जामिनर तीनों स्तर पर होता है. लेकिन तीनों ने एक तरह के नंबर दिए हैं. चौधरी ने इसी बात पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है? या तो आंसर शीट की ठीक से जांच नहीं हुई या लापरवाही की गई है.

परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि ये राज्य सरकार के गाल पर जोरदार तमाचा है. राज्य का युवा और बीजेपी इस धांधली की आवाज उठा रहे थे. लेकिन राज्य सरकार ने इसकी जांच के आदेश नहीं दिए. उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्णय के बाद सरकार सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है.

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