सातवें चरण की शिक्षक बहाली की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर आज पटना में पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. बिहार में लंबे समय से सातवें चरण के शिक्षक बहाली की मांग हो रही है. STET (State Teachers Eligibility Test) पास अभ्यर्थी लगातार इसके लिए धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं. इसी बीच बिहार में सरकार बदली तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 20 लाख भर्तियों का ऐलान किया. एक ऐलान बिहार के शिक्षा मंत्री ने भी किया. उन्होंने कहा कि 20 लाख में से साढ़े तीन लाख भर्तियां शिक्षा विभाग से होंगी. लेकिन मुंहजबानी ऐलान की बजाय ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करने की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का जुलूस डाक बंगला चौराहे पर पहुंचा तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया.
बिहार: शिक्षक भर्ती मांग रहे CTET, STET अभ्यर्थियों पर पटना में भयानक लाठीचार्ज
21 अगस्त को बिहार के शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग में साढ़े तीन लाख भर्तियों का ऐलान किया. 22 अगस्त को ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया.


21 अगस्त को बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने शिक्षा विभाग में साढ़े तीन लाख भर्तियों का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 15 अगस्त को जिन 20 लाख भर्तियों की बात कही है उसमें से सबसे अधिक साढ़े तीन लाख भर्तियां शिक्षा विभाग से होंगी. उन्होंने कहा,
‘बिहार में 20 लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा. इससे 20 भी कम नहीं होगा. शिक्षा विभाग ही 3.5 लाख नौकरियां देगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो संकल्प लेते हैं उसे पूरा करते हैं. उनके द्वारा 20 लाख लोगों को नौकरी व रोजगार देने की बात जरूर पूरी होगी.
शिक्षा मंत्री के ऐलान के बावजूद पटना की सड़कों पर शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है. पिछले 22 दिनों से ये अभ्यर्थी पटना के गर्दनीबाद में प्रदर्शन कर रहे हैं. इन अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले 3 साल से सातवें चरण के शिक्षक बहाली की बात कही जा रही है लेकिन ऑफिशियल नोटिफिकेशन नहीं जारी किया जा रही है. इसके अलावा इन अभ्यर्थियों की मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन और सेंट्रलाइज्ड हो.
प्रदर्शन क्यों कर रहे शिक्षक अभ्यर्थी?साल 2006 में बिहार में शिक्षक भर्ती आई थी. इस भर्ती को "पहले की चरण की शिक्षक भर्ती" कहा गया. उसके बाद जो भी भर्तियां आईं उन्हें दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें चरण की भर्ती कहा गया. इस क्रम में छठे चरण की भर्ती आखिरी भर्ती थी, जो कि साल 2019 में हुई थी. इसके लिये लगभग 94 हजार पदों के लिये शिक्षक भर्ती निकाली गई थी. फरवरी 2022 में इस चरण की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी. लेकिन सिर्फ 42 हजार पदों पर ही नियुक्ति हो पाई थी. यानी 50 हजार से ज्यादा पद खाली रह गये थे. दी लल्लनटॉप से बात करते हुये एक अभ्यर्थी गौहर ने बताया,
सरकार पिछले तीन साल से ये भर्ती लटका रही है. सातवें चरण की बहाली जुलाई के अंतिम सप्ताह में करने को बोला गया था, अब तो अगस्त का महीना भी बीतने वाला है. सरकार छठे चरण में विशेष चरण बता कर बार-बार उसे जारी रखती है. ऐसे तो सातवें चरण की बहाली कब होगी पता नहीं.
गौहर ने आगे बताया,
सिस्टम को ऑनलाइन करने की मांगछठे चरण के नियुक्ति पत्र फरवरी 2022 में बंटे थे. कुल 94 हजार पदों में से करीब 42 हजार लोगों को ही नियुक्ति पत्र मिले थे. यहां अभ्यर्थी अलग-अलग नियोजन इकाई जाकर अप्लाई करते हैं. बिहार में 8 हजार से अधिक पंचायतें हैं. इसके अलावा नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद आदि भी हैं. ये सब मिलकर अलग-अलग नियोजन इकाई बनाते हैं. जिस भी कैंडिडेट को यहां अप्लाई करना है वो या तो खुद जाकर अप्लाई करता है या फिर पोस्ट के जरिए अप्लाई करता है. एक अभ्यर्थी कम से कम 100 से 150 नियोजन इकाईयों में आवेदन करता है जिससे की उसके भर्ती होने के चांस ज्यादा हों.
बिहार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी बहाली प्रक्रिया को ऑनलाइन और सेंट्रलाइज करने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल बिहार में शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया ऑफलाइन होती है. अभ्यर्थी हर उस जगह अप्लाई करते हैं, जहां उन्हें नौकरी की संभावना दिखती है. उनके मुताबिक ये सारा काम ऑनलाइन किया जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं होता, सभी छात्रों को अलग-अलग ज़िले, प्रखंड और पंचायत में जाकर फॉर्म भरने पड़ते हैं. बहाली ऑनलाइन होने से अभ्यर्थियों को फायदा ये होगा कि वो नियोजन प्रक्रिया के लिए एक फॉर्म भरेंगे और वही पूरे बिहार में काम आएगा. इसे लेकर एक अभ्यर्थी संगीता बताती हैं,
ऑफलाइन फॉर्म भरने में बहुत समय लगता है. अभ्यर्थियों को भागदौड़ करनी पड़ती है और खर्च भी बहुत होता है. इतनी लंबी प्रक्रिया होने के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं. यह प्रक्रिया इतने दिन चलती है की तीन-तीन साल का समय भी लग जाता है. इसके बाद भी सरकार विशेष चरण में बहाली करा रही है. अगर यही प्रोसेस ऑनलाइन और सेंट्रलाइज हो जाये तो इस पूरी प्रक्रिया में समय भी कम लगेगा और रिक्रूटमेंट भी जल्टी पूरा हो जायेगा.
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का दावा है कि बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के पद खाली हैं. इन तीन सालों में (साल 2019 के बाद से) बहुत से पद खाली हुये हैं. अभ्यर्थियों का दावा है की साल 2020 के बाद से करीब 5500 स्कूलों को अपग्रेड किया गया है. लेकिन केवल 3 हजार शिक्षकों की ही बहाली हुई है. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी इन सीटों को जल्द से जल्द भरने की मांग करते हुए नई भर्ती, यानी सातवें चरण की भर्ती लाने की मांग कर रहे हैं. इन अभ्यर्थियों में शामिल राहुल बताते हैं,
बिहार के स्कलों में टीचर-स्टूडेंट रिशियो कम हो चुका है. स्टूडेंट्स की तुलना में टीचरों की बहुत कमी है. फिर भी सरकार हम लोगों के प्रति लापरवाह है. हम तीन साल से नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं. सरकार हमारी नहीं सुन रही है. थक-हार कर हमें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है. लेकिन सरकार कुछ भी साफ नहीं बता रही है. हर बार हमें नई तारीख बता दी जाती है और कुछ होता नहीं है.
बिहार की राजधानी पटना में चल रहे प्रदर्शन में अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती के खाली पदों को जल्द भरने की मांग कर रहे हैं. वो सातवें फेज के नियोजन की डेट जारी करने की मांग कर रहे हैं और उसे जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहाना है कि जल्द ही नोटिफिकेशन जारी किया जाये और भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन और सेंट्रलाइज किया जाये.
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