बिहार की राजधानी पटना में एक जगह है गर्दनीबाग. यहां पिछले 13 दिनों से कुछ लोग धरने पर बैठे हुए हैं. इसकी वजह है शिक्षक भर्ती. धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार में शिक्षक नियोजन के सातवें चरण की बहाली पिछले 3 साल से अटकी हुई है. इसी के विरोध में ये लोग 7 मई से धरने पर बैठे हैं. इनकी मांग है कि जल्द से जल्द सातवें चरण की बहाली शुरू की जाए.
बिहार: 7वें चरण की शिक्षक भर्ती ने अभ्यर्थियों को रुलाया, 13 दिनों से दे रहे धरना
2019 में निकाली 94 हजार शिक्षक भर्तियों का क्या हुआ?



7वें चरण की बहाली की मांग को लेकर गर्दनीबाग में प्रदर्शन करते छात्र
क्या है मामला?
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2006 में जो शिक्षक भर्ती आई उसे 'पहले चरण की शिक्षक भर्ती' नाम दिया गया था. उसके बाद जो भर्तियां आईं उन्हें दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें चरण की भर्ती कहा गई. छठवें चरण की भर्ती थी अंतिम थी. 2019 में 94 हजार शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी. फरवरी 2022 में इसकी प्रक्रिया तो पूरी हो गई, लेकिन नियुक्ति पत्र मिला करीब 42 हजार लोगों को ही. यानी करीब 50 हजार सीटें खाली रह गईं. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी इसके पीछे राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रिया को दोषी बताते हैं. एक अभ्यर्थी गौहर ने दी लल्लनटॉप से बात करते हुए कहा,
"फरवरी 2022 में छठवें फेज के नियुक्ति पत्र बंटे. 94 हजार की बहाली में करीब 42 हजार लोगों को ही नियुक्ति पत्र मिले. जितने भी अभ्यर्थी अप्लाई करते हैं वो सब नियोजन इकाई जाकर करते हैं. आप समझिए कि बिहार में 8 हजार से अधिक पंचायतें हैं. इसके अलावा नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद आदि भी हैं. ये सब नियोजन इकाई बनाते हैं. अगर आपको यहां अप्लाई करना है तो या तो खुद जाकर करना होगा या फिर पोस्ट के जरिए भेजना होगा. अब होता क्या है कि एक अभ्यर्थी कम से कम 100 से 150 जगह आवेदन करता है."
अभ्यर्थी बहाली प्रक्रिया को ऑनलाइन और सेंट्रलाइज करने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल बिहार में शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया ऑफलाइन होती है. अभ्यर्थी हर उस जगह का फॉर्म भरते हैं, जहां उन्हें नौकरी की संभावना दिखती हो. उनके मुताबिक कायदे से किया ये जा सकता था कि सभी फॉर्म ऑनलाइन होते और किसी इंटरनेट कैफ़े में बैठकर छात्र सभी जगह अप्लाई कर देते. लेकिन नहीं, मामला ऑफलाइन का था. सभी छात्रों को अलग-अलग ज़िले, प्रखंड और पंचायत में जाकर फॉर्म भरने पड़े. बहाली ऑनलाइन होने से अभ्यर्थियों को ये फायदा होगा कि वो नियोजन प्रक्रिया के लिए एक फॉर्म डालेंगे और वहीं पूरे बिहार में काम आएगा. इसे लेकर गौहर बताते हैं,
"ऑफलाइन प्रक्रिया में खूब भागदौड़ भी होती है और खर्च भी होता है. इस प्रक्रिया में खूब घालमेल भी होता है और सीट भी खाली रह जाती है. साथ ही दो से तीन साल का समय भी लग जाता है. अगर यही प्रोसेस ऑनलाइन और सेंट्रलाइज होता तो एक सिस्टमैटिक वे में काउंसलिंग और रिक्रूटमेंट पूरी हो जाती."

12 दिन से कर रहे अभ्यर्थी प्रदर्शन.
कब आएगी नई भर्ती?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का दावा है कि बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के पद खाली हैं. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी इन सीटों को जल्द से जल्द भरने की मांग करते हुए नई भर्ती यानी सातवें चरण की भर्ती लाने की मांग कर रहे हैं. इन अभ्यर्थियों में शामिल सिद्धार्थ बताते हैं,
"हम तीन साल से नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं. सरकार हम लोगों के प्रति लापरवाह हो चुकी है. सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि जब हमारा मन करेगा तब ही नोटिफिकेशन जारी करेंगे. विवश होकर हमें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा. लेकिन सरकार अभी तक सिर्फ आश्वासन ही दे रही है."

सरकार जल्द से जल्द जारी करे नोटिफिकेशन
क्या है मांग?
पटना के गर्दनीबाग में पिछले 14 दिन से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों की मांग है कि जल्द से जल्द शिक्षकों के खाली पदों को भरा जाए. इनमें शामिल सुनीता ने दी लल्लनटॉप से कहा,
"सबसे पहले हमारी सरकार से मांग है कि 7वें चरण के भर्ती का नोटिफिकेशन जल्द से जल्द जारी करे. इस बहाली प्रक्रिया को ऑनलाइन और सेंट्रलाइज किया जाए. यानी हम एक बार फॉर्म भरें, जिसमें हम जिन भी नियोजन इकाइयों के लिए अप्लाई कर रहे हैं उनकी प्रेफरेंस मांग ली जाए. उसी हिसाब से मेरिट लिस्ट बनाकर शॉर्टलिस्ट किया जाए. बहाली प्रक्रिया में बिहार के लोगों को पहली प्राथमिकता दी जाए."
बताते चलें कि सातवें दौर के नियोजन को लेकर खुद विभाग के मंत्री विजय कुमार चौधरी कई बार कह चुके हैं कि ये तभी शुरू होगा जब छठवें दौर का नियोजन खत्म होगा.
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