दी लल्लनटॉप का डेली इकोनॉमिक शो– खर्चा-पानी. इसमें हम बात करते हैं रोज़ की आर्थिक सुर्ख़ियों की जिसमें आज हमारा साथ देंगे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुरजीत मजूमदार. आज के एपिसोड के हमने इन मुद्दों पर चर्चा की.
खर्चा-पानी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही, कंपनियां ग्रीन एनर्जी पर क्यों बात करने लगती हैं?
तेल कंपनियां क्या अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही हैं?
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1- सरकार अगले पांच वर्षों में लॉजिस्टिक लागत में पांच प्रतिशत की कटौती करेगी. 2- जैसे ही तेल 83 अमरीकी डालर प्रति बैरल पर पहुंच जाता है, गैस कंपनियां ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव के बारे में बात करना शुरू कर देती हैं. 3- रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के विकास की संभावनाएं उज्ज्वल हैं, लेकिन इसका क्या मतलब है?
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