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फिर महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, प्रति लीटर कितने बढ़ेंगे दाम?

अगले साल देश के सात राज्यों में चुनाव होने वाले हैं इसलिए सरकार के पास आगे तेल की कीमतें बढ़ाने की गुंजाइश कम होगी. तेल के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई दर तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 6.2% पहुंच सकती है

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तेल के दाम बढ़ने से महंगाई और भड़क सकती है (Courtesy: Aaj Tak)

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  • नवंबर 2026 से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में साढ़े तीन से चार प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, जैसा कि ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में बताया गया है।
  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के पीछे मई 2026 में हुई 7.5% की बढ़ोतरी और अगले साल होने वाले सात राज्यों के चुनाव का संदर्भ है।
  • तेल की कीमतों के बढ़ने से तीसरी तिमाही में महंगाई दर 6.2% तक पहुंच सकती है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में वृद्धि करने पर विचार कर सकता है।

अगले महीने यानी नवंबर (2026) से आपको पेट्रोल और डीजल के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं. जानी-मानी इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिसर्च संस्था ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक, भारत में नवंबर में तेल के दामों में इजाफा हो सकता है. इसी साल मई में सरकार ने तेल कीमतों में कुल 7.5% की बढ़ोतरी की थी. अब फिर से तेल के दाम बढ़ सकते हैं. 

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अगले साल 7 राज्यों में चुनाव  

बिजनेस टुडे के मुताबिक अगले महीने फिर से तेल के दाम मई 2026 के मुकाबले आधे ( करीब साढ़े तीन-चार परसेंट) के बीच बढ़ सकते हैं. इस रिपोर्ट में न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग में छपे ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की प्रमुख अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के बयान के हवाले से बताया गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए संभावित समय नवंबर 2026 है. उनका कहना है कि अगले साल भारत के 7 राज्यों में चुनाव होने हैं. पांच राज्यों में जिनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब शामिल हैं , इन राज्यों में मार्च और मई के बीच चुनाव होंगे.

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महंगाई भड़कने का डर!

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई दर तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 6.2% पहुंच सकती है. इसी तरह से चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) के बीच रिटेल महंगाई दर 6.5% तक पहुंचने की संभावना है. महंगाई दर का यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के 2-6% के महंगाई दर के लक्ष्य से ज्यादा है.

वहीं, ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमानों से ज्यादा हैं. इस महीने की शुरुआत में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में, आरबीआई ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए मुद्रास्फीति 6% रहने का अनुमान लगाया था. यह जनवरी-मार्च में घटकर 5.7% हो जाएगी. 

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स को उम्मीद है कि  31 मार्च 2027 में खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान महंगाई दर 5.4% रहने का अनुमान है, जबकि आरबीआई का अनुमान 5.2% है. सितंबर में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर आरबीआई नवंबर में तेल की कीमतों में वृद्धि में बढ़ोतरी करते हैं, तो आरबीआई रेपो रेट में दो बार में करी 50 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा कर सकता है. 

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