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शेयर बाजार में निवेशकों के मिनटों में 6 लाख करोड़ डूबे, गिरावट के 5 बड़े कारण

Share Bazaar Market Crash: इस गिरावट के चलते बंबई शेयर मार्केट (बीएसई) में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 6 लाख करोड़ रुपये घटकर 467 लाख करोड़ रुपये रह गया.

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोलियम, उर्वरक, सोना, एयरलाइंस, होटल जैसे उद्योगों के कारोबार पर असर पड़ सकता है (फोटो क्रेडिट: Business Today))

सोमवार 11 मई को शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई. शेयर बाजार के दोनों सूचकांकों जैसे कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1% से अधिक की गिरावट आई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,100 अंक से ज्यादा गिरकर 76,226 पर आ गया, जबकि निफ्टी 314 अंक गिरकर 23,862 पर पहुंच गया.

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस गिरावट के चलते बंबई शेयर मार्केट (बीएसई) में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 6 लाख करोड़ रुपये घटकर 467 लाख करोड़ रुपये रह गया. मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू को कहते हैं. शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स के सभी शेयरों में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई. टाइटन के शेयरों में 5% से ज्यादा की भारी गिरावट देखी गई. इंडिगो,एसबीआई, एमएंडएम, इटरनल, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल के के शेयरों में भी 2-4% की गिरावट आई. वहीं, बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स शुरुआती कारोबार में 10% बढ़कर 18.50 पर पहुंच गया. वहीं, सभी क्षेत्रीय सूचकांकों में भी गिरावट देखी गई, जिसमें निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3% की भारी गिरावट दर्ज की गई.

बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण ?

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में बाजार में आई आज की गिरावट के पीछे कई कारण बताए गए हैं. आइए जानते की बाजार की गिरावट के 5 बड़े कारण क्या है?

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ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव खारिज किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया. अमेरिका द्वारा ईरान को शांति प्रस्ताव भेजे जाने के कुछ दिनों बाद, ईरान ने भी 10 मई को कुछ शर्तें रखी थीं. ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, ईरान के प्रस्ताव में युद्ध क्षति के मुआवजे की मांग की गई और इसमें कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का अधिकार है .

ईरान ने अमेरिका से होर्मुज में नौसैनिक हटाने, आगे कोई हमला न करने की गारंटी देने, देश पर जारी प्रतिबंध हटाने और ईरानी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को हटाने का भी अनुरोध किया. इस पर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे ईरान का यह प्रस्ताव पसंद नहीं है. यह बिल्कुल अस्वीकार्य है."

तेल की कीमतों में उछाल

इन घटनाक्रमों के बाद तेल की कीमतों में तेज़ी से उछाल आया. ब्रेंट क्रूड की कीमत 4% से अधिक बढ़कर 105.5 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि सोमवार सुबह डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा की कीमत लगभग 5% बढ़कर 99.83 डॉलर प्रति बैरल हो गई. यह उछाल ऐसे समय आया है जब होर्मुज से तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही बाधित है.

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प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि पीएम मोदी ने 10 मई को देश के नागरिकों और कारोबारियों से ईंधन बचाने और तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के बीच ईंधन की खपत कम करने के लिए घर से काम करने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम फिर से शुरू करने का आग्रह किया.’ उन्होंने कहा कि देश को पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करके विदेशी मुद्रा बचानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा हालत में, हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर विशेष जोर देना चाहिए.” 

उन्होंने आगे कहा कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर ही किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा. उनके इस बयान के बाद, कई बड़ी कंपनियों के आभूषण, यात्रा और संबंधित शेयरों में गिरावट आई, जिससे बाजार का माहौल और भी खराब हो गया.

डालर के मुकाबले रुपया कमजोर 

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.4% गिरकर 94.88 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 94.48 पर बंद हुआ था. तेल की बढ़ती कीमतों और प्रधानमंत्री मोदी के ईंधन संरक्षण के आह्वान के कारण रुपये में गिरावट आई है.

एफआईआई द्वारा लगातार बिक्री एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को लगातार चौथे सत्र में भारतीय शेयरों की शुद्ध बिक्री जारी रखी और 4,111 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, "आज शेयर बाजार को दो तरह के दबाव का सामना करना पड़ रहा. पहला, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट निपटने की उम्मीदें हाल फिलहाल नजर नहीं आ रही हैं. इस वजह से, इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है."

विजयकुमार कहते हैं कि बाजार में गिरावट का दूसरा कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेट्रोल, डीजल, सोना, रासायनिक उर्वरक और खाद्य तेल की खपत कम करने और गैर जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है. इस आह्वान का चालू वित्त वर्ष (2026-2027) में आर्थिक विकास पर थोड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. 

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वीके विजयकुमार ने आगे कहा कि पीएम के बयान से पेट्रोलियम, उर्वरक, सोना, एयरलाइंस, होटल और इससे जुड़े उद्योगों के कारोबार पर असर पड़ सकता है. 

वीडियो: 'देश के लिए मरना ही देशभक्ति नहीं' पीएम मोदी ने बढ़ते तेल और गैस के दामों पर क्या कहा?

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