The Lallantop

2008 की मंदी का अनुमान का लगाने वाले अर्थशास्त्री ने चेताया, '7% GDP ग्रोथ रेट काफी नहीं...'

डॉक्टर डूम के नाम से मशहूर अर्थशास्त्री नौरियल रौबिनी का मानना ​​है कि बदलती ग्लोबल सप्लाई चेन भारत को अधिक निवेश लाने का मौका दे सकती हैं. दुनियाभर की मल्टीनेशनल कंपनियां चीन से बाहर (जैसे वियतनाम, भारत वगैरा) अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगा रही हैं.

Advertisement
post-main-image
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारत में बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा कर सकता है (Courtesy: Aaj Tak)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • नौरियल रौबिनी ने भारत के आर्थिक विकास दर को 9% तक बढ़ाने की आवश्यकता बताई है ताकि युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार सृजित किया जा सके।
  • अंतरराष्ट्रीय निवेशों में बदलाव और चीन से ग्लोबल सप्लाई चेन के हटने के कारण भारत को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के अवसर मिल रहे हैं।
  • यदि भारत में रोजगार उत्पादन की दर बढ़ाई नहीं गई, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग से युवा आबादी का आर्थिक लाभ सीमित हो सकता है।

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट की भविष्यवाणी करने के लिए "डॉक्टर डूम" ने भारत को लेकर अहम टिप्पणी की है. मशहूर अर्थशास्त्री नौरियल रौबिनी का मानना ​​है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक सफलता की कहानी लिख सकता है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि देश को अपने कामकाजी युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा करना होगा. उन्होंने कहा कि भारत के लिए अपनी आर्थिक विकास दर को 9% के आसपास लाने की जरूरत है.

Advertisement
9% ग्रोथ होगी तभी युवाओं को अच्छी नौकरियां मिलेंगी 

द इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में रूबीनी ने कहा कि भारत ने सफलता की कहानी लिखी है. भारत के पास अभी और बड़ी सफलता हासिल करने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि भारत में बड़ा बाजार है. प्रतिभाशाली लोगों की भरमार है. देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी मजबूत है. ये सभी बातें भारत की लंबे समय के लिए मजबूत आर्थिक विकास के लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकती हैं. साथ ही, उन्होंने आगे जोड़ा, “इसके लिए 7% की जीडीपी ग्रोथ पर्याप्त नहीं है. युवाओं को अच्छी नौकरियां मिल सकें, इसके लिए भारत को 9% के करीब पहुंचने की जरूरत है.”

उनकी यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर असमंजस का माहौल है. AI शारीरिक मेहनत वाले कामों के साथ स्किल बेस्ड जॉब दोनों को प्रभावित कर रहा है. इस हालात में रोजगार पैदा करना भारत की विकास के लिए एक बड़ी चुनौती है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: 2027 में जापान को पछाड़ देगा भारत, बनेगा चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, IMF का अनुमान

ग्लोबल बिजनेस में बदलाव से भारत को फायदा?

मशहूर अर्थशास्त्री नौरियल रौबिनी का मानना ​​है कि बदलती ग्लोबल सप्लाई चेन भारत को अधिक निवेश लाने का मौका दे सकती हैं.  दुनिया की कई मल्टीनेशनल कंपनियां चीन से बाहर जैसे कि वियतनाम, भारत वगैरह में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगा रही हैं. उन्होंने बताया, "बदलते जियो-पॉलिटिकल समीकरण में भारत को फायदा हो सकता है. चीन से जुड़े जोखिमों को लेकर दुनिया सचेत हो रही है." 

भारत का विशाल घरेलू बाजार चीन के विकल्प तलाश रहे निर्माताओं को आकर्षित करने में मददगार हो सकता है. इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर से जुड़े उद्योग उन क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां कंपनियां अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की तलाश कर रही हैं.

Advertisement
AI से नौकरियां पैदा होना और भी जरूरी 

मशहूर अर्थशास्त्री नौरियल रौबिनी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, ‘अगर देश में पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं होती हैं, तो भारत को युवा आबादी से मिलने वाला आर्थिक लाभ नहीं मिल सकेगा. एआई कई व्यवसायों में रोजगार को नया रूप दे सकती है.  इससे आर्थिक शक्ति के स्रोत के रूप में केवल जनसंख्या वृद्धि पर निर्भर रहना कठिन हो जाएगा.’

रौबिनी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारत में बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा कर सकता है. इससे सिर्फ फैक्ट्रियों में ही नहीं, बल्कि सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और कच्चा माल देने वाले कारोबारों में भी रोजगार बढ़ेगा. अभी टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल सेवाओं में ज्यादातर नौकरियों के लिए खास कौशल की जरूरत होती है. इलेक्ट्रॉनिक्स, गाड़ियां और कपड़े बनाने जैसे उद्योग ज्यादा लोगों को काम दे सकते हैं. इससे लोगों को रोजगार मिलने के साथ काम करने की क्षमता और उत्पादन भी बढ़ सकता है.

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को लगाई फटकार, बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर क्या कहा?

Advertisement