दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का बजट (Budget 2026) पेश होने जा रहा है. पूरी दुनिया की नजर इस बजट पर होती है. तमाम देश और उनके एक्सपर्ट्स ये देखते हैं कि भारत अपने देश में कहां कितना पैसा खर्च कर रहा है. और 2026 में पेश होने वाले बजट में सबकी नजर आम बजट के अलावा रक्षा बजट (Defence Budget) पर भी होगी. 2025 में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी मिलिट्री कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया. मई 2025 में हुए इस ऑपरेशन के बाद से भारत ने सेना में कई सुधार किए हैं. जैसा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साल 2025 की शुरुआत में ही कहा था कि ये सेना के लिए सुधारों का साल है. ऐसे में ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि 2026 में सरकार सेना के बजट में कितनी बढ़ोतरी करती है.
तेजस Mk1A से AMCA तक, Budget 2026 में किन डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर लगेगा पैसा?
Budget 2026: मई 2025 में Operation Sindoor के बाद से भारत ने सेना में कई सुधार किए हैं. जैसा कि रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने साल 2025 की शुरुआत में ही कहा था कि ये सेना के लिए सुधारों का साल है. ऐसे में ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि 2026 में सरकार Defence Budget में कितनी बढ़ोतरी करती है.


इस बजट से ही आने वाले समय में भारत के बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स जैसे तेजस (LCA Tejas) के Mk1A और Mk2 वेरिएंट्स से लेकर AMCA तक का भविष्य तय होगा. साथ ही सेना में खरीद से लेकर इक्विपमेंट आदि भी इसी बजट पर निर्भर होंगे. इस साल रक्षा बजट से कई बड़ी उम्मीदें हैं.

इस समय दुनिया में अनिश्चितता का दौर चल रहा है. रूस-यूक्रेन, अमेरिका-ईरान जैसे मोर्चों पर तनाव बढ़ता जा रहा है. दुर्भाग्य से भारत को भी एक बड़ा ही शांतिप्रिय पड़ोसी पाकिस्तान मिल गया है. लिहाजा पूरी दुनिया इसमें दिलचस्पी लेती है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी अपने डिफेंस बजट पर कितना खर्च करती है. बीते 10 सालों से भारत लगातार अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर रहा है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में जहां ये बजट 2.81 लाख करोड़ था, वो 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ पहुंच गया. इस पैटर्न को भी मानें तो इस बार रक्षा बजट 7 लाख करोड़ को पार कर सकता है. हमेशा की तरह इस बार भी सेनाओं को रक्षा बजट से कुछ उम्मीदें हैं. जैसे-
- हथियार, सैन्य उपकरण और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए अलग से रखे जाने वाले कैपिटल बजट को 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर ले जाने की तैयारी है. अगर ऐसा होता है तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारत अपने डिफेंस बजट के कैपिटल बजट को 2 लाख करोड़ के पार ले जा सकता है.
- इस समय एशियाई क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान और बांग्लादेश का एक नया गठजोड़ बनता दिख रहा है. ऐसे में भारत अपने सभी फ्रंट्स को मजबूत करने की दिशा में खर्च कर सकता है.
- नया जमाना हाइब्रिड वॉरफेयर का है. बंदूक, तोप, फाइटर जेट्स के अलावा ड्रोन एक नया युद्ध का तरीका उभर कर सामने आया है. और तो और युद्ध अब सिर्फ मैदान में नहीं, इंटरनेट से लेकर सोशल मीडिया नैरेटिव और इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर तक का लड़ा जा रहा है. भारत इस दिशा में अपने बढ़ते कदमों को मजबूती देने के लिए बजट में प्रावधान कर सकता है.
- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल अनिल चौहान बीते काफी समय से वॉरफेयर और सेनाओं में क्वांटम तकनीक लाने की बात कर रहे हैं. बजट से उम्मीद है कि इसके लिए धन का आवंटन किया जाएगा.
- किसी भी देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना है तो उसे रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D पर पैसा खर्च करना होता है. तभी जाकर अपने देश में नई तकनीक का ईजाद किया जा सकता है. इस बार के बजट में R&D के लिए भी फंड मिलने की उम्मीद है.
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को मिले प्रोजेक्ट्स को फास्टट्रैक करने के लिए सरकार को अलग से प्रावधान करने की जरूरत है.
भारतीय सेनाओं की एक बड़ी चुनौती यह रही है कि रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन में चला जाता है, जिससे आधुनिक हथियारों की खरीद के लिए सीमित संसाधन बचते हैं. रक्षा बजट 2026 से यह अपेक्षा है कि इस बार कैपिटल बजट को प्राथमिकता मिले और पुराने प्लेटफॉर्म्स को चरणबद्ध तरीके से बदला जाए. साथ ही नए जमाने की टेक्नोलॉजी-ड्रिवन फोर्स की ओर तेजी से बढ़ा जाए. तीनों सेनाओं की जरूरतों पर एक नजर डालें तो :
- आर्मी: आधुनिक राइफलें, आर्टिलरी, ड्रोन, नाइट-फाइटिंग क्षमता
- एयरफोर्स: फाइटर स्क्वाड्रन की कमी दूर करना, स्वदेशी फाइटर LCA और AMCA प्रोजेक्ट, AEW&C विमान
- नेवी: हिंद महासागर में बढ़ते प्रभाव के लिए कैरियर और सबमरीन फ्लीट
जिस तरह के युद्ध दुनिया में हो रहे हैं, उसे देखते हुए ये तय है कि आने वाले समय में खतरे सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे.अब हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों में भी चुनौतियां बढ़ेंगी. इसलिए सेनाओं को ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत है. इसी सोच के चलते बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए कम से कम 10 फीसदी या उससे ज्यादा की बढ़ोतरी पूरी तरह संभव है.
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आर्मी डे से पहले 13 जनवरी 2026 को सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि आर्म्ड फोर्सेज को उम्मीद है कि डिफेंस सेक्टर के बजट में बढ़ोतरी की जाएगी. इससे स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री को और ज्यादा काम मिले और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा. जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि पैसों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से साफ संदेश है कि अगर सेना को खर्च करना है, तो धन की कमी नहीं होने दी जाएगी .
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