घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए लिया गया होम लोन अगर सोच समझ के न लिया जाए, तो यह एक बड़ा वित्तीय बोझ भी बन सकता है. कई लोग लोग जल्दी में या अधूरी जानकारी के साथ होम लोन ले लेते हैं जिसका खामियाजा उन्हें 20–30 साल तक झेलना पड़ता. कई बार तो लोग घर की कीमत से भी ज्यादा पैसा सिर्फ ब्याज के रूप में चुका देते हैं. ऐसे में जरूरी है कि होम लोन लेने से पहले उन गलतियों को समझा जाए, जो सबसे ज्यादा महंगी साबित होती हैं. आज हम आपको इसी तरह की 5 गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी जेब पर भारी पड़ सकती हैं.
नहीं रुलाएगा होम लोन, बस ये 5 गलतियां मत करना
घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए लिया गया होम लोन अगर सोच -विचार कर न लिया जाए, तो यह एक बड़ा वित्तीय बोझ भी बन सकता है


कई लोग होम लोन की ईएमआई (मंथली किस्त) कम रखने के लिए लंबी अवधि का लोन चुन लेते हैं. ये एक बड़ी गलती है. बैंकिंग एक्सपर्ट अश्विनी राणा लल्लनटॉप से कहते हैं कि किस्त कम देनी पड़े इसके लिए कुछ लोग 25-30 साल की अवधि का होम लोन चुन लेते हैं. कई बार बैंक के कर्मचारी भी लंबी अवधि के लोन के लिए दबाव बनाते हैं.
पहली नजर में यह फैसला सही लगता है, क्योंकि हर महीने की किस्त कम आती है. लेकिन ऐसा करना एक बड़ी गलती है क्योंकि लंबी अवधि के दौरान ये गलती जेब पर बोझ बन जाती है. उदाहरण से समझते हैं.
मान लीजिए, आपने 50 लाख रुपये का होम लोन 8% सालाना ब्याज दर पर लिया. अगर आप यह लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो आपकी मासिक EMI लगभग 41 हजार 800 रुपये के आसपास बनेगी. 20 साल में कुल मिलाकर (मूलधन और ब्याज) करीब 1 करोड़ रुपये बैंक को चुकाने होंगे. इसमें करीब 50 लाख रुपये सिर्फ ब्याज होता है और होम लोन का मूलधन (प्रिंसीपल) होगा.
अश्विनी राणा आगे बतातें है, “लेकिन जब आप इसी लोन को 30 साल के लिए लेते हैं तो आपकी होम लोन EMI तो घटकर करीब 36 हजार 700 रुपये बनेगी, लेकिन इन 30 सालों में आप कुल मिलाकर लगभग 1.32 करोड़ रुपये चुकाते हैं. आप जानतकार हैरान होंगे कि लोन की अवधि बढ़ाने के चक्कर में करीब 82 लाख रुपये का ब्याज चुकाना पड़ जाता है. इस तरह से देखें तो लोन की अवधि 10 साल बढ़ाने से आपको लगभग 32 लाख रुपये अतिरिक्त ब्याज देना पड़ता है.”
इसलिए जानकार कहते हैं कि बेहतर ये होगा कि आप होम लोन की EMI घटाने के लालच में लंबी अवधि का लोन न लेकर 15-20 साल का लोन लें. इससे आप जल्दी कर्ज मुक्त होंगे और कुल ब्याज में भारी बचत होगी.
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क्रेडिट हिस्ट्री को नजरअंदाज करनाहोम लोन लेते समय कई लोग अपनी क्रेडिट हिस्ट्री (क्रेडिट स्कोर) को हल्के में लेते हैं. फाइनेंस एक्सपर्ट विनोद रावल लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले आवेदक को अपना क्रेडिट स्कोर जरूर चेक करना चाहिए, क्योंकि यही स्कोर तय करता है कि बैंक आपको कितनी ब्याज दर पर लोन देगा.
कई बैंक 750 से ऊपर सिबिल (CIBIL) स्कोर होने पर कम स्कोर वाले लोगों के मुकाबले कुछ सस्ता लोन ऑफर करते हैं. भले ही ब्याज दरों में मामूली छूट मिले लेकिन इससे लंबी अवधि में बेवजह आपको ज्यादा पैसा चुकाना पड़ सकता है. इसलिए अपने पुराने कर्ज समय पर चुकाएं, क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल करें और किसी भी तरह के डिफॉल्ट से बचें.
फिक्स्ड रेट पर होम लोन 'महंगा' पड़ेगाहोम लोन लेते समय यह फैसला करना बेहद अहम होता है कि आपको फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट (fixed interest rate) पर होम लोन लेना है या फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट पर (floating interest rate). कई लोग इस फर्क को समझे बिना ही लोन ले लेते हैं. फाइनेंस एक्सपर्ट विनोद रावल कहते हैं कि फिक्स्ड रेट में शुरू से लोन खत्म होने के आखिर तक ब्याज दरें स्थिर रहती है.
मान लीजिए आपने 10 परसेंट ब्याज दर पर बैंक से होम लोन लिया तो अगले 20 साल इसी रेट पर फिक्स्ड रहता है. वहीं फ्लोटिंग रेट आरबीआई की मौद्रिक नीति में बदलाव के हिसाब से बदलता रहता है. आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है तो आमतौर पर बैंक भी अपना लोन सस्ता करते हैं. अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो आपकी EMI भी बढ़ सकती है या लोन की अवधि बढ़ जाती है.
विनोद रावल कहते हैं कि कई बार लोग ये सोचकर फिक्स्ड रेट वाला होम लोन चुन लेते हैं कि लोन अवधि के दौरान उनकी ईएमआई नहीं बदलेगी, लेकिन आमतौर पर फिक्स्ड होम लोन की दरें फ्लोटिंग की तुलना में बहुत ज्यादा होती हैं.
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प्री-पेमेंट न करने से लाखों की चपतहोम लोन लेने के कुछ साल तक (शुरुआती वर्षों) ईएमआई का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है और मूलधन बहुत कम घटता है. ऐसे में अगर अगर आप लोन की किस्त शुरू होने के बाद 2-4 साल बाद बीच बीच में थोड़ी अतिरिक्त राशि जमा करते हैं, तो इससे आपके ब्याज में भारी बचत हो सकती है.
बैकिंग एक्सपर्ट अश्विनी राणा कहते हैं कि अगर आपकी आय बढ़ती है या आपको बोनस मिलता है, तो उसका कुछ हिस्सा होम लोन चुकाना बेहतर फैसला होगा. वे आगे कहते हैं कि होम लोन के ब्याज, होम लोन की अवधि या दोनों को कम करने के लिए प्री-पेमेंट एक बढ़िया रणनीति है. इसे वह एक उदाहरण से समझाते हैं .
वह कहते हैं, “मान लीजिए आपके होम लोन की बकाया मूल राशि 50 लाख रुपये है. लोन की अवधि 20 साल और ब्याज दर 8% है. अगर आप 5 लाख रुपये का प्री-पेमेंट करते हैं तो आपको चार साल एक महीना कम ईएमआई भरनी पड़ेगी. यानी आपका लोन करीब 16 साल में ही खत्म हो जाता है. इस तरह से करीब 16 लाख बचेंगे. हालांकि, ये इस बात से तय होगा कि उस समय होम लोन की ब्याज दरें क्या रहती हैं.”
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हिडेन चार्ज पर ध्यान न देनाजब भी लोग होम लोन लेने के लिए आवेदन करते हैं तो आमतौर पर सिर्फ ब्याज दर और बनने वाली किस्त पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई ऐसे चार्ज होते हैं जो आपकी जेब पर असर डालते हैं. जैसे कि प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, टेक्नीकल वैल्यूएशन फीस और लोन को समय से पहले (foreclosure charges) वसूलते हैं. देखने में ये चार्ज भले ही छोटे लग सकते हैं, लेकिन कई बार ये लाखों रुपये तक पहुंच सकते हैं.
आमतौर पर बैंक प्रोसेसिंग फीस भी अलग से लेते हैं. लोन डिस्बर्स होने से पहले ही आपको यह फीस जमा करनी पड़ती है. यह फीस आमतौर पर लोन अमाउंट का 0.25% से 1% तक होती है. ऐसे में लोन लेने से पहले सभी चार्जेज की पूरी जानकारी लेना जरूरी है. इसके लिए अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करें और जहां फायदा दिखे वहीं से लोन लें.
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