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शेयर बाजार ठप, सोना गिरा, फिर कौन सा निवेश करेगा मालामाल?

वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों के भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालने की वजह से बाजार गिरावट का सामना कर रहा है. हाल फिलहाल की बात छोड़ भी दें तो भी पिछले एक साल में बेंचमार्क निफ्टी 50 का रिटर्न जीरो रहा है.

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19 मार्च 2026 (अपडेटेड: 19 मार्च 2026, 11:10 PM IST)
share vs gold vs real estate
पिछले 3 साल में निफ्टी ने 35% का रिटर्न दिया है (फोटो क्रेडिट: Business today)
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जब भी निवेश की बात आती है तो सोना, शेयर और रियल एस्टेट सबसे पहले दिमाग में आते हैं. लेकिन इन दिनों शेयर बाजार लगातार गिर रहा है. पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से निफ्टी 8-9 परसेंट के बीच लुढ़का है. सोना भी कुछ साफ दिशा नहीं दिखा रहा है. 

युद्ध के बावजूद सोने के दाम उतने नहीं बढ़ें हैं जितने आमतौर पर इस तरह की जियो पॉलिटिकल टेंशन के समय बढ़ते रहे हैं. अभी सोने का भाव ऊपर- नीचे चल रहा है. अब बचा रियल एस्टेट सेक्टर. यहां भी स्थिति बहुत आकर्षक नहीं है जैसा पिछले कुछ सालों में दिखाई दिया. 

ऐसे में इन सभी निवेश विकल्पों में आपके लिए कौन सा रास्ता ठीक होगा इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे. ये भी जानेंगे कि एक आम निवेशक के लिए फिलहाल सबसे स्मार्ट निवेश रणनीति क्या हो सकती है?  

सबसे पहले बात करते हैं शेयर बाजार की. जानकारों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों के भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालने की वजह से बाजार गिरावट का सामना कर रहा है. हाल फिलहाल की बात छोड़ भी दें तो भी पिछले एक साल में बेंचमार्क निफ्टी 50 का रिटर्न जीरो रहा है. रिसर्च फर्म केडिया एडवाइजरी के मुताबिक पिछले एक साल में निफ्टी ने जीरो रिटर्न दिया है. वहीं, पिछले 3 साल में निफ्टी ने 35% का रिटर्न दिया है.

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सोना भी नहीं चमका

आमतौर पर युद्ध या किसी भी तरह के संकट के समय सुरक्षित माने जाने वाला सोना भी ठंडा पड़ा हुआ है. 19 मार्च को कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के नीचे फिसल गया. सेबी से मान्यता प्राप्त एडवाइजरी फर्म इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर और सीईओ अमित सुरेश जैन ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा, 

ईरान युद्ध के बावजूद सोना भी इस बार वैसा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है जैसा पहले जियो पॉलिटिकल तनाव के दौरान देखा गया. इसकी वजह मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और मुनाफावसूली है. 

इस साल जनवरी-फरवरी में सोने के दाम खूब उछले थे. इस दौरान लोगों ने प्रॉफिट बुकिंग की थी. हालांकि निफ्टी के बरक्स गोल्ड ने पिछले एक साल में करीब 66% का बंपर रिटर्न दिया है. तीन साल में सोने ने करीब 147 परसेंट का रिटर्न दिया है.

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रियल एस्टेट 

यह सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर जरूर नजर आता है, लेकिन यहां भी चुनौतियां कम नहीं हैं. आरबीआई की तरफ से पिछले एक साल में रेपो रेट में 1.25% की कटौती की गई है. इसके बाद सरकारी और निजी बैंकों ने भी होम लोन की दरें घटाईं हैं. होम लोन सस्ता होने से आमतौर पर घरों की मांग बढ़ती है. लेकिन हाल फिलहाल ऐसा होता नहीं दिखा है. छोटे शहरों के मुकाबले बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर नजर आ रही हैं. 

प्रॉपटाइगर रेजिडेंशियल इनसाइट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 में बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है. फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली का कहना है कि यह हमेशा से साबित हुआ है कि कई अलग-अलग एसेट्स यानी डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखना हमेशा फायदेमंद होता है. साल 2025 में भी ये देखने को मिला. 

शरद का कहना है कि साल 2026 में बड़े शहरों में रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी पर रिटर्न 5-7 परसेंट मिल सकता है. ये पिछले कुछ सालों के मुकाबले कम है. पिछले दो तीन साल में बड़े शहरों में रियल एस्टेट ने 20 परसेंट तक रिटर्न दिया है. 

इस तरह से देखें तो इस समय बाजार का माहौल पूरी तरह अनिश्चित है. जहां एक तरफ शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव है, तो दूसरी तरफ सोना भी चढ़ने की बजाय गिर रहा है. साथ ही, रियल एस्टेट धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. 

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ब्रोकरेज फर्म अविनाश मेंटर रिसर्च के फाउंडर और रिसर्च हेड अविनाश गोरक्षकर ने लल्लनटॉप को बताया कि फिलहाल निवेशकों के लिए किसी एक विकल्प पर दांव लगाने के बजाय संतुलित रणनीति अपनाना ही समझदारी भरा कदम होगा. निवेशकों को म्यूचुअल फंड में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट (SIP) जारी रखना चाहिए. अविनाश का कहना है कि मौजूदा समय सस्ते भाव पर मिल रहे ब्लूचिप शेयरों में लंबी अवधि की निवेश रणनीति बनाना फायदेमंद हो सकता है.  

वहीं इंटेलिसिस वेंचर्स के सीईओ अमित सुरेश जैन ने कहा कि पोर्टफोलियो में सीमित मात्रा में सोना जरूर रखना चाहिए. कुल निवेश पोर्टफोलियो का 10% हिस्सा हमेशा सोने और चांदी में ही रखना ठीक माना जाता है. इसके अलावा रियल एस्टेट को केवल लंबी अवधि के नजरिए से देखना चाहिए. इस तरह से इस अनिश्चित दौर में जोखिम को कम करके बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है.

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