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शेयर बाजार 2000 पॉइंट्स से ज्यादा उछला, सरकार एक काम कर दे तो 'धनवर्षा' तय है!

इस हफ्ते शेयर बाजार में रिकवरी का सिलसिला जारी रहा. सेंसेक्स 2,000 पॉइंट्स से ज्यादा उछलकर 79,310 अंक पर बंद हुआ. इसी तरह निफ्टी 576 पॉइंट्स उछलकर 24,536 अंक के पार पहुंच गया.

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विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लौटने के संकेत दिए हैं (Courtesy: Aaj Tak)

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  • गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 2,000 से अधिक अंक बढ़कर 79,310 और निफ्टी 576 अंक उछलकर 24,536 के पार पहुंच गया, जिससे बाजार में तेज़ी दर्ज हुई।
  • US मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की बढ़त, तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी की वजह से इस तेजी का कारण बना।
  • शेयर बाजार में हुई इस तेजी के कारण कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है और निवेशकों का आकर्षण बना हुआ है।

गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ार में जबरदस्त तेजी आई, सेंसेक्स और निफ्टी 2% से ज्यादा चढ़े. US मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की बढ़त, जिससे ट्रंप को झटका लगा, साथ ही तेल की कीमतों में कमी और दूसरे अच्छे संकेतों ने दलाल स्ट्रीट पर नई तेजी ला दी. इससे इस हफ्ते शेयर बाजार में रिकवरी का सिलसिला जारी रहा. सेंसेक्स 2,000 पॉइंट्स से ज्यादा उछलकर 79,310 अंक पर बंद हुआ. इसी तरह निफ्टी 576 पॉइंट्स उछलकर 24,536 अंक के पार पहुंच गया.

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निवेशकों को 9 लाख करोड़ का फायदा 

सेंसेक्स में बढ़त के लिए इंडिगो के शेयर 6% से ज़्यादा चढ़े, जबकि मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), एलएंडटी (L&T), अल्ट्राटेक सीमेंट, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, ICICI बैंक, TCS, इंफोसिस और HCL टेक्नोलॉजीज के शेयर 2-4% चढ़े. यह तब हुआ जब इंडिया VIX, जो मार्केट में उतार-चढ़ाव को मापता है, 2.5% गिरकर 15 से नीचे आ गया.

इसी के साथ शेयर बाजार में आई बंपर तेजी से BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जोड़ दिए. इससे यह लगभग 503 लाख करोड़ रुपये हो गया.

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इन 7 वजहों से शेयर बाजार में दिवाली?

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार में तेजी की 7 बड़े कारण बताए गए हैं. पहला, कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं. शेयर पर चल रही तेजी को बढ़ाने वाली सबसे बड़ी वजह शायद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट है. यह कई हफ्तों के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल के साइकोलॉजिकल लेवल से नीचे आ गई.

दूसरा, अमेरिकी प्रेसीडेंट डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर अपना कंट्रोल खो दिया.

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तीसरा, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई. 30 साल के US ट्रेजरी नोट्स पर यील्ड 5.2% तक गिर गई, जबकि बेंचमार्क 10 साल के बॉन्ड की यील्ड  4.8% तक गिर गई. गिरते बॉन्ड यील्ड को आमतौर पर एक पॉजिटिव इक्विटी मार्केट माना जाता है .

चौथा, रुपया दो हफ्ते के सबसे ऊंचे लेवल पर खुला. US डॉलर के मुकाबले 0.3% बढ़कर 94.35 पर पहुंच गया. ऐसा तब हुआ जब तेल की कीमतें गिरीं.

पांचवां, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी के नेट खरीदार बने रहे और उन्होंने 7,284 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे. वे इस हफ़्ते कुल मिलाकर हर दिन भारतीय शेयरों के खरीदार बने रहे.

छठवां, US मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की हार से ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेज़ गिरावट आई, क्योंकि इन्वेस्टर्स डेटा सेंटर इन्वेस्टमेंट के आउटलुक को फिर से देख रहे थे. साउथ कोरिया का कोस्पी, जिसे इस AI रैली का चेहरा माना जा रहा था, 4% से ज़्यादा क्रैश हो गया, जबकि ताइवान वेटेड और जापान का निक्केई 2% तक नीचे आ गए.

सातवां, विदेशी निवेशकों की आंशिक वापसी हुई है. उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाया है. पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में, FIIs ने कैश मार्केट में 20,834 करोड़ रुपये के इक्विटी खरीदे.

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आगे क्या उम्मीद है?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि इकोनॉमी के लिए अनुकूल परिस्थितियां मजबूत होने के साथ, मार्केट में तेजी का ट्रेंड जारी रहने वाला है. उन्होंने कहा कि मार्केट के लिए सबसे बड़ी पॉजिटिव बात ब्रेंट क्रूड में 10% की तेज गिरावट है. यह गिरावट इस उम्मीद में है कि US-ईरान विवाद का जल्द ही समाधान हो सकता है.

एनालिस्ट ने कहा कि क्रूड की कीमतों में गिरावट तब हो रही है जब भारतीय इकोनॉमी में काफी मजबूती दिख रही है और कंपनी की कमाई में काफी सुधार हो रहा है. उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) टैक्स खत्म हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लौटेंगे. इससे शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद है. 

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