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सेंसेक्स 1,000 और निफ्टी 300 अंक गिरा, निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे

ईरान-अमेरिका युद्ध फिर भड़कने की संभावना और कच्चे तेल के दाम उछलने समेत कई दूसरी वजहों से शेयर बाजार धड़ाम हुआ है.

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बेंचमार्क अमेरिकी 10 साल वाले ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड 5.2% से ऊपर पहुंच गई (Courtesy: India Today)

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  • भारतीय शेयर बाजार में 28 सितंबर को सेंसेक्स लगभग 1.4% और निफ्टी 50 में 300 से अधिक अंक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में भारी बिकवाली की स्थिति बनी।
  • ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध समाधान न मिलने, कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी, बॉन्ड यील्ड की ऊंचाई और रुपये के कमजोर होने से शेयर बाजार पर दबाव पड़ा है।
  • इस गिरावट के कारण बीएसई लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है, जिससे निवेशकों के फैसलों पर असर पड़ सकता है।

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 28 सितंबर को भारी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगभग 1.4% गिर गए. आज शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,000 से ज्यादा की गिरावट के साथ 72,900 के निचले स्तर पर आ गया. निफ्टी 50 में 300 से ज्यादा अंकों की गिरावट आई और यह 22,850 के निचले स्तर पर पहुंच गया.

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निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे

सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयर लगभग 2% की गिरावट के साथ सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान वाले शेयर रहे. बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बीईएल, एमएंडएम, एलएंडटी, एटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन और कुछ अन्य शेयरों में 1% से अधिक की गिरावट आई.

सभी क्षेत्रीय सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी रियल्टी में 1% से अधिक की गिरावट आई. इस भारी बिकवाली से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैप में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप घटकर करीब 476 लाख करोड़ रुपये रह गया. 

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हालांकि, बाजार की गिरावट नोशनल (काल्पनिक) होती है. इसका मतलब ये हुआ कि जिन निवेशकों ने गिरावट पर शेयर बेचे, उन्हें लॉस हुआ होगा और जिन्होंने शेयर होल्ड रखे और आगे बाजार में तेजी लौटती है तो उनके नुकसान की भरपाई हो जाती है.

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शेयर बाजार क्यों गिरा?

आज शेयर बाजार में आई गिरावट के कई कारण हैं. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ईरान-अमेरिका में युद्ध को लेकर कोई समाधान न निकलने से बाजार तेजी से गिरा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. 

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शेयर बाजार गिरने की दूसरी वजह कच्चे तेल के दाम 2% उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं. बॉन्ड यील्ड में लगातार वृद्धि जारी रही और यह कई साल में सबसे ज्यादा है. बेंचमार्क अमेरिकी 10 साल वाले ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड 5.2% से ऊपर पहुंच गई. यह साल 2004 के बाद से उच्चतम स्तर है. इसके अलावा रुपये में गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है.

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