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कच्चे तेल की कीमत 32% गिरी, रुपया हुआ मजबूत, भारत को क्या फायदा?

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की खबरों के बीच कच्चा तेल फिसला है. वहीं सरकार की तरफ से विदेशी निवेशकों को दी जाने वाली टैक्स छूट से बॉन्ड बाजारों में विदेशी भागीदारी बढ़ी है .

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विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लौटने लगे हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर की खरीदारी बढ़ाई और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते रुपये का मूल्य बुधवार 17 जून को डॉलर के मुकाबले 94.28 तक पहुंचा, जो छह सप्ताह की उच्चतम स्तर है।
  • ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की खबरों के कारण वर्ल्ड मार्केट में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत मार्च के बाद पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गई, जिससे तेल की कीमतों में 32% से अधिक की कमी आई।
  • तेल की कीमतों में गिरावट और आरबीआई की डॉलर खरीद के साथ, विदेशी निवेशकों ने सरकारी बॉन्डों में भारी निवेश किया, जिससे घरेलू विदेशी पूंजी प्रवाह में वृद्धि और रुपये की मजबूती संभव हुई।

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से डॉलर की खरीद बढ़ाने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बुधवार 17 जून को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6 हफ्ते की ऊंचाई 94.28 तक उछल गया. कारोबार के आखिर में डॉलर के मुकाबले आज रुपया 94.52 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की खबरों के बीच मार्च के बाद पहली बार इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया है.

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कच्चा तेल 32% सस्ता हुआ

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक मार्च में ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 32% से ज्यादा की गिरावट आई है. 17 जनवरी को ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI, लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल पर था. तेल की कम कीमतें रुपये के लिए राहत की खबर है. रुपया मजबूत होने से देश के आयात बिल पर दबाव कम होता है. भारत कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 परसेंट आयात करता है.

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, 

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तेल की कीमतों में गिरावट से निश्चित रूप से मदद मिली. तेल कंपनियों ने कारोबार के पहले आधे हिस्से में खरीदारी की. 

उन्होंने आगे कहा कि कारोबार के दूसरे आधे हिस्से में आरबीआई द्वारा डॉलर की भारी खरीदारी देखी गई, जिसके दौरान मुद्रा ने अपना नया इंट्राडे उच्चतम स्तर छुआ. विदेशी निवेशक सरकारी बॉन्डों में भारी निवेश कर रहे हैं.

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विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी

भारतीय केंद्रीय बैंक ने हाल ही में विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं. इनमें से एक घरेलू बॉन्ड पर विदेशी पूंजी निवेश (एफपीआई) के लिए कैपिटल टैक्स गेन को हटाना है. तब से जी-सेक (सरकारी बॉन्ड्स) बाजारों में विदेशी पूंजी का भारी प्रवाह देखा गया है क्योंकि पिछले सप्ताह विदेशी निवेशकों ने सरकारी बॉन्ड में 2 अरब डॉलर (करीब 18 हजार 880 करोड़ रुपये) से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट किया है.

बीएनपी पारिबास इंडिया के इंडिया इक्विटी रिसर्च के प्रमुख कुणाल वोरा ने एक रिपोर्ट में कहा कि आरबीआई के उपायों से कुल मिलाकर 60-70 अरब डॉलर निवेश होने की उम्मीद है. इसके अलावा सरकार की तरफ से विदेशी निवेशकों को दी जाने वाली टैक्स छूट से बॉन्ड बाजारों में विदेशी भागीदारी बढ़ेगी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 16 जून के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयरों में 383 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.

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