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नेशनल मॉनेटाइज़ेशन पाइपलाइन 2.0 क्या है? जिससे सरकार 17 लाख करोड़ कमाने जा रही

National Monetization Pipeline 2.0: सरकार को 5 साल में एसेट मॉनेटाइज़ेशन से 16.72 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. एसेट माने संपत्ति और मॉनेटाइज़ेशन का मतलब संपत्ति से पैसा जुटाना.

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NMP 2.0 का बजट में ऐलान हुआ हुआ था (फोटो क्रेडिट: Business Today)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मॉनेटाइज़ेशन पाइपलाइन 2.0 को लॉन्च कर दिया है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की तरफ से जारी एक प्रेस रिलीज में बताया गया है कि सरकार को 5 साल में एसेट मॉनेटाइज़ेशन से 16.72 लाख करोड़ राशि मिलने का अनुमान है. एसेट माने संपत्ति और मॉनेटाइज़ेशन का मतलब संपत्ति से पैसा जुटाना. चूंकि, यहां बात सरकार की हो रही है तो इस तरह एसेट मॉनेटाइज़ेशन का यहां तात्पर्य पहले से मौजूद सरकारी संपत्तियों से पैसा कमाना है. जैसा कि हमने इस खबर की शुरुआत में बताया कि यह नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन का दूसरा चरण है. सरकार ने Asset Monetisation Plan 2025-30 को लेकर आम बजट 2026 में ऐलान किया था, लेकिन अब इसे लॉन्च किया गया है. आगे बढ़ने से पहले इस योजना के बारे में कुछ जरूरी बातें जान लेते हैं.

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क्या है नेशनल मॉनेटाइज़ेशन पाइपलाइन?

नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन को अंग्रेजी में National Monetisation Pipeline कहते हैं. संक्षेप में NMP. यह भारत सरकार की एक योजना है. इसका मकसद सार्वजनिक क्षेत्र की इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी संपत्तियों से पैसा जुटाना है. सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़ी कई संपत्तियां हैं जैसे कि नेशनल हाईवेज, रेलवे नेटवर्क, एयरपोर्ट, बंदरगाह वगैरह. सरकार इन्हें लंबी अवधि के लिए लीज पर देती है. निजी कंपनियों के साथ साझेदारी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) करती है. यह योजना 2021 में लॉन्च की गई थी और इसे NITI Aayog ने तैयार किया था. नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन में सरकारी संपत्ति बेची नहीं जाती, बल्कि उसे तय समय के लिए निजी कंपनियों को लीज पर देकर या दूसरे तरीके अपनाकर कमाई की जाती है. इस तरह से मालिकाना हक सरकार के पास ही रहता है. 

NMP 1.0 में 6 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य था 

NMP का पहला चरण यानी NMP 1.0 वित्त वर्ष 2020-2021 से शुरु हुआ था और वित्त वर्ष 2024-2025 तक चला. NMP 2.0 एक अप्रैल 2025 से शुरू हो चुका है. पहले चरण में सरकार ने इस योजना के तहत 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 तक की अवधि में एनएमपी 1.0 में जो एसेट मॉनेटाइज़ेशन का लक्ष्य (6 लाख करोड़ रुपये) रखा गया था उसका 89% हासिल कर लिया गया है.

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सरकार ने बताया है कि योजना के दूसरे चरण में 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें 5.8 लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश भी शामिल है. अनुमान है कि इस राशि का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा ( 4.42 लाख करोड़ रुपये) 21,300 किलोमीटर में फैले नेशनल हाइवेज, 15 मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों और 6 रोपवे के मॉनेटाइज़ेशन से जुटाया जाएगा. मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क एक तरह से बड़ा लॉजिस्टिक्स हब होता है. यहां सामान को एक ही जगह पर अलग-अलग तरीकों से लाया-ले जाया जा सकता है, जैसे ट्रक, ट्रेन, एयर कार्गो और शिप वगैरह से. 

किस सेक्टर से कितना पैसा जुटाने का लक्ष्य?

#राजमार्ग, एमएमएलपी, रोपवे से 4 लाख 42 हजार करोड़ 
#बिजली से 2 लाख 76 हजार 500 करोड़ 
#बंदरगाह से 2 लाख 63 हजार 700 करोड़ 
#रेलवे से 2 लाख 62 हजार 300 करोड़ 
#कोयला से 2 लाख 16 हजार करोड़ 
#माइंस से 1 लाख करोड़
#अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर से 52 हजार करोड़ 
#एयरपोर्ट्स से 27 हजार 500 करोड़ 
#पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से 16 हजार 300 करोड़
#वेयरहाउसिंग एवं स्टोरेज से 10 हजार करोड़ 
#टेलीकॉम से 4,800 करोड़ 
#पर्यटन से 1,200 करोड़

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