ईरान युद्ध के चलते बांग्लादेश में कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों की हालत बेहद खराब हो गई है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई फैक्ट्रियों में दर्जनों जुकी सिलाई मशीनें बंद पड़ी हैं. कुछ में तो तीन महीनों से काम बिलकुल बंद है. बांग्लादेश की इन फैक्ट्रियों को देखकर पता लगता है कि ईरान युद्ध दुनियाभर में कपड़ों की सप्लाई चेन पर किस प्रकार असर डाल रहा है. सिर्फ तेल के दाम ही नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी बढ़ रही है.
ईरान-अमेरिका जंग के चलते अब आपके कपड़े भी महंगे होने वाले हैं? फैक्ट्रियों की हालत खराब
ईरान युद्ध का असर पूरे एशिया के कपड़ा बाजार पर दिखने लगा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की हालत देखकर पता लगता है कि ईरान युद्ध दुनियाभर में कपड़ों की सप्लाई चेन पर किस प्रकार असर डाल रहा है.

कपड़ा तैयार होने में काफी समय लगता है. कई बार कपड़ा बनाने से लेकर इसकी सिलाई और ट्रांसपोर्ट तक का काम कई देशों से होकर गुजरता है. कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ रही हैं. क्रूड ऑयल महंगा होने से पॉलिएस्टर की लागत में भारी इजाफा हुआ है.
कपास महंगा होने से कीमतें बढ़ींइसके अलावा कपास की कीमतों में भी उछाल आया है. अल नीनो की वजह से इस साल कपास का उत्पादन घटने की संभावना है. इस वजह से कपड़ा बनाने वाली कंपनियां उत्पादन के तरीकों में बदलाव पर विचार कर रही हैं.
दुकानदार भी यह तय कर रहे हैं कि कीमतें बढ़ाई जाएं या कम मुनाफे पर सामान बेचा जाए. ऐसे में ठंड में लोगों को कपड़ों के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं. चूंकि ब्रांड आमतौर पर एक साल पहले ही ऑर्डर दे देते हैं, इसलिए खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि बढ़ती कीमतों का असर अगले साल फरवरी से लेकर अप्रैल-मई-जून में दिखाई देगा.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान युद्ध से पहले पॉलिएस्टर की कीमत कपास की कीमत से लगभग आधी थी. फिर कच्चा तेल महंगा होने से चीन में इस सिंथेटिक कपड़े की कीमतें लगभग चार साल की ऊंचाई पर पहुंच गईं.
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जारा और पुल एंड बियर जैसे ब्रांडों को पॉलिएस्टर की आपूर्ति करने वाली कंपनी प्लमी ने युद्ध शुरू होने के कुछ ही हफ्तों के भीतर पॉलिएस्टर धागे की कीमतों में एक 25 परसेंट तक का इजाफा देखा. इसके चलते कपास की कीमतें भी दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं.
अल नीनो के कारण फसलों को और अधिक नुकसान होने की आशंका के चलते कपास के वायदा भाव हाल ही में मार्च 2024 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं.
भारतीय कपड़ों का निर्यात घटाईरान युद्ध का असर पूरे एशिया के कपड़ा बाजार पर दिखने लगा है. जुलाई महीने में भारत से होने वाले तैयार कपड़ों (रेडीमेड गारमेंट) का निर्यात पिछले साल की तुलना में 4.5% गिर गया.
चालू वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल से 31 जुलाई 2026 के बीच भारत से कपड़ों का निर्यात 10.5% तक गिर गया. भारत कपड़ों का निर्यात करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल है. दुनियाभर में कपड़ों और रेडीमेड कपड़ों के बिजनेस में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4% है.
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