महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालक मराठी सीखेंगे. राज्य सरकार ने आदेश भी जारी कर दिया है. शुक्रवार, 1 मई को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी कह दिया कि राज्य में रहने वाले लोगों को मराठी सीखनी ही चाहिए. हालांकि, उन्होंने ये भी साफ किया कि भाषा के नाम पर हिंसा नहीं होनी चाहिए. ये कतई मंजूर नहीं है.
'मराठी तो सीखनी होगी, नहीं तो हम सिखाएंगे', सीएम देवेंद्र फडणवीस का ऐलान
हालांकि सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र कभी इतना तंग मानसिकता वाला नहीं रहा कि राज्य के बाहर के लोगों को कहे कि वो यहां नहीं रह सकते.


सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र कभी इतना तंग मानसिकता वाला नहीं रहा कि राज्य के बाहर के लोगों को कहे कि वो यहां नहीं रह सकते. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, फडणवीस ने कहा,
जहां तक भाषा की बात है, हर किसी को अपनी भाषा पर गर्व होना जरूरी है. मराठी भाषा पर गर्व होना चाहिए. महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखने की कोशिश करनी चाहिए. अगर उन्होंने नहीं सीखी है तो हम उन्हें सिखाएंगे.
फडणवीस ने आगे ये भी स्पष्ट किया कि भाषा के नाम पर हिंसा या किसी तरह का विवाद मंजूर नहीं है. सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र ने भक्ति आंदोलन देखा है और इसने एक सुधारवादी राज्य के रूप देश को दिशा भी दी है. उन्होंने ये भी बताया कि महाराष्ट्र दुनिया की 30वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
राज्य सरकार का ऐलान
सीएम का ये बयान राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के उस ऐलान के बाद आया है, जिसमें 1 मई से राज्य में ऑटो या टैक्सी चलाने वाले लोगों को मराठी भाषा की जानकारी होना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके तहत महाराष्ट्र के सभी लाइसेंसी टैक्सी और ऑटो ड्राइवर को ट्रांसपोर्ट दफ्तरों में जाकर सत्यापित कराना होगा कि वो मराठी पढ़ और लिख सकते हैं.
ट्रांसपोर्ट कर्मचारी कर रहे विरोध
राज्य सरकार के इस ऐलान के बाद प्रदेश में भाषा से जुड़े विवाद पर फिर बहस छिड़ गई है. इसने परिवहन कर्मचारियों के बीच चिंता पैदा कर दी है. खासतौर पर उन कर्मचारियों में इससे नाराजगी है जो महाराष्ट्र के बाहर से हैं. प्रदेश में ऑटो-टैक्सी ड्राइवर्स के असोसिएशन ने इसे प्रवासी कर्मचारियों का उत्पीड़न बताया है और चेतावनी दी है कि अगर भाषा के नाम पर जुर्माना लगाया गया तो राज्य भर में विरोध प्रदर्शन होगा.
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