ईरान युद्ध की वजह से किचन में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों जैसे कि कुकिंग ऑयल, ड्राई फूट्स वगैरा के दाम पहले से काफी चढ़ चुके हैं. अब पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ने से किचन में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों के दाम भी उछल सकते हैं. हाल ही में अमूल और मदर डेयरी समेत कई कंपनियों ने दूध के दाम 2-3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं.
पेट्रोल, दूध, ब्रेड के बढ़े दाम तो बस शुरुआत है, असली संकट जानकर पसीने छूटेंगे
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल और सीएनजी वगैरा के दाम बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी सप्लाई चेन पर पड़ता है.


मॉडर्न ब्रेड ने भी अपनी ब्रेड के दामों में इजाफा किया है. कंपनी प्रति पैकेट पर 5 रुपये बढ़ा चुकी है. लेकिन जानकारों का कहना है कि ये तो बस शुरुआत भर है. आगे भी फूड आइटम्स या लोगों की रोजाना जरूरत वाली चीजों के दाम बढ़ेंगे.
खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ेंगेहिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर संजीत सिंह ने लल्लनटॉप के साथ बातचीत में कहा कि पेट्रोल-डीजल और सीएनजी वगैरा के दाम बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी सप्लाई चेन पर पड़ता है. उन्होंने कहा,
“कंपनियों के लिए फैक्ट्री से गोदाम और फिर दुकानों तक सामान पहुंचाना महंगा हो जाता है. भारत में अब भी ज्यादातर ट्रक डीजल पर चलते हैं. इसके अलावा सिंचाई साधनों और खेती के ज्यादातर उपकरण भी डीजल से चलते हैं. ईंधन महंगा होने से न सिर्फ चीजों की ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) महंगी हो जाती है, बल्कि खेती की लागत भी बढ़ जाती है.”
प्रोफेसर संजीत सिंह आगे कहते हैं कि मालभाड़ा बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दालों, पैकेज्ड फूड, बिस्किट, नमकीन और रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ सकते हैं. खाड़ी युद्ध का असर भारत के महंगाई आंकड़ों पर पहले ही पड़ चुका है. अप्रैल में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 3.48% हो गई, जबकि मार्च में यह 3.4% थी.
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि ईंधन के दाम बढ़ने से अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना है. उन्होंने आगे कहा कि ट्रांसपोर्ट और सामान पहुंचाने के खर्च में इजाफा होने से जरूरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं. इससे आम लोगों का बजट बढ़ेगा.
इसके अलावा ट्रक, बसें, रेल फ्रेट, खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बड़े पैमाने पर डीजल का इस्तेमाल होता है. ईंधन महंगा होने का सीधा असर सब्जियां, अनाज, दूध, दवाइयां, FMCG प्रोडक्ट्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी की लागत पर पड़ सकता है.
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ट्रांसपोर्टर्स ने मालभाड़ा बढ़ायाइकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सुनील अग्रवाल कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई लागत पर लगभग 3-4 पर्सेंट का प्रभाव पड़ेगा.
लखनऊ के ट्रांसपोर्टर अनुराग पांडेय ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि डीजल के दाम करीब 4 रुपये बढ़ने से ट्रांसपोर्टरों ने कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, दिल्ली, इंदौर और कोलकाता समेत कई शहरों में मालभाड़ा बढ़ा दिया है. उनका कहना है कि अपनी लागत निकालने के लिए ट्रांसपोर्टरों ने मालभाड़े में 15 पर्सेंट तक का इजाफा कर दिया है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर शिवाजी सिंह का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. अगर कच्चे तेल के दाम और बढ़ते हैं तो भारत में तेल कंपनियों को आगे भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करना पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले समय में अपनी रॉ मैटेरियल और ट्रांसपोर्ट लागत की भरपाई के लिए रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों (FMCG) के दाम बढ़ सकते हैं. अगर कंपनियों ने बिक्री घटने के डर से दाम नहीं बढ़ाए तो अपने प्रोडक्ट्स के वजन में कटौती कर सकती हैं.
यानी आम आदमी की हालत ‘इधर कुआं उधर खाई’ वाली हो सकती है. कोई एक नुकसान तो उन्हें झेलना ही होगा.
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आगे महंगाई और भड़कने की संभावना
इस बीच , बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटानिया और विब्स बिस्किट के दाम बढ़ा सकती हैं. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि दुनिया की जानी मानी वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा ने कहा कि अगर अल नीनो और कम बारिश के चलते खाद्य उत्पादन में कमी आती है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. नोमुरा ने आगे कहा कि हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-2027 में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर लगभग 6% सालाना के स्तर पर पहुंच जाएगी. इस दौरान सब्जियों, दालें और खाद्य तेल जैसी चीजों के दाम बढ़ेंगे. वित्त वर्ष 2025-2026 में यह 0.6 पर्सेंट रही है.
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फूड डिलीवरी और कैब महंगी पड़ेगीहिंदू बिजनेस लाइन में छपी एक खबर में ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि ईंधन (पेट्रोल-डीजल और सीएनजी) के दाम बढ़ने से फूड डिलीवरी कंपनियां आने वाले दिनों में डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकती हैं. वहीं, जानकारों का कहना है कि स्थानीय परिवहन के साधन जैसे कि लोकल टैक्सी किराया, बस, रैपिडो, ओला और ऊबर वगैरा भी अपना किराया बढ़ा सकते हैं.
वीडियो: एक हफ्ते में 4 रुपए लीटर तक कैसे महंगा हो गया पेट्रोल-डीजल?






















