‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता शब्द से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?’
BHU के ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ वाले सवाल पर हंगामा, अखिलेश यादव ने सब BJP पर डाल दिया
NEET पेपर लीक के बीच बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के एक सवाल पर बवाल मच गया है. इतिहास के पेपर में पूछे इस सवाल में 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' के बारे में पूछा गया है, जिसका कई लोगों ने विरोध किया है. इसे विभाजनकारी बताया है.


नहीं, ये सवाल हम आपसे नहीं पूछ रहे. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के इतिहास के एग्जाम के पेपर में ये सवाल स्टूडेंट्स से पूछा गया था. अब इस पर बवाल मच गया है. विश्व हिंदू परिषद से लेकर समाजवादी पार्टी तक इस सवाल के विरोध में एकजुट दिखने लगे हैं. क्या है बवाल, आपको विस्तार से बताते हैं.
BHU में ब्राह्मणवादी पितृसत्ता के सवाल पर बवाल16 मई 2026 को बीएचयू में एमए इतिहास विषय के चौथे सेमेस्टर का पेपर हुआ. 70 नंबर वाले तीन घंटे के इस पेपर में एक सवाल ‘विमेन इन मॉडर्न इंडियन सोसाइटी (1950)’ विषय पर था. इसमें ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ से संबंधित वही सवाल पूछा गया था, जो ऊपर हमने लिखा है.
अब इस क्वेश्चन ने समाज के एक वर्ग को भयंकर नाराज कर दिया है. अखिल भारतीय मनीषी परिषद के महासचिव दिवाकर द्विवेदी ने अंग्रेजी अखबार TOI से कहा कि ये ब्राह्मणों को निशाना बनाने की एक सोची-समझी कोशिश है, जो सनातन परंपराओं के ध्वजवाहक रहे हैं.
पेपर के सवाल ने छेड़ी बहसदिवाकर द्विवेदी ने इसके लिए वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहरा दिया. उन्होंने आगे कहा कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोग भले ही सत्ता और शासन से दूर हो गए हों, लेकिन उनके सपोर्टर अभी भी कॉलेज और शिक्षा संस्थानों में बैठे हैं. ऐसे ही लोगों को इस तरह के सवाल पूछने का मौका मिल रहा है. ये लोग समाज में समानता को बिगाड़ते हैं और उसे जातियों के आधार पर बांटते हैं.
श्रीकाशी विद्वत् परिषद के अध्यक्ष वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा,
हमारे धर्मशास्त्रों में पितृसत्ता या ब्राह्मणवादी विवाद जैसी कोई बात नहीं मिलती. शास्त्रों और पुराणों में नारी शक्ति को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है. यहां तक कि वैदिक शास्त्रों में भी शक्ति का उल्लेख प्रमुख रूप से किया गया है. लेकिन जब बड़े संस्थानों से इस तरह के सवाल उठाए जाते हैं तो समाज में बंटवारे जैसे हालात पैदा होते हैं. यह किसी खास वर्ग को निशाना बनाने की कोशिश जैसा दिखाई देता है, जो ठीक नहीं है.
समाजवादी पार्टी के ‘ब्राह्मण’ सांसद सनातन पांडेय ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई करनी चाहिए. चाहे उसका कुलपति हो या उससे जुड़े कोई लोग हों. पांडेय ने आगे कहा कि परीक्षा की कॉपी या परीक्षा के सवाल एक दिन में नहीं तैयार होते. वो पहले से तैयार हुए होंगे और उसका अध्ययन वहां के कुलपति ने किया होगा?
मामले पर सपा मुखिया अखिलेश यादव की भी प्रतिक्रिया आई. उन्होंने कहा,
अभी सुनने में आया है कि बीएचयू में कोई क्वेश्चन पेपर आ गया है और उसका सवाल भी बड़ा टेढ़ा-मेढ़ा है. बताओ बीएचयू जैसी प्रतिष्ठित संस्थान जो हमारे पूजनीय सम्मानीय शिक्षाविद मदन मोहन मालवीय जी ने बनाई. उस संस्थापक के उस संस्था में कैसे सवाल पूछे जा रहे हैं? यह भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति है कि किसी को बदनाम करो और फिर उससे सवाल पुछवाओ. बदनाम भी बीजेपी ही कराती है और फिर सवाल भी हमसे पूछे जाते हैं.

बीएचयू के इसी पेपर में एक और सवाल है, जिसकी भाषा पर उंगली उठ रही है. सवाल है, ‘उपयुक्त उदाहरणों के साथ औपनिवेशिक भारत में महिला संगठनों के विकास की चर्चा कीजिए. औपनिवेशिक काल में भारतीय महिलाओं के लिए शिक्षा के कौन-कौन से नए रास्ते खुले? निजी और सार्वजनिक जीवन के बीच की दूरी को तोड़ने में यह कितना प्रभावी रहा?’
वशिष्ठ त्रिपाठी ने इस पर कहा कि ऐसे सवाल पूछना निराधार और अनैतिक है. यह शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी को दिखाता है. गार्गी, कात्यायनी, मैत्रेयी और अन्य ऋषिपुत्रियों और माताओं ने भारतीय समाज में महिलाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. नारी शक्ति हमेशा भारतीय पहचान की रक्षा के लिए आगे आई है. उन्हें ज्ञान और समाज की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा गया है और उन्होंने देश की रक्षा के लिए शस्त्र भी उठाए हैं. रोजगार के मौके बनाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.
विश्व हिंदू परिषद के वाराणसी शहर अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने सवालों पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि प्रश्न बनाने वाले ने आखिर कहां पढ़ाई की, जहां यह बताया गया कि पितृसत्ता की स्थापना ब्राह्मणों ने की थी?
बीएचयू ने क्या सफाई दी?इन दो सवालों को लेकर ऐसा विवाद बढ़ा कि विश्वविद्याल को सफाई देनी पड़ी. यूनिवर्सिटी ने कहा,
एमए (इतिहास) चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में महिला इतिहास के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न का विश्वविद्यालय प्रशासन ने संज्ञान लिया है. यह साफ किया जाता है कि सवाल ‘विमेन इन मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री’ के तय कोर्स से ही पूछा गया है.
विश्वविद्यालय ने आगे कहा कि किसी भी विषय में ज्ञान और विश्लेषण क्षमता को बढ़ाने के लिए छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे कोर्स में शामिल विषयों के अलग-अलग पहलुओं और संदर्भों से परिचित हों. कोर्स में शामिल किसी भी कॉन्सेप्ट पर अलग-अलग दृष्टिकोण संभव हैं. इसीलिए छात्रों को पढ़ने की सामग्री भी सुझाई जाती है, ताकि वे विषय पर अलग-अलग विचारों की व्यापक समझ विकसित कर सकें. एग्जाम पेपर में पूछे गए सवाल भी इसी सोच पर आधारित होते हैं. ऐसे में सेमेस्टर परीक्षा के सवालों को एजुकेशन के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए.
क्वेश्चन पेपर की जांच होती है?जब विश्वविद्यालयों के अधिकारियों से पूछा गया कि क्या क्वेश्चन पेपर छपने से पहले सवालों की जांच की कोई प्रक्रिया अपनाई जाती है? जवाब में उन्होंने कहा कि कुछ लेवल पर जांच और क्रॉस-चेकिंग की जाती है. हालांकि, पेपर की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस प्रक्रिया में बहुत अधिक लोगों को शामिल नहीं किया जा सकता.
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