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घर खरीदारों को बड़ी राहत देने के लिए सरकार ने क्या बड़ा फैसला किया?

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार ने इसकी जानकारी दी है.

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घर खरीदारों को मिलेगी राहत? (सांकेतिक तस्वीर)

अगर आपने भी फ्लैट या घर की बुक‍िंग कराई है और लंबा समय बीतने के बाद भी उसका पजेशन नहीं म‍िला या कोई दूसरी दिक्कत हुई है तो आपके लिए राहत की खबर है. सरकार ने घर खरीदने की प्रक्रिया को आसान बनाने और घर खरीदारों को परेशानी से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. उसने एक मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट पर काम करने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है. इस बात की जानकारी उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार ने दी है. उन्होंने कहा कि यह समझौता घर खरीदारों और बिल्डरों के बीच विवादों को कम करने में मदद कर सकता है.

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बिल्डर बायर एग्रीमेंट क्या होता है?

ये एक तरह का कानूनी दस्तावेज या घर खरीदारों और बिल्डरों के बीच एक कांट्रैक्ट है. इस समझौते में खरीदार और बिल्डर के बीच लेनदेन के सभी नियम और शर्तें शामिल होती हैं. जब भी कोई आदमी बिल्डर से फ्लैट या घर की बुकिंग करवाता है या खरीदता है तो दोनों के बीच एग्रीमेंट होता है. इस एग्रीमेंट में घर खरीदने से जुड़ी कुछ शर्तें होती है. मसलन घर का साइज कितना है, सुविधाएं क्या होंगी, घर की कीमत कितनी है और इसे चुकाने की शर्तें क्या हैं. घर की मेंटेनेंस लागत कितनी है, बिजली, कामन एरिया से जुड़ी सुविधाएं जैसे कई बातों के लिए भी शर्तें होती हैं.

कमेटी में कौन होगा?

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस कमेटी में जज, राष्ट्रीय और राज्य उपभोक्ता आयोग के सदस्य, वकील और अलग-अलग उपभोक्ता निकायों के लोगों को शामिल किया जाएगा. साथ ही इस कमेटी में उपभोक्ता मंत्रालय  के सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा. उपभोक्ता मंत्रालय में सचिव रोहित कुमार ने मीडिया को बताया कि इस कमेटी का गठन अगले तीन महीने में पूरा कर दिया जाएगा. यह जानकारी देने से पहले उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के साथ एक बैठक की थी. इसमें रियल एस्टेट सेक्टर में ग्राहकों की शिकायत के समाधान पर मंथन किया गया.

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बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि बिल्डरों और ग्राहकों के बीच बहुत से मामलों पर सुलह कराई जा सकती है, लेकिन इसके लिए एक समझौते के मॉडल को तैयार करना होगा. सचिव ने इस मॉडल एग्रीमेंट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा. इसके लिए दस्तावेज पर सबसे पहले अलग-अलग राज्यों के परमिशन ली जाएगी. इसके बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि बिल्डरों को इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती है कि वह मिडिल क्लास को लूटें. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मॉडल बिल्डर बायर्स और एजेंट-बायर्स एग्रीमेंट की जरूरत है. शीर्ष अदालत ने 4 अक्टूबर 2021 को कहा था कि यह मामला काफी महत्वपूर्ण है. वहीं, रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट यानी रेरा और एनसीएलटी जैसी संस्थाओं के बावजूद आवास क्षेत्र से संबंधित मामलों से निपटने के लिए अलग-अलग उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 

उपभोक्ता मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार ने कहा कि देशभर के विभिन्न उपभोक्ता आयोगों में प्रॉपर्टी से जुड़े लाखों मामले पेडिंग हैं. उन्होंने कहा कि हाउसिंग सेक्टर से जुड़े करीब 5.50 लाख शिकायतों का समाधान नहीं मिला है. इनमें से करीब 45 फीसदी शिकायतें घर का पजेशन मिलने में देरी को लेकर हैं. इसी तरह 12 फीसदी सेल डीड से जुड़ी हैं और 12 फीसदी घर खरीदारों ने शिकायत की है उनका रिफंड नहीं मिला है. इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने घटिया निर्माण को लेकर शिकायतें की हैं.

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