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स्टील कंपनियों में साठगांठ, ग्राहकों से गेम खेलने में सरकारी कंपनी भी शामिल: रिपोर्ट

रॉयटर्स के मुताबिक एक ‘गोपनीय दस्तावेज’ से पता चलता है कि इन सभी कंपनियों ने आपस में मिलकर स्टील बेचने की कीमतें तय कीं. इसके चलते अब इन कंपनियों और उनके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लग सकता है.

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भारत के भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने देश की दिग्गज स्टील कंपनियों का एक बड़ा 'खेल' पकड़ा है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने देश की दिग्गज स्टील कंपनियों का एक बड़ा 'खेल' पकड़ा है. CCI ने टाटा स्टील (Tata Steel), जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और सरकारी स्वामित्व वाली स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) समेत 25 अन्य कंपनियों को एंटी-ट्रस्ट कानूनों के उल्लंघन का दोषी पाया है. अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. 

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एंटी-ट्रस्ट कानून का मकसद ये होता है कि मार्केट में मुकाबला ईमानदारी से हो, न कि कुछ कंपनियां गठजोड़ करके कीमतें तय कर सकें. कई बार कुछ कंपनियां साठगांठ करके अपने फायदे के लिए मिलकर कीमतें तय कर लेती हैं. इससे आम लोगों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ता है.

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रॉयटर्स के मुताबिक एक ‘गोपनीय दस्तावेज’ से पता चलता है कि इन सभी कंपनियों ने आपस में मिलकर स्टील बेचने की कीमतें तय कीं. इसके चलते अब इन कंपनियों और उनके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लग सकता है. इस पूर मामले की जांच साल 2021 में शुरू हुई थी. उस समय बिल्डरों के एक समूह ने कोर्ट में आपराधिक मामला दायर कर आरोप लगाया था कि देश की 9 स्टील कंपनियां जानबूझकर सप्लाई सीमित कर कीमतें बढ़ा रही हैं.

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रिपोर्ट में बताया गया है कि CCI ने 6 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी किया था. इस आदेश में बताया गया था कि साल 2015 से 2023 के बीच अलग-अलग मौकों पर कैसे स्टील की कीमतों का बिक्री मूल्य तय करने के लिए साठगांठ की गई है. इस साठगांठ में जेएसडब्ल्यू के एमडी सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन और सेल (SAIL) के चार पूर्व चेयरपर्सन सहित 56 बड़े अधिकारियों को भी दोषी ठहराया गया है. 

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हालांकि ये आदेश अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है. इसे पहली बार रॉयटर्स ने ही रिपोर्ट किया है. इस पूरे मामले पर इन स्टील कंपनियों या इनके अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई सफाई नहीं आई है.

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