अडानी समूह अपने ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए 80 करोड़ डॉलर यानी रुपये (Adani Group Loan) मोटा मोटी करीब 6 हजार 535 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है. समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी की शार्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के झटके के बाद पहली बार अडानी ग्रुप इतना पैसा जुटाने जा रहा है. इस पैसे का जुगाड़ करने के लिए अडानी समूह दुनियाभर के कई बैकिंग और वित्तीय संस्थानों से साथ बातचीत कर रहा है.
हालत 'सुधरी' तो फिर से कर्ज लेने की तैयारी में अडानी, बस एक पेच फंस गया!
पूरे साढ़े 6 हजार करोड़ का कर्ज लेने की प्लानिंग है. मिलेगा या नहीं?


इन बैंकों में जापान का प्रमुख बैंक सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन यानी SMBC और डेवलपमेंट बैंक ऑफ सिंगापुर यानी DBS बैंक शामिल है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि अडानी समूह इन बैंकों के अलावा जापान के मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप और ब्रिटेन के स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक से फंड जुटाने के लिए संपर्क में है. सूत्रों का कहना है कि अडानी समूह 5700-6535 करोड़ रुपये जुटा सकता है. हालांकि, सूत्रों का ये भी कहना है कि अभी अडानी समूह के इस प्लान को लेकर आखिरी तौर पर कुछ तय नहीं हुआ है. वहीं, फंड जुटाने को लेकर न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने जब अडानी समूह से संपर्क किया तो समूह के एक अधिकारी ने जबाव देने से इनकार कर दिया. इसी तरह सुमितोमो, डीबीएस, मित्सुबिशी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भी न्यूज एजेंसी के सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इनसाइड स्टोरी क्या है?ये तो हो गई खबर. लेकिन अब हम आपको खबर के अंदर की कहानी यानी इनसाइड स्टोरी को समझाने की पूरी कोशिश करते हैं. सबसे पहले जानते हैं कि अडानी समूह का 'ग्रीन प्लान' क्या है और इसके लिए समूह को फंड की जरूरत क्यों है. दरअसल अडानी समूह ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर में साल 2030 तक करीब 5 लाख 72 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है. अडानी ग्रुप का लक्ष्य 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनना है. फिलहाल, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) भारत की सबसे बड़ी सोलर ऊर्जा कंपनी है. कंपनी की बेवसाइट में दावा किया गया है कि वह करीब 20 हजार मेगा वाट बिजली विंड और सोलर एनर्जी से पैदा करती है और देश के करीब 25 राज्यों के साथ कंपनी ने बिजली खरीद समझौते कर रखे हैं.
पिछले साल ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए, अडानी समूह के संस्थापक और चेयरमैन गौतम अडानी ने ग्रीन एनर्जी को लेकर अपना विजन साझा किया था . उन्होंने कहा था कि अडानी समूह रिन्यूएबल एनर्जी को किफायती विकल्प बनाने की दिशा में जोरशोर से काम कर रहा है. उनका इरादा जीवाश्म ईंधन मसलन कोयले वगैरह से बनने वाली बिजली की जगह विंड, सोलर और हाइड्रोजन से बिजली पैदा करने का है. उन्होंने आगे कहा था,
"2030 तक, हम दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनने की उम्मीद करते हैं और इसके लिए हम अगले साल में करीब 70 अरब डालर यानी करीब 5 लाख 72 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहे हैं."
अब समझते हैं कि अडानी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट्स की दिक्कतें क्या हैं. दरअसल जब इसी साल 24 जनवरी को हिंडनबर्ग ने अडानी समूह को लेकर एक रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए थे. इस रिपोर्ट में कहा गया कि अडानी समूह स्टॉक मैनुपुलेशन यानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों को जानबूझकर चढ़ाया गया है. इस अमेरिकी फर्म ने अडानी समूह पर अकाउंटिंग फ्रॉड का भी आरोप लगाया था. साथ ही ये कहा था कि अडानी समूह पर 2 लाख करोड़ से ज्यादा का भारी भरकम कर्ज है. इन आरोपों के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयर तो औंधे मुंह गिर गए. इसके अलावा अडानी समूह को एक बड़ी दिक्कत आनी शुरू हुई. वह थी समूह के प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए पैसों का इंतजाम करने की. क्योंकि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद जब अडानी समूह की कंपनियों के शेयर भरभराकर गिर रहे थे, तो समूह ने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए अपना कर्ज चुकाने को तरजीह दी.
एक रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप ने पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से लेकर मार्च 2023 के बीच करीब 25 हजार करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया है. हाल ही में समूह की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने भी अपने बकाये कर्ज में से करीब 1065 करोड़ रुपये चुकाने की बात कही है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि वित्त वर्ष 2022-23 में अडानी समूह पर बकाये कर्ज में 21 फीसदी का उछाल आया है. अडानी समूह की लिस्टेड कंपनियों पर 31 मार्च 2023 तक अब भी बकाया कर्ज 2 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के आसपास है. वैसे तो अडानी समूह के कुल कर्ज में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी विदेशी बैंकों की है. लेकिन करीब 80 हजार करोड़ रुपये का कर्ज भारतीय बैंकों ने दे रखा है. इसमें देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अडानी समूह को करीब 27000 करोड़ रुपये का लोन दे रखा है. जब हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आई तो उसके बाद सरकारी बैंकों की तरफ से अडानी को दिये कर्ज को लेकर काफी सवाल उठाये गए थे.
जानकारों का कहना है हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद से भारतीय बैंक और विदेशी बैंक अडानी समूह को कर्ज देने को लेकर फूंक फूंक कर कदम उठाते दिख रहे हैं. वहीं, कई विदेशी कंपनियां भी अडानी समूह में निवेश से बचती दिख रही हैं. फरवरी में फ्रांस की टोटल एनर्जीज ने अडानी ग्रुप को बड़ा झटका दिया था. टोटल एनर्जीज ने अडानी ग्रुप के 4 लाख 92 हजार करोड़ रुपये के हाइड्रोजन प्रोजेक्ट में निवेश को होल्ड पर रख दिया था. इसके अलावा इसी महीने में क्रेडिट सुईस के बाद सिटीग्रुप और स्टैंडर्ड चार्टेड ने भी अडानी सिक्योरिटीज पर मार्जिन लोन देना रोक दिया था.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रीन एनर्जी अडानी समूह की सबसे ज्यादा कर्जदार कंपनी है. इस कंपनी पर करीब 47,300 करोड़ रुपये कुल लोन है. आपको बता दें अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. लेकिन अब अडानी समूह के मुखिया गौतम अडानी एक के बाद एक बड़े कदम उठे रहे हैं. इसका असर भी अडानी कंपनियों के शेयरों पर दिख रहा है. इसी के चलते पिछले कुछ दिनों से अडानी के शेयर आल टाइम लो से काफी ऊपर आ चुके हैं और गौतम अडानी भी दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में अब 21वें पायदान पर पहुंच गए हैं.
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