अमेरिका की रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Report) को आए हुए करीब 3 हफ्ते बीत चुके हैं. लेकिन अडानी समूह (Adani Group) पर हिंडनबर्ग का हौव्वा अब भी हावी नजर आ रहा है. अडानी समूह के शेयरों में 13 फरवरी को भी करीब 10 तक की गिरावट आई. इसके साथ ही अबतक अडानी समूह का मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुका है. अब खबर आई है कि अडानी समूह हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद लगातार डैमेज कंट्रोल पर काम कर रहा है. ताजा कदम के तहत अडानी समूह ने अपने रेवेन्यू ग्रोथ टारगेट को घटाने का फैसला लिया है. हिंडनबर्ग के झटके से उबरने के लिए अडानी समूह, अपने रेवेन्यू ग्रोथ के टारगेट को घटाकर करीब आधा कर सकता है.
अडानी ग्रुप के 10 लाख करोड़ उड़ गए, पता है भरपाई के लिए अब क्या प्लान बनाया है?
अडानी ग्रुप के शेयर लगातार गिर रहे हैं.


समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह अगले वित्त वर्ष के लिए रेवेन्यू टारगेट को 40 फीसदी से घटाकर 15 से 20 फीसदी कर सकता है. सूत्रों का कहना है कि अडानी समूह हिंडनबर्ग के भंवर से बाहर निकलने के लिए आक्रामक विस्तार की जगह अब अपनी फाइनेंशियल सेहत को मजबूत बनाने पर पूरा ध्यान देगा. इसके तहत अडानी समूह ने बड़ा प्लान बनाया है. समूह का पूरा ध्यान अब कर्ज चुकाने, कैश बचाने और नए निवेश (कैपिटल एक्सपेंडेचर) में कम पैसा खर्च करने पर रहेगा. इसके अलावा अडानी समूह अपने गिरवी रखे शेयरों को छुड़ाने के लिए भी काम कर रहा है.
गिरवी शेयर छुड़वाएगा ग्रुपब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह की तीन कंपनियों ने बैंकों के पास अपने अतिरिक्त शेयर गिरवी रखे हैं जिन्हें जल्द से जल्द छुड़ाने का प्लान तैयार किया जा रहा है. अडानी समूह की जिन कंपनियों के शेयर गिरवी हैं उन कंपनियों में अडानी पोर्ट्स, अडानी ट्रांसमिशन और अडानी ग्रीन एनर्जी शामिल हैं. ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन महीने के लिए नए निवेश पर रोक लगाने से समूह को करीब 25 हजार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. इस पैसे को अडानी समूह अपनी उधारी चुकाने और नकदी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि, रेवेन्यू टारगेट लक्ष्य में कटौती और कैपिटल एक्सपेंडीचर टालने के बारे में अडानी समूह की तरफ से अब तक कोई जबाव नहीं आया है.
लेकिन अडानी समूह के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर जुगशिंदर सिंह ने पिछले महीने एक इंटरव्यू में बताया था कि अडानी समूह अपने पूंजीगत खर्च पर कुछ समय के लिए रोक लगा सकता है. उन्होंने 29 जनवरी को समाचार पत्र द हिंदू बिजनेसलाइन को बताया था कि अगर FPO पूरा नहीं बिका, तो अडानी समूह नए निवेश को छह से नौ महीने के लिए स्थगित कर देगा. हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद समूह ने FPO रद्द करने का फैसला किया था. साथ ही हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद से समूह लगातार अपने कर्जों घटाने पर भी काम कर रहा है.
इससे पहले 6 फरवरी को समूह ने कहा था कि तीन फर्मों के गिरवी शेयरों को छुड़ाने के लिए करीब 9100 करोड़ रुपये का अपना लोन समय से पहले चुकाएगा. वहीं 8 फरवरी को अडानी समूह की प्रमुख कंपनियों में से एक अडानी पोर्ट्स ने भी अपना 5000 करोड़ रुपये का लोन चुकाने की घोषणा की थी. वहीं, ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कुछ बैंकों द्वारा कर्ज देने से इनकार करने के बाद अडानी समूह ने अगले महीने अपने करीब 4200 करोड़ रुपये के ब्रिज लोन को भी समय से पहले अदा करने की योजना बनाई है. अडानी समूह ने यह पैसा पिछले साल एसीसी सीमेंट कंपनी खरीदने के समय लिया था.
हिंडनबर्ग से कानूनी लड़ाईफाइनेंशियल हेल्थ को फिर से दुरुस्त करने की कोशिशों के अलावा अडानी ग्रुप हिंडनबर्ग से कानूनी लड़ाई लडने की भी तैयारी कर रहा है. समूह ने हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद अमेरिका की दिग्गज लॉ फर्म वॉचटेल को हायर किया है. साथ ही अडानी समूह ने एक सामान्य ऑडिट करने के लिए दुनिया की चार बड़ी ऑडिट फर्मों में से एक को नियुक्त करने की बात कही है. इनमें डेलॉयट, अर्नेस्ट एंड यंग, KPMG और PwC शामिल हैं.
हालांकि, इसके बाद भी अडानी समूह के शेयरों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. रेवेन्यू टारगेट में कटौती और अडानी ग्रुप की चार कंपनियों की रेटिंग में कमी से आज 13 फरवरी को भी अडानी समूह के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव रहा और शुरुआती कारोबार में अडानी समूह के शेयरों में 10 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली. हालांकि, कारोबार बंद होते होते कुछ रिकवरी दिखी.
ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर में सबसे ज्यादा 7.63% की गिरावट आई. इसके अलावा अडाणी ट्रांसमिशन, अडानी पोर्ट्स, अडानी विल्मर, अडानी पावर, अडानी टोटल गैस, अडानी ग्रीन एनर्जी, अंबुजा सीमेंट और NDTV के शेयरों में करीब 5-5 फीसदी के आसपास गिरावट देखने को मिली. वहीं ACC के शेयर में 3% से ज्यादा की गिरावट आई. दरअसल, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने 10 फरवरी को अडानी समूह की चार कंपनियों का आउटलुक बदलकर स्टेबल से निगेटिव कर दिया था. इन कंपनियों में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अडानी ग्रीन एनर्जी (यूपी) लिमिटेड, परमपूज्य सोलर एनर्जी, प्रयत्न डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
आपको बता दें कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर धड़ाधड़ गिरने लगे हैं. हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट में अडानी समूह पर स्टॉक मैनुपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं. खबर है कि मार्केट रेगुलेटर सेबी अडानी समूह के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) के वापस लेने से जुड़े मामले की जांच कर रहा है और इसकी पूरी रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने जल्द पेश करेगा.
वीडियो: खर्चा पानी: अडानी ने समय से पहले गिरवी शेयर क्यों छुड़ा लिये?






















