एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दे दिया है. मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने मंगलवार 7 अप्रैल न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी. पिछले साल बोइंग विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद यह एयरलाइन लगातार घाटे और बढ़ते नियामकीय दबाव से जूझ रही है. कैंपबेल ने साल 2022 में एयर इंडिया के सीईओ के रूप में ज्वाइन किया था. एयर इंडिया के साथ उनका कांट्रैक्ट 5 साल का था. उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होना था.
टाटा ने एयर इंडिया खरीदकर आफत पाल ली? घाटे पर घाटा हो रहा, अब CEO ने भी छोड़ दिया
पिछले साल एयर इंडिया विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद यह एयरलाइन लगातार घाटे और बढ़ते नियामकीय दबाव से जूझ रही है. कैंपबेल विल्सन ने साल 2022 में एयर इंडिया के सीईओ के रूप में ज्वाइन किया था. एयर इंडिया के साथ उनका कांट्रैक्ट 5 साल का था. उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होना था.


इसी के साथ टाटा के मालिकाना हक वाली एयरलाइन के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रीबा जाचरिया की आंतरिक अनुमानों पर आधारित एक रिपोर्ट बताती है कि टाटा संस समूह के भीतर सभी नए बिजनेस को वित्त वर्ष 2026 में लगभग 29,000 करोड़ रुपये का संयुक्त घाटा होने का अनुमान है. ये पहले के 5,700 करोड़ रुपये के अनुमान से कहीं अधिक है. घाटे में चल रहे कई उपक्रमों में से एयर इंडिया कंपनी की सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है. आलम ये है कि कहा जाने लगा है कि क्या टाटा ने एयर इंडिया को खरीद कर घाटे का सौदा किया था.
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वित्त वर्ष 2026 में एयर इंडिया के घाटे का अनुमान 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का है, जो पहले के 2,000 करोड़ रुपये के अनुमान से दस गुना अधिक है. पहले नौ महीनों में ही 15,000 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा दर्ज किया जा चुका है. वित्त वर्ष 2025 में यह घाटा 11,000 करोड़ रुपये था.
एयर इंडिया के नुकसान के कारणटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में एयर इंडिया के घाटे के पीछे कई बाहरी दबावों का जिक्र किया गया है. इनमें पाकिस्तान की तरफ से अपने हवाई क्षेत्र को बंद करना, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर से ऊपर जाना और अहमदाबाद विमान दुर्घटना शामिल हैं. रिपोर्ट में स्थिति को एयरलाइन के लिए "परफेक्ट स्टॉर्म" बताया गया है. 191 बोइंग और एयरबस विमानों के बेड़े वाली भारतीय एयरलाइन साल 2022 में टाटा द्वारा अधिग्रहण किए जाने के बाद से घाटे में चल रही है. पिछले साल पाकिस्तान की तरफ से भारतीय विमानों के अपने हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने पर प्रतिबंध लगाने के बाद से वित्तीय दबाव और बढ़ गया है.
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