इलेक्ट्रिक कारों का आजकल खूब बज बना हुआ है. कई लोग तो अपनी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को छोड़कर इनका रुख कर रहे हैं. हालांकि इनकी रेंज और रीसेल को लेकर अभी काफी उलझन वाला मामला है मगर धीरे-धीरे इनकी सेल को रफ्तार मिल रही है. रेंज और रीसेल के साथ अब इनके टायर की उम्र को लेकर भी काफी कुछ कहा जा रहा है. कहा जाता है कि पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले जल्दी घिसते हैं. ऐसा कई रिपोर्ट में दावा किया गया है. अब ऐसा है या नहीं. जानते हैं.
ईवी के टायर आम गाड़ी से जल्दी घिसते हैं, लेकिन क्यों?
EV tires wear out faster: इलेक्ट्रिक कारों के पहिए आम गाड़ी से ज्यादा जल्दी घिसते हैं. ऐसा कई रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया है और कई ग्राहकों ने इसे खुद भी नोटिस किया है. लेकिन इसकी वजह क्या है? जानते हैं.


यूं तो जब गाड़ी को भगाया जाता है. ब्रेक लगाया जाता है. शार्प टर्न लिया जाता है, तो हर टायर घिसता है. हर रोटेशन पर टायर छोटे-छोटे पार्टिकल्स को छोड़ता रहता है. लेकिन ईवी में ये प्रोसेस थोड़ा ज्यादा होती है. Michelin की रिपोर्ट के हिसाब से इलेक्ट्रिक गाड़ियों में टायर इंटरनल कंबशन इंजन के मुकाबले 20% ज्यादा जल्दी घिसते हैं. माने अगर नॉर्मल गाड़ी का टायर 10 हजार किलोमीटर चलेगा तो ईवी का 8 हजार. ऐसा क्यों है, वो भी जान लीजिए.
वजनइलेक्ट्रिक कारों में लगे बड़े बैटरी पैक से वजन काफी बढ़ जाता है. असर? टायर पर ज्यादा भार पड़ना. एक्स्ट्रा वजन से टायर ज्यादा दबते और मुड़ते हैं, जिससे रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ सकती है. इसके बढ़ने का मतलब है कि टायरों को घुमाने में अधिक एनर्जी खर्च होगी. इस समस्या से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक कारों में टायर लो रोलिंग रेजिस्टेंस और एनर्जी-एफिशिएंट लगाए जाते हैं. ताकि ऊर्जा की खपत को कम रखा जा सके.
किसी भी गाड़ी को खींचने के लिए, उसे आगे धकेलने के लिए जरूरी है टॉर्क. ईवी में टॉर्क और स्पीड दोनों जल्दी मिलती है. यही वजह है कि कई इलेक्ट्रिक कारें लगभग तीन सेकंड में 0 से 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है. दरअसल, इलेक्ट्रिक कारों के लिए बनाए गए टायरों में बेहतर पकड़ और हैंडलिंग के लिए खास रबर कंपाउंड और ट्रेड पैटर्न का यूज किया जाता है. एनर्जी बढ़ाने के लिए कम रोलिंग रेजिस्टेंस रखने की भी कोशिश की जाती है. लेकिन ज्यादा वजन, इंस्टेंट टॉर्क और बेहतर ग्रिप की जरूरत इन टायरों के जल्दी घिसने का कारण बन जाती है.
ड्राइविंग स्टाइलआप गाड़ी कैसे चला रहे हैं. सबसे ज्यादा इस बात पर ही निर्भर करता है कि टायर कितना चलेगा. अगर तेज स्पीड में कार चला रहे हैं. ब्रेक धीरे-धीरे लगाने के बजाय अक्सर हाई स्पीड पर तुरंत ब्रेक लगाते हैं. कलाबाजी दिखाने की कोशिश करते हैं, तो टायर जल्दी घिसेंगे.

टायरों का सही तरीके से ध्यान रखना भी जरूरी है. समय-समय पर टायर प्रेशर, घिसावट, टायर रोटेशन और व्हील अलाइमेंट की जांच करनी चाहिए. जितना केयर की जाएगी, टायर उतना ही ज्यादा समय तक चलेंगे.
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फिर सॉल्यूशन क्या है?मेंटेनेंस ही पहला सॉल्यूशन है. यानी की टायरों का रखरखाव. अगर एयर प्रेशर, व्हील अलाइमेंट जैसी चीजों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह ज्यादा जल्दी खराब हो सकते हैं. दूसरा यह कि जब ईवी टायर खराब हो जाए, उन्हें बदलने का समय आए, तो आम गाड़ी वाले टायर्स अपनी ईवी में ना लगाए. क्योंकि ईवी टायर्स को डिजाइन बेहतर हैंडलिंग, ज्यादा वजन संभालने और हाई टॉर्क पाने के लिए किया जाता है.
अगर यूं ही गैसोलीन गाड़ी के टायर ईवी में लगा लिए, तो ये ना सिर्फ परफॉर्मेंस पर असर डालेगा, बल्कि लो रोलिंग रेजिस्टेंस यानी एनर्जी एफिशिएंसी से समझौता करना. इसका असर हैंडलिंग पर भी पड़ता है और टॉर्क का भी पूरा फायदा नहीं मिल पाता.
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