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टोल टैक्स भरने का मन नहीं करता? सूरत का ये 'हवाई' टोल देखकर रो देंगे!

India barrier free toll plaza: गुजरात में देश का पहला मल्टी-लेन बैरियर-फ्री टोल प्लाजा तैयार किया है. इस नए टोल सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. जिसके बाद बिना गाड़ी को रोके टोल कट जाया करेगा.

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टोल टैक्स कटवाने के लिए लाइन में नहीं लगना होगा (फोटो-इंडिया टुडे)

टोल पर लगने वाला जाम सच में एक आफत ही है. लाइन में लगो, अपनी बारी का इंतजार करो. फिर टैक्स कटवाओ. ये वाकई में कभी-कभी थकाऊ लगता है. मगर अब ऐसा लग रहा है कि इस सिस्टम से जल्द राहत मिलने वाली है. ना-ना फास्टैग से पैसा कटता रहेगा. बस आपको लाइन में लगने की नौबत नहीं आएगी. 

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दरअसल, गुजरात में देश का पहला मल्टी-लेन बैरियर-फ्री टोल प्लाजा तैयार किया गया है. यानी टैक्स कटवाने के लिए टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्योंकि सिस्टम तो हवा में है. वहीं टोल कट जाएगा. जो ईमानदारी से टोल भरते हैं उनका भी, और जो गुंडागर्दी और रौब दिखाकर टैक्स देने से बचते हैं उनका भी टोल कटेगा. लड़ाई का नो चांस. क्योंकि सिस्टम तो हवा में है.

यह सिस्टम NH48 के सूरत-भरूच के बीच पड़ने वाले चोर्यासी टोल प्लाजा पर बनाया गया है. 2 फरवरी से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इसकी टेस्टिंग कर रहा है. सोशल मीडिया पर बाधा रहित टोल सिस्टम का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है.

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वीडियो में देखा जा सकता है कि कोई भी टोल कलेक्शन बूथ सड़क के बीच नहीं है. वहां बस एक मेटल स्ट्रेच लगा हुआ है. मतलब की खंभा. जिस पर कैमरा, सेंसर और RFID रीडर्स लगे हैं. जब कोई गाड़ी इन टोल स्ट्रेच के पास से गुजरेगी, तो उन्हें अपनी स्पीड कम करने की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि ये सेंसर और रीडर्स उस गाड़ी की नंबर प्लेट (Vehicle Registration Number) को पढ़कर फास्टैग से टैक्स काट लेंगे. इस सिस्टम में हाई-स्पीड फास्टैग RFID रीडर, ANPR कैमरा और लेन स्टेटस इंडिकेटर भी शामिल हैं

ANPR कैमरा यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन. यह स्पीड कैप्चर करने वाले कैमरे में इस्तेमाल होने वाली तकनीक है. इमेज प्रोसेसिंग पर बेस्ड यह टेक्नोलॉजी गाड़ी के नंबर प्लेट्स को पढ़ने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) का यूज करती है.

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बैरियर-फ्री टोल प्लाजा का जिक्र राज्यसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया था. उन्होंने कहा था कि AI बेस्ड राजमार्ग प्रबंधन देश भर में 2026 के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा. जिसके बाद लंबी लाइन में नहीं लगना होगा. उन्होंने कहा था,

“बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम एक अच्छी सुविधा है. पहले हमें टोल पर भुगतान करना पड़ता था और इसमें तीन से 10 मिनट लगते थे. फिर फास्टैग की वजह से समय घटकर 60 सेकंड या उससे कम हो गया. आय में भी कम से कम 5,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. (MLFF) आने के बाद, फास्टैग की जगह लेते हुए, अब कारें अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से टोल पार कर सकती हैं और टोल पर किसी को रोका नहीं जाएगा.”

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ये सिस्टम सूरत में अभी सिर्फ ट्रायल के लिए लगा है. अगर ये सफल हुआ, तो इसे देशभर के अलग-अलग टोल प्लाजा पर फिट किया. इसके बाद आप जैसे ही हाइवे को टच करेंगे, वहां लगे कैमरे नंबर प्लेट को रीड कर लेंगे. फिर जितना सफर आप करेंगे, उतना टोल आपके फास्टैग से काट लिया जाएगा.

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