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यूपी के इन तीन सबसे खास विधायकों के बारे में जानते हैं क्या?

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हिंदुस्तान में कोई भी चुनाव हो, रिज़ल्ट में ‘अन्य’ का एक कॉलम हर जगह दिखता है. जैसे ही बहुमत की बातें शुरू होती हैं तो ये अन्य चर्चा से दूर हो जाते हैं. बड़ी-बड़ी सियासी बातों के बीच अलग वजहों से चुनकर आने वाले ये लोग भी जनता से चुनकर आने वाले जन प्रतिनिधि हैं. आइये आज बात करते हैं उत्तर प्रदेश विधान सभा में 2012 में चुनकर आए इन ‘अन्य’ तीन विधायकों की, जो अपनी-अपनी पार्टी से जीतने वाले अकेले विधायक हैं.


शाज़िल इसलाम अंसारी

शाज़िल इस्लाम

बरेली के भोजीपुरा से विधायक बने अंसारी 2012 में ‘इत्तिहाद ए मिलाद काउंसिल पॉलिटिकल पार्टी’ के टिकट पर जीते थे. इससे पहले 2007 में बसपा से भी जीत चुके हैं. मुस्लिम बाहुल्य इलाका है. 40 साल के शाज़िल जीतने के बाद सपा में शामिल हुए. 2017 के लिए शिवपाल यादव की लिस्ट में इनका नाम था और अब ये अखिलेश यादव की लिस्ट में भी शामिल हैं.

शाज़िल इस्लाम की बात के साथ-साथ इनकी पार्टी की बात करन भी बड़ा ज़रूरी है. इस्लाम भाई की पार्टी सिर्फ अपने लंबे नाम के चलते खास नहीं है. इनकी पार्टी के काम करने के तरीके की बात करना ज़रूरी है. इस पार्टी की स्थापना तौकीर रज़ा खान ने की है. तौकीर रज़ा खान को उनके बयानों से समझा जा सकता है.

तौकीर रज़ा खान बरेलवी मूवमेंट के संस्थापक इमाम अहमद रज़ा खान के बेटे हैं.

2007 में रज़ा साहब ने तस्लीमा नसरीन का सर काट कर लाने वाले को 5 लाख का इनाम देने की घोषणा की थी.  साथ ही कहा था कि अगर तस्लीमा अपनी सारी किताबें खुद जला दें औरहेिंदुास्तान से बाहर निकल जाएं तो ये फतवा खारिज हो जाएगा.

नवंबर 2013  में अरविंद केजरीवाल इनसे मिले थे तो मीडिया ने अरविंद की काफी आलोचना की थी. केजरीवाल ने इसपर कहा था कि वो रज़ा साहब से इसलिए मिले क्योंकी रज़ा शहर के इज़्ज़तदार आदमी थे.

रज़ा को यूपी हैंडलूम कॉर्पोरेशन का वाइस चेयरमैन बनाया गया. 2013 में रज़ा ने अखिलेश यादव पर मुज़फ्फरनगर दंगों में असफल रहने का आरोप लगाया और पद छोड़ दिया. उनकी पार्टी के इकलौते विधायक ने रज़ा साहब के साथ जाने की जगह अखिलेश के साथ जाना सही समझा.

 

फतेह बहादुर

सपरिवार भाजपाई हुए फतेह बहादुर
सपरिवार भाजपाई हुए फतेह बहादुर

एनसीपी का नाम सुनकर सीधे शरद पवार और महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स याद आती है. मगर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी एक विधायक एनसीपी का भी है. गोरखपुर की कैंपियरगंज सीट से विधायक फतेह बहादुर एनसीपी के टिकट से जीते हैं. फतेह बहादुर यूपी के पूर्व मुख्यमंतत्री वीर बहादुर सिंह के बेटे हैं.  वैसे 2015 में फतेह बहादुर खानदान के साथ भाजपाई हो गए. 2017 में फतेह बहादुर भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं.

वैसे आपको बताते चलें कि फतेह बहादुर सिंह के पिता वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल के बड़े कांग्रेसी नेता थे और. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंंत्री रहे वीर बहादुर के समय में ही 1987 का कुख्यात हाशिमपुरा नरसंहार हुआ था. (लेख के नीचे लिंक में पढ़ें)

श्याम सुंदर शर्मा

श्याम सुंदर शर्मा
श्याम सुंदर शर्मा

मां, माटी, मानुस वाली मौमोता दीदी  की चर्चा यूपी में तो खूब होती है. मगर उत्तर प्रदेश से जुड़े लोगों में कम ही जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा में एक विधायक तृणमूल कांग्रेस का है. श्याम सुंदर शर्मा मथुरा की मांट सीट से उपचुनावों में जीते तृणमूल के विधायक हैं. 1989 से लगातार सातवीं बार विधायक बने शर्मा जी इससे पहले कांग्रेस उससे पहले तिवारी जी की कांग्रेस उससे पहले लोकतांत्रिक कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं. 2009 में बसपा के टिकट पर सांसदी भी लड़ चुके हैं. इन्होंने लोक दल के योगेश चौधरी को हराकर 6604 वोटों से हराकर ये उप चुनाव जीता था. इस चुनाव में सपा प्रत्याशी संजय लाठर (अखिलेश पर ‘समाजवाद का सारथी’ किताब लिखनेवाले) तीसरे नंबर पर रहे थे. हालांकि ये क्रम 2012 में टूट जाता क्योंकि शर्मा विधानसभा चुनाव में रालोद के जयंत चौधरी से हार गए थे. मगर उपचुनाव में दुबारा जीत कर 16वीं विधानसभा में वापस पहुंच गए.

शर्मा जी के बारे में दो खास बातें और हैं. इनके ऊपर 2016 में पैसों को लेकर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ (शारदा चिट फंड घोटाले से मत जोड़िएगा). इसके अलावा शर्मा जी अब पूर्णरूपेण बसपाई हो चुके हैं.

आगे भी हम आपको चुनावों से जुड़ी चौचक खबरें बताते रहेंगे, हमारे साथ बने रहिएगा.


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