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पद्मभूषण देवी शेट्टी: लेफ्ट में अड्डा जमाए दिल के लिए राइट डॉक्टर

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वो कहावत सुनी है? डॉक्टर भगवान का स्वरूप होते हैं. पक्का है सुनी होगी. लेकिन फिर भी उस भगवान से मनाया करते हैं कि इस भगवान के पास जाने की नौबत न आए. उसकी वजह भी है. क्योंकि बदलते दौर में कहावत बदल गई है. फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा न करें. क्योंकि डॉक्टर ठगवान का स्वरूप होने लगे हैं.

लेकिन इस दुनिया में जो डॉक्टर वाकई भगवान का रोल अदा रहे हैं. उनमें से एक हैं डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी. प्यार से इनको देवी शेट्टी कहा जाता है. जिनका इलाज किया वो इनको पूजते हैं. इस प्यार और सम्मान की मुकम्मल वजहें भी हैं उनके पास. देवी शेट्टी दिल के डॉक्टर हैं. दिल, जिस पर सिर्फ गाने ही नहीं बनते. इंसान जिंदा उसी के दम पर रहता है. वो दिल जब आशिकी में टूटे तो लोग सच्चा प्यार खोजते हैं. और अपना असली काम, यानी खून पंप करना बंद कर दे तो? तो डॉक्टर शेट्टी ढूंढे जाते हैं.

कर्नाटक के एक छोटे से गांव किन्नीगोली में पैदा हुए देवी शेट्टी. तारीख थी 8 मई, साल 1953. कुल 9 भाई बहन थे. इनका नंबर आठवां था. पढ़ने लिखने में तेज थे. हाईस्कूल में पढ़ रहे थे उस वक्त. जब उनके सामने नाम आया डॉक्टर क्रिस्चियन बर्नॉर्ड का. साउथ अफ्रीका के इस डॉक्टर ने दुनिया का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करने में कामयाबी पाई थी. देवी के दिमाग में खयाल आया दिल का. दिल का डॉक्टर बनने का. सपना पूरा करने के लिए कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मंगलुरू से मेडिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. फिर कार्डिएक सर्जरी की ट्रेनिंग के लिए चले गए गाइज़ हॉस्पिटल यूके.

सन 1989 में घरवापसी हुई. कोलकाता पहुंचे. वहां बीएम बिड़ला हॉस्पिटल ज्वाइन किया. 1992 में देश का पहली सफल हार्ट सर्जरी हुई. 9 साल की उस लड़की का नाम था रोनी. और उस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले थे डॉक्टर शेट्टी. कोलकाता में ही इनको मौका मिला सबकी सेवा करने वाली मदर टेरेसा की सेवा का. उनको हार्ट अटैक आया था. तो उनको पर्सनल फिजीशियन के तौर पर सर्विस दी डॉक्टर देवी शेट्टी ने.

हृदयालय की शुरुआत

कोलकाता में कुछ दिन रहने के बाद वापस पहुंचे बंगलुरू, जो तब बैंगलोर था. वहां मणिपाल हॉस्पिटल के अंदर मणिपाल हार्ट फाउंडेशन चालू किया. जिसमें पैसे की मदद की इनके ससुर ने.

Narayana-Hrudayalaya

इनके करियर की असल उड़ान शुरू हुई 2000 में. जब 25 एकड़ जमीन पर सवा दो सौ बेड वाला ‘नारायण हृदयालय’ के नाम से अपना मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल शुरू किया. और इसके लिए वो मोरल तय किया जो हेल्थ के पेशे का सबसे जरूरी टूल है. लेकिन जिसका पालन करने वाले बहुत कम हैं. वो मोरल था “पैसे की कमी से किसी मरीज को लौटने नहीं दिया जाएगा.”

अब हाल ये है कि देश के 19 शहरों में इनके 31 हॉस्पिटल हैं. अपोलो और फोर्टिस हेल्थकेयर हॉस्पिटल्स की सीरीज के बाद तीसरा नंबर नारायण हृदयालय का है. पूरे देश में सबसे ज्यादा बेड और सुविधा संपन्न हॉस्पिटल्स की सीरीज में. पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं डॉक्टर श्रीनाथ रेड्डी. वो बताते हैं कि “देवी शेट्टी ऐसा मॉडल बना रहे हैं जिसमें सर्विस की क्वालिटी अच्छी और खर्च कम हो. सर्जिकल बीमा कवर की सुविधा भी देते हैं.”

मिडिल क्लास फैमिली से आने वाला मरीज हॉस्पिटल पहुंचता है तो क्या चाहता है? सुविधाएं हों और सस्ती हों. पैसे की तंगी में अक्सर तब तक जाने से बचता है जब तक जान पर न बन आए. फिर लास्ट स्टेज पर भागा दौड़ी होती है. हर्जा खर्चा होता है. तब मरीज बचेगा कि नहीं, इसका भी कुछ कह नहीं सकते. तो उसकी फैमिली को अथाह पैसा खर्च होने के डर से कैसे बचाया जाए. इसका हिसाब डॉक्टर देवी शेट्टी ने खूब लगाया है.

ये हॉस्पिटल लूट की दुकान नहीं है. किफायती है. इसकी वजह बढ़ता कारोबार और मुनाफा है. शुरुआत में हार्ट का एक ऑपरेशन डेढ़ लाख में होता था. अब एक लाख में ही मामला निपट जाता है. इंडिया में साल में तकरीबन एक लाख 30 हजार हार्ट सर्जरी होती हैं. उनमें से 12 परसेंट नारायण हृदयालय करता है.

टेक्नोलॉजी के दीवाने हैं देवी शेट्टी. गले में आला डाल के चलने वाले डॉक्टर तो सब होते हैं. लेकिन व्हाट्सऐप, ईमेल के जरिए, फोन कैमरे के जरिए ICU में भर्ती मरीज से 24 घंटे टच में रहने का काम यही डाक्साब करते हैं.

अभी कर्नाटक में एक हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम चल रही है. नाम है यशस्विनी. दुनिया की सबसे सस्ती इंश्योरेंस स्कीम है. सिर्फ 10 रुपए पर मंथ की मिनिमम किश्त है इसमें.

मेडिकल स्किल से इंसानियत का इतना भला करने वाले, बिना अमीर गरीब देखे इलाज करने वाले देवी शेट्टी को सरकार की तरफ से पद्मश्री अवॉर्ड मिला. सन 2004 में. और सन 2012 में देश के तीसरे सबसे सम्मानित अवॉर्ड पद्मभूषण से नवाजा गया.

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