Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

इस प्रेसिडेंट के चुनाव पर लगा है सबसे बड़ा दांव, दुनिया आज नजर नहीं हटा रही

2.08 K
शेयर्स

इस्लामिक देशों में भारत का सबसे बड़ा दोस्त कौन है? जवाब है ईरान.

आज ईरान में प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के लिए वोटिंग हो रही है. भारत सहित पूरी दुनिया इस पर निगाह बनाए हुए है. क्योंकि ये बहुत ही अहम चुनाव है. मिडिल ईस्ट तमाम तरह के जंजालों में फंसा हुआ है. ईरान बाकी इस्लामिक देशों की तुलना में स्टेबल है. पर इस बार के चुनाव में वहां पर मॉडरेट और कट्टर नेताओं के बीच जंग छिड़ी है. कुल 5 कैंडिडेट हैं. अगर आज के चुनाव में किसी भी कैंडिडेट को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट नहीं मिले तो 26 मई को फिर चुनाव होगा, जिसमें टॉप के 2 कैंडिडेट ही लड़ेंगे.

आइए पढ़ते हैं इन चुनावों की सबसे खास बातें:

एक तरफ हैं अमेरिका के प्यारे नेता, दूसरी तरफ हैं डेथ कमीशन के प्यारे नेता

रूहानी
रूहानी

1. वर्तमान प्रेसिडेंट हसन रूहानी और इब्राहिम रैसी दो प्रमुख उम्मीदवार हैं. रूहानी मॉडरेट हैं और रैसी हार्डलाइनर यानी कट्टरपंथी. रैसी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमैनी के करीबी माने जाते हैं. खमैनी बीमार चल रहे हैं. ईरान में खमैनी की बातें सबसे ऊपर होती हैं. रैसी प्रेसिडेंट के अलावा ये पद भी लेना चाहते हैं. रैसी डेथ कमीशन का हिस्सा हुआ करते थे, जिसने 1988 में हजारों राजनीतिक कैदियों को मौत की सजा दी थी.

2. रूहानी का मतलब होता है स्पिरिचुअल व्यक्ति. पहले उनका टाइटल फेरेदन हुआ करता था. ये मुस्करा के बोलते हैं. तेज दिमाग है. अच्छा बोलते हैं. कानून में पीएचडी किये हुए हैं. 2013 में रिफॉर्म और विकास को लेकर चुनाव जीते थे. वहीं रैसी इस्लामिक कानून में पीएचडी किये हुए हैं.

3. ईरान दुनिया में अलग-थलग हो गया था. रूहानी 4 साल मेहनत कर ओबामा की मदद से ईरान को मुख्यधारा में लाए. 2015 में एक न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर दोनों देशों में एक डील हुई. ईरान राजी हो गया कि अमेरिका अगर व्यापारिक प्रतिबंध हटा दे तो ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम रोक देगा. नॉर्थ कोरिया अमेरिका की यही बात नहीं मानता है. ईरान की इस बात से अमेरिका काफी खुश हुआ था. IMF के मुताबिक 2016-17 में ईरान की जीडीपी बढ़ रही थी.

raisi
इब्राहिम रैसी

4. नये अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने इस डील को खत्म करने की धमकी दी है. साथ ही वो ईरान के दुश्मन देश सऊदी अरब भी जा रहे हैं. ईरान शिया बहुल देश है और सऊदी अरब सुन्नी बहुल देश है.

5. रूहानी का किया हुआ काम बिगड़ गया है. रैसी कह रहे हैं कि किसी देश की धमकी से नहीं डरेंगे. आज की दुनिया में कट्टरपंथी नेता ज्यादा तालियां बटोर रहे हैं. रैसी इसी चीज को भुनाना चाहते हैं.

6. ईरान पहले प्रोग्रेसिव देश था. 1979 में यहां पर इस्लामिक क्रांति हुई थी. इसके बाद यहां पर कट्टरपंथ हावी हो गया. 1979 के पहले की औरतें हाफ पैंट पहन के घूमती थीं, उनकी बेटियों को बुर्का पहन के जिंदगी गुजारनी पड़ी.

रूहानी के खिलाफ जो कैंपेन चल रहा है, वो दुनिया में आजकल हर जगह हो रहा है

1. ईरान एक डेमोक्रेसी है. पर सुप्रीम लीडर सबसे ऊपर होता है. ये जिंदगी भर के लिए चुना जाता है. इनका एक अपना पैनल होता है, जिनमें से कोई भी जनता द्वारा चुन के नहीं आता है. यही लोग तय करते हैं कि कौन प्रेसिडेंट के लिए लड़ेगा, कौन नहीं. कहने की जरूरत नहीं है कि ये लोग धार्मिक मामलों से ज्यादा जुड़े रहते हैं. जो ज्यादा उदारवादी और मॉडर्न लोग होते हैं, ये लोग उनको चुनाव लड़ने ही नहीं देते. प्रेसिडेंट को हर पॉलिसी इनसे अप्रूव करानी होती है. रूहानी की न्यूक्लियर मामलों की डील इसलिए खास है, क्योंकि इन लोगों की सहमति ले ली थी उन्होंने.

Iranian_Supreme_Leader_Ayatollah_Ali_Khamenei
खोमैनी

2. रूहानी न्यूक्लियर डील को लेकर काबिल माने जा सकते हैं. ईरान की इकॉनमी भी इस फैसले के बाद स्टेबल हुई है. पर बेरोजगारी की समस्या खत्म नहीं हुई है.

3. रैसी खुद को गरीबों का मसीहा बता रहे हैं. उन्होंने वर्क एंड डिग्निटी के नाम से कैंपेन भी चलाया है.

4. दुनिया में इस्लामोफोबिया को लेकर काफी हंगामा है. ऐसे में रैसी इस चीज को भुना रहे हैं. पर रैसी के लिए ये बहुत रिस्की है. अगर वो प्रेसिडेंशियल इलेक्शन हार जाते हैं, तो सुप्रीम लीडर बनना मुश्किल हो जाएगा. क्योंकि चुनाव हारे हुए इंसान को इस पद पर स्वीकार्यता मिलने के कम चांसेज हैं.

5. रूहानी अगर जीतते हैं तो ये उनका लगातार दूसरी बार प्रेसिडेंट टर्म होगा. 2009 में महमूद अहमदीनेजाद दोबारा जीते थे. पर ईरान में इसके खिलाफ बहुत प्रोटेस्ट हुए थे. क्योंकि इसमें कई गड़बड़ियों के आरोप थे. कई लोगों ने आरोप लगाया था कि उनके वोट इधर-उधर कर दिये गये थे. पर खोमैनी ने कहा कि रिजल्ट सही है और पुलिस को ऑर्डर दे दिया कि सबको ठीक करो. हजारों लोग पकड़े गये और दर्जनों लोग मारे गए. हालांकि 1981 के बाद ईरान में हर प्रेसिडेंट दुबारा जीता ही है.

6. जनवरी 2017 में ईरान के पूर्व प्रेसिडेंट अली अकबर हाशमी राफसंजानी की मौत हो गई थी. राफसंजानी और एक और पूर्व प्रेसिडेंट मोहम्मद खातमी ने इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ मॉडरेट नेताओं का लाइन-अप तैयार किया था. इन्हीं लोगों की मदद से रूहानी 2013 में प्रेसिडेंशियल चुनाव जीते भी थे. ईरान में ये आश्चर्यजनक जीत थी. हालांकि उस वक्त ये भी कहा जा रहा था कि पूर्व में खुद कट्टरपंथी रहे राफसंजानी रूहानी का इस्तेमाल कर रहे थे खोमैनी से लड़ने के लिए.

राफसंजानी
राफसंजानी

7. खोमैनी खुद दो बार प्रेसिडेंट रह चुके हैं. पर 78 के हो चुके हैं. बीमार हैं. इनकी मौत और रैसी की हार से कट्टरपंथ कमजोर हो सकता है. इसलिए काफी कुछ दांव पर लगा है.

इसी चुनाव में एक औरत चौथी बार रिजेक्ट हुई है, दूसरी को काबिल उम्मीदवार समझा जाता है

1. इस बार भी एक चीज हुई है, जो ईरान के प्रेसिडेंशियल चुनाव में हर बार होती है. यहां पर कोई औरत प्रेसिडेंट का चुनाव नहीं लड़ सकती. इस बार भी एक 73 साल की औरत आजम तलेघनी की तस्वीर चारों ओर छपी थी, जो वॉकर लेकर नामांकन कराने गई थीं. पर उनका एप्लिकेशन रिजेक्ट हो गया. ये चौथी बार रिजेक्ट हुआ था. कुल 137 औरतों ने नामांकन कराने की कोशिश की थी. सबका रिजेक्ट हो गया. सुप्रीम लीडर के नेतृत्व वाली गार्जियन काउंसिल ने घोषणा की थी कि इस बार औरतों को चुनाव लड़ने दिया जाएगा. पर ऐसा हुआ नहीं. 1997 से ईरान में औरतें लगातार कोशिश की रही हैं चुनाव लड़ने के लिए. हालांकि ईरान के संविधान में मनाही नहीं है.

आजम तलेघनी

2. आजम तलेघनी पैयाम हजार वीकली मैगजीन चलाती हैं. ईरान की संसद में 1980 में पहुंची थीं. पहली ईरानी औरत बनीं जिन्होंने प्रेसिडेंट इलेक्शन के लिए अपना नामांकन कराने की कोशिश की थी. 2013 में गार्जियन काउंसिल ने औरतों को चुनाव लड़ने से बैन करते हुए कहा था कि औरतों को उतनी बुद्धि नहीं होती.

3. इसी ईरान में प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट मीर हुसैन मौसावी की पत्नी जाहरा रानावर्द को अपने तेज दिमाग के लिए जाना जाता है. अपने पति के लिए प्रचार करते हुए उनकी बहुत धाक जमी है. औरतों के अधिकारों को लेकर वो काफी मुखर रहती हैं. उन्होंने कई बार गर्व से कहा है कि मैं जाहरा रानावर्द हूं. जाहरा को एक काबिल प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट भी समझा जाता है. पर इस बार ये संभव नहीं है.

जाहरा

ईरान भारत को तेल बाकी दुनिया की तुलना में थोड़े सस्ते दामों पर बेचता रहा है. हालांकि इसके पीछे अमेरिका की कारस्तानी रही है. अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाया था तो ईरान को भी बेचने की जरूरत थी. पर जब अमेरिका ने इंडिया पर भी थोड़ा दबाव बनाया तो इंडिया ने भी आयात कम कर दिया था. इसके बावजूद भारत के संबंध ईरान से अच्छे ही रहे हैं. बाकी दुनिया के तेल व्यापारी भी इस चुनाव पर नजर गड़ाए हुए हैं. क्योंकि इस चुनाव के नतीजे से तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा. अगर रूहानी जीतते हैं और अमेरिका के साथ संबंध सुधर जाते हैं तो ईरान को अपना तेल बेचने में आसानी रहेगी. अगर रैसी जीतते हैं और अमेरिका से संबंध बिगड़ जाते हैं तो उलटा मामला हो जाएगा.

ये भी पढ़ें:

वो ईरान को हाफ पैंट से बुर्के तक लाया और फिर न्यूक्लियर बम पर बैठाकर चला गया: राफसंजानी की कहानी

वो जबराट नेता, जिसकी खोपड़ी भिन्नाट हो तो चार-छह आतंकी खुद ही निपटा दे

अगर आप असल रीमा लागू को जानना चाहते हैं, तो आपको ये पढ़ना चाहिए

पेप्सी और कोका कोला पीने वालों के लिए बहुत बड़ी खबर, 25 सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

राधिका आप्टे से प्रोड्यसूर ने पूछा 'हीरो के साथ सो लेंगी' और उन्होंने घुमाके दिया ये जवाब!

इसीलिए वे अपनी पीढ़ी की सबसे ब्रेव एक्ट्रेसेज़ में से हैं.

पीएम मोदी, ट्रिपल तलाक बुरा है, मगर औरतों के 'खतने' का दर्द और भी बुरा है

बचपन में बच्चियों के प्राइवेट पार्ट काट देना, ये कैसा रिवाज है?

माफ़ करिए, मुझे मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर पर गर्व नहीं है

न ही 'देश के लिए' ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतने वाली किसी और लड़की पर.

प्रियंका तनेजा उर्फ़ हनीप्रीत: गुरमीत की 'गुड्डी', जिसके बिना उसका एक मिनट भी नहीं कटता

मुंहबोली बेटी के लिए राम रहीम ने कोर्ट से चौंकाने वाली अपील की है.

जिसे हमने पॉर्न कचरा समझा वो फिल्म कल्ट क्लासिक थी

अठारह वर्ष से ऊपर वाले दर्शकों/पाठकों के लिए.

17 साल की लड़की ने सड़क पर बच्चा डिलीवर किया, इसका जिम्मेदार कौन है?

विचलित करने वाला ये वीडियो हमारे समाज की नंगई दिखाता है.

इंसानी पाद के बारे में सबसे महत्वपूर्ण जानकारियां

जिन्हें लगता है कि लड़कियां नहीं पादतीं, वो ये ज़रूर पढ़ें.

'गुप्त रोगों' के इलाज के नाम पर की गई वो क्रूरता, जिसे हमेशा छिपाया गया

प्रेगनेंट औरतों, बीमार पुरुषों और अनाथ बच्चों के साथ अंग्रेज और अमेरिकी करते थे जघन्य हरकत.

औरत बने आदमी, और आदमी बनी औरत के बीच हुई अनोखी शादी

दो ऐसे लोगों की प्रेम कथा, जिन्हें आप आम भाषा में 'हिजड़ा' कह भगा देते हैं.

ट्विंकल खन्ना की ये क्रूरता बहुत घृणित है

अगर यही इन हाई-सोसायटी के महानगरी लोगों की संवेदनशीलता है तो बहुत निराश करने वाली है.

सौरभ से सवाल

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.

ऑफिस के ड्युअल फेस लोगों के साथ कैसे मैनेज करें?

पर ध्यान रहे. आप इस केस को कैसे हैंडल कर रहे हैं, ये दफ्तर में किसी को पता न चले.

ललिता ने पूछा सौरभ से सवाल. मगर अधूरा. अब क्या करें

कुछ तो करना ही होगा गुरु. अधूरा भी तो एक तरह से पूरा है. जानो माजरा भीतर.

ऐसा क्या करें कि हम भी जेएनयू के कन्हैया लाल की तरह फेमस हो जाएं?

कोई भी जो किसी की तरह बना, कभी फेमस नहीं हो पाया. फेमस वही हुआ, जो अपनी तरह बना. सचिन गावस्कर नहीं बने. विराट सचिन नहीं बने. मोदी अटल नहीं बने और केजरीवाल अन्ना नहीं बने.

तुम लोग मुझे मुल्ले लगते हो या अव्वल दर्जे के वामपंथी जो इंडिया को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते हो

हम क्या हैं. ये पूछा आपने. वही जो आप हैं. नाम देखिए आप अपना.

एक राइटर होने की शर्तें?

शर्तें तो रेंट एंग्रीमेंट में होती हैं. जिन्हें तीन बार पढ़ते हैं. या फिर किसी ऐप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने में, जिसकी शर्तों को सुरसुराता छोड़कर हम बस आई एग्री वाले खांचे पर क्लिक मार देते हैं.