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गुड़िया रेप केस: हिमाचल पुलिस की इतनी भद्द आज तक नहीं पिटी थी, CBI नई थ्योरी लाई है

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला. इसके नजदीक एक जगह है कोटखाई. सेब की भरपूर पैदावार और देवदार के जंगलों के लिए इस इलाके का नाम है. यहीं एक गांव है हलैला. 4 जुलाई 2017 को यहां रहने वाली 16 साल की लड़की गुड़िया (बदला हुआ नाम) अपने भाई के साथ स्कूल गई थी. स्कूल सरकारी था और उस दिन वहां खेलों का आयोजन हो रहा था. पढ़ाई नहीं होनी थी इसलिए गुड़िया स्कूल से घर लौटने लगी थी. सोचा घर चलकर मां का कुछ घर के काम में हाथ बंटा लेगी. उसने जल्दी घर पहुंचने के लिए जंगल का रास्ता लिया. उसने अपनी नैतिक शिक्षा की किताब के भीतर पिता की एक सलाह को तह करके रखा हुआ था. “जंगल में चलते हुए हर आहट पर कान देना, जंगली जानवरों से सावधान रहना.” गुड़िया को पिता ये बताना भूल गए थे कि सभ्य सा दिखने वाला इंसान कई बार जंगल में रहने वाले जानवरों से ज्यादा वहशी होता है. जल्दी स्कूल से निकलने के बावजूद वो उस दिन घर नहीं पहुंची.

परिवार ने खूब खोजा. नहीं मिली. गरीब परिवार पुलिस के पास पहुंचा और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. दो दिन तक पुलिस और घरवाले गुड़िया की तलाश में लगे रहे. गुड़िया के मामा उसकी खोज के लिए दांदी के जंगल की खाक छान रहे थे. दो दिन बाद यानी 6 जुलाई को सबसे पहले उन्होंने गुड़िया की नंगी लाश देखी. हत्या को दो दिन हो चुके थे और लाश को कीड़े लग चुके थे. आस-पास के लोग भी मौके पर पहुंच गए और इस क्षत-विक्षत लाश की फोटो लेने लगे. बाद में ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. लोग सड़कों पर उतरने लगे. पुलिस ने इस बार भी ऐक्शन करने में देरी कर दी. इस बीच गुड़िया की क्षत-विक्षत लाश की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. शिमला से शुरू हुए प्रदर्शन ने जल्द ही पूरे पहाड़ को अपनी गिरफ्त में ले लिया.

Virbhadra

वायरल मैसेज में गुड़िया की लाश के साथ उन लोगों की तस्वीरें भी चलने लगीं जिन पर शक जताया जा रहा था. वो 5 लोग थे. साथ ही मुख्यमंत्री के आधिकारिक फेसबुक एकाउंट से 11 जुलाई की रात चार आरोपियों की फोटो पोस्ट की गई. पोस्ट में लिखा गया कि शिमला गैंगरेप के मामले में आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है. हालांकि यह पोस्ट जल्द ही हटा ली गई लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. पोस्ट के स्क्रीनशॉट कट चुके थे और सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके थे. प्रेशर बढ़ा तो प्रदेश पुलिस आईजी जहूर ज़ैदी की अध्यक्षता में एक स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (SIT) बना दी गई. इससे भी बात न बनी तो फिर 15 जुलाई को मुख्यमंत्री ने मामले की सीबीआई जांच करने की चिट्टी पीएम को भेज दी.

हिमाचल पुलिस की थ्योरी

HP IGP
आईजीपी जहूर जैदी (बाएं) अभी भी न्यायिक हिसारत में हैं.

13 जुलाई यानी घटना के 9 दिन बाद पुलिस पत्रकारों के सामने आई और बताया कि 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने इसे बड़ी कामयाबी बताया लेकिन ये वो मौका था, जहां जांच संदेह के दायरे में आ गई. मुख्यमंत्री के फेसबुक अकाउंट से जिन चार युवकों की तस्वीर शेयर की गई थी, वो रसूखदार घरों से आते हैं. सरकार पर आरोप लगा कि वो आरोपियों को बचाने के लिए बेगुनाह लोगों की बलि ले रही है. पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने कबूला है कि इस खौफनाक गैंगरेप से गुजरने के बाद गुड़िया काफी देर तक अपनी जान की भीख मांगती रही. उसने कहा था कि वो जिंदा रहना चाहती है. लेकिन आरोपियों ने उसकी एक ना सुनी और उसका गला घोंटना शुरू किया. करीब 10-12 मिनट छटपटाने के बाद उसने दम तोड़ दिया. पुलिस ने कहा कि ये केस सुलझ गया है और पकड़े गए 6 आरोपियों ने गुड़िया का गैंगरेप किया और फिर हत्या कर दी. ये आरोपी थे राजेंद्र सिंह उर्फ राजू, सुभाष बिष्ट, दीपक, सूरज सिंह, लोकजन और आशीष. पुलिस ने कहा कि इन्हीं लोगों ने पहले गुड़िया को नशीली चीज पिलाने के बाद गैंग रेप किया और फिर गला घोंट कर मार दिया.

उस वक्त कुछ सवाल उठे:

# पुलिस ने कहा था कि जिस जगह से गुड़िया की लाश बरामद हुई थी वहीं पर रेप और मर्डर हुआ, जिसपर भरोसा नहीं हुआ. वो जगह सड़क के पास में है.

# अगर गुड़िया की मौत 4 जुलाई को हुई थी, तो उसकी लाश पूरे दो दिन तक जंगली जानवरों से कैसे बची रही?

# पुलिस का कहना है कि गुड़िया की लाश के पास से उसके कपड़े बरामद किए गए हैं. 5 तारीख को उस इलाके में भयंकर बारिश हुई थी. ऐसे में कपड़े मौका-ए- वारदात से सही-सलामत मिल जाएं, ये बात गले उतरनी मुश्किल है.

# नेपाली मूल के दो आरोपियों के घर घटनास्थल से महज 200 मीटर की दूरी पर हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आरोपियों ने लाश को ठिकाने लगाने या शिमला से भाग जाने की कोशिश क्यों नहीं की?

पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत

Accused Suraj
नेपाली नागरिक सूरज की हत्या से पुलिस पर कई सवाल उठे थे.

पहले ही पुलिस की थ्योरी पर भरोसा नहीं हो पा रहा था. इसी बीच खबर आई कि 18 और 19 जुलाई की दरम्यानी रात नेपाली मूल के एक आरोपी सूरज सिंह की उसके साथी राजेंद्र ने हिरासत में हत्या कर दी. ये खबर जैसे ही बाहर आई लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. लोग पहले से ही मामले की जांच को संदिग्ध मान रहे थे. सुबह से ही लोग थाने के बाहर जुटने लगे. दोपहर तक लोगों की संख्या हजारों में पहुंच गई. भीड़ बेकाबू हो गई. 19 जुलाई को करीब 3.15 PM पर भीड़ थाने में घुसी और उसे आग के हवाले कर दिया. आईजी जहूर जैदी को पुलिस थाने में बंधक बना लिया गया. जैसे-तैसे करके बलवा शांत हुआ. देर शाम शिमला के आईजी, एसपी और एएसपी बदल चुके थे. एसआईटी टीम में भी बदलाव किए जा चुके थे. राज्य सरकार की तरफ मामला सीबीआई जांच के लिए जा चुका था. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मामले के राजनीतिकरण का आरोप विपक्ष के मत्थे मढ़ चुके थे.

29 अगस्त को पुलिस का फर्जीवाड़ा बाहर आया. पुलिस हिरासत में आरोपी की हत्या से सवालिया निशान लग गया कि अगर ये रेप जैसे सीरियस गुनाह के आरोपी हैं, तो हिरासत में एक-दूसरे का क़त्ल करने पर कैसे उतारू हो सकते हैं. सीबीआई ने आईजी जहूर जैदी समेत आठ पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया. पूरा प्रदेश इस खबर से हिल गया. कोई पुलिस का आला अफसर जिस केस की जांच कर रहा था, उसमें लापरवाही के चलते जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया.

हिमाचल चुनावों में मुद्दा बना

Thana set on fire
कोटखाई में थाने को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया था.

9 नवंबर के दिन हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे. वीरभद्र सरकार के खिलाफ जनमानस में गुड़िया केस के चलते खूब रोष था. इसका फायदा विपक्षी पार्टी भाजपा ने भी उठाया. दी लल्लनटॉप ने अपनी चुनावी कवरेज के दौरान हिमाचल के हर जिले में जाकर ये पाया कि गुड़िया रेप केस हिमाचल का सबसे बड़ा मुद्दा है. कानून व्यवस्था लोगों के लिए पहली बार इतना बड़ा मुद्दा बन रहा था. स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में इस पर खूब चर्चा हो रही थी. जब चुनाव परिणाम आए तो कांग्रेस की हार हुई. वीरभद्र सिंह ने भी कई बार माना कि इस केस से उनकी सरकार को नुकसान पहुंचा है.

अब सीबीआई की नई थ्योरी

Anil new accused
सीबीआई अनिल कुमार को घटना स्थल पर ले गई और अब इसी को मुख्य आरोपी बनाया है.

25 अप्रैल 2018. सीबीआई ने हिमाचल पुलिस की पूरी जांच को फर्जी बताते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. सीबीआई ने कहा है कि 40 सदस्यों की जांच टीम ने 9 महीने तक इस मामले की जांच की है और वो इस नतीजे पर पहुंची है कि गुड़िया का गैंगरेप नहीं रेप हुआ है. 6 लोगों ने नहीं, सिर्फ एक आदमी ने किया. वो है अनिल कुमार उर्फ नीलू. कांगड़ा जिले का रहने वाला ये 25 साल का आरोपी हत्या की कोशिश मामले में सजायाफ़्ता है और भगोड़ा है. वो कोटखाई में किसी लकड़ी के ठेकेदार के पास मजदूरी करता था और अपने परिवार के संपर्क में भी नहीं था.

सीबीआई के मुताबिक घटनास्थल से मिले सबूतों से अनिल का सौ फीसदी डीएनए मिलता है. उसने गुड़िया को अकेला पाकर उसका रेप किया और फिर उसे मार दिया. इसके बाद वो उस जगह से गायब रहा. इस आरोपी के पास अपना मोबाइल फोन भी नहीं है और वो अक्सर दूसरों के फोन से कहीं फोन करता था. सीबीआई ने आरोपी को मौके पर ले जाकर पूरा घटनाक्रम सिलसिलेवार तरीके से दर्ज किया है और वो इस मामले में फाइनल स्टेटस रिपोर्ट शिमला हाईकोर्ट में जमा की है. मगर हाई कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा खुद कोर्ट में पेश हों और एक हलफ़नामा दें कि जो भी जानकरियां उन्होंने स्टेटस रिपोर्ट में दी हैं वो सही हैं और उनकी गारंटी वो लेते हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 8 मई को है जब सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को शिमला में कोर्ट के सामने पेश होना है. साथ ही इस केस में लापरवाही के मामले में न्यायिक हिरासत में 8 पुलिस वालों के खिलाफ सीबीआई में चार्जशीट दाखिल कर दी है.

पहले पुलिस की दिशाहीन जांच और अब इससे उलट सीबीआई की नई थ्योरी से मामला और उलझता नजर आ रहा है. शुरुआती जांच में सबूतों को जुटाने में लापरवाही और फिर मामले को दबाने के चक्कर में हुई गलतियों का असर सीधे पीड़ित परिवार को इंसाफ से दूर ले जाता दिख रहा है. जब हाईकोर्ट ही सीबीआई की थ्योरी से संतुष्ट नहीं है तो फिर जनता में कैसे विश्वास जगाया जाए, ये सवाल अभी भी सबके सामने हैं.


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