क़िस्सा उस क्रिकेटर का, जिसे खेलते देख सर डॉन ब्रेडमैन ने कहा था, 'काश मैं ऐसी पारी खेल पाता'
जिनकी बैटिंग देखने वाले अफसोस करते थे- काश ये बैटिंग सब लोग देख पाते!
![]Stan McCabe - Don Bradman Austalian batsman](https://static.thelallantop.com/images/post/1661418516490_stan_mccabe_-_don_bradman_.webp?width=210)
इतने सारे क़ोट सुनकर आपको लग रहा होगा कि आज आपको सर डॉन ब्रेडमैन के बारे में कोई क़िस्सा सुनने को मिलेगा. और सच में अगर आपको लग रहा है तो रुकिए ज़रा, सबर करिए. पहले सर डॉन ब्रेडमैन का एक क़ोट तो सुन लीजिए. सर ब्रेडमैन ने एक दफ़ा कहा था,
स्टैन. स्टैनली जोसेफ मैक्केब. जी हां, आज हम आपसे इन्हीं की बात करने वाले हैं. इनके जलवे का अंदाजा तो आपको सर डॉन की बात सुनकर लग ही गया होगा. और क्रिकेट में सर डॉन ब्रेडमैन का कद कितना ऊंचा है, इसके बारे में तो कुछ भी कहना 'सूरज को दिया' दिखाने जैसा होगा.
तो चलिए अब मुद्दे पर आते है. आज हम आपको इन्हीं स्टैन की एक पारी का क़िस्सा सुनाने वाले हैं. जिनको सर डॉन के बाद दूसरा सबसे बढ़िया बल्लेबाज कहा जाता था. और जिनको बल्लेबाजी करता देख ब्रेडमैन खुद अपने साथियों से बोल पड़े थे,
# जब स्टैन ने अंग्रेजों को धो दिया था!ये बात है साल 1938 की. ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड के खिलाफ़ एशेज खेलने उनके घर पहुंची थी. ये सीरीज़ पांच मैच की थी. और पहला मुकाबला ट्रेंट ब्रिज में हो रहा था. यहां पर इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का मन बना लिया. और क्या धमाकेदार पारियां खेली.
इंग्लैंड के तीन बल्लेबाजों ने शतक और एक ने दोहरा शतक जड़ा. 219 रन पर इस टीम का पहला विकेट गिरा. टीम के लिए ओपन करने आए चार्ली बार्नेट (Charlie Barnett) और लियोनर्ड हटन (Leonard Hutton) ने शतकीय पारियां खेली. इनके आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलिया वालों को थोड़ा आराम मिला. और उन्होंने सोचा कि इंग्लैंड की बल्लेबाजी अब बिखर जाएगी. उनकी उम्मीदें पूरी होती भी दिखीं. दो खिलाड़ी पांच और 26 रन बनाकर लौटे भी.
लेकिन फिर एडी पेंटर (Eddie Paynter) और डेनिस कॉम्पटन (Denis Compton) बल्लेबाजी करने आ गए. और यहां से इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने ऑस्ट्रेलिया को और कूटा. एडी ने दोहरा शतक जड़ा, डेनिस ने शतक लगाया. इसके बाद लेस ऐम्स (Les Ames) आए और उन्होंने भी 46 रन की पारी खेली. इंग्लैंड ने आठ विकेट खोकर 658 रन बनाकर पारी को डिक्लेयर किया.
अब ऑस्ट्रेलिया के सामने बहुत बड़ा लक्ष्य था. लेकिन उनकी शुरुआत बहुत खराब हुई. उनको भी चाहिए थे खूब रन बनाने वाले बल्लेबाज. मॉर्डन डे ग्रेट्स का नाम लेकर कहें तो इस वक्त ऑस्ट्रेलिया को डेविड वॉर्नर की जरूरत थी. लेकिन वॉर्नर तो अब हैं, तब कैसे मिल जाते. जैक फिंगलटन (Jack Fingleton) सिर्फ नौ रन बनाकर पविलियन लौट गए.
इनके बाद बिल ब्राउन (Bill Brown) ने 48 और सर ब्रेडमैन ने 51 रन की पारी खेली. टीम ने 134 रन पर तीन विकेट गंवा दिए. ऑस्ट्रेलिया दिक्कत में. अब उन्हें चाहिए थे राहुल द्रविड़ या जो रूट. और इस बार उनकी इच्छा पूरी हो गई.
उन्हें जो मिला, वो इनसे बेहतर था. अब मैदान पर उतरे स्टेन मैक्केब. स्टैन आए और कमाल की बल्लेबाजी शुरू कर दी. इस चेज़ में वो अटैक करने से भी नहीं चूके. जब मौका मिलता बाउंड्री लगा देते. लेकिन दिक्कत ये थी कि उनका कोई साथ नहीं दे रहा था. फ्रैंक वॉर्ड (Frank Ward), लिंसी हैसेट (Lindsay Hassett), जैक बैडकॉक (Jack badcock) 10 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए थे.
लेकिन दूसरे एंड से स्टेन की पारी चलती रही. जो भी आता, उसके साथ वो छोटी पार्टनरशिप करते जाते. और स्कोर को आगे बढ़ाते जाते. और इंग्लिश गेंदबाजों को कूटते जाते. ये क्रिया ऐसे ही चलती रही जब तक सारे बल्लेबाज पविलियन नहीं लौटे. अंत तक आते-आते स्टेन भी आउट हो गए.
क्रिकेट कंट्री की मानें तो स्टेन की इस पारी पर प्रेसबॉक्स में बैठे बिल वुलफुल ने कहा था,
स्टैन ने इस पारी में 277 गेंदों में 232 रन कूटे थे. इसमें 34 चौके और एक छक्का शामिल था. इसी पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया 411 रन तक पहुंच पाई. अब इस मैच के नतीज़े के बारे में आप सोच रहे हों तो बता दें, कि ऑस्ट्रेलिया की टीम ये मैच बचाने में क़ामयाब हो गई थी.
कमाल के बल्लेबाज रहे स्टैन ने 39 टेस्ट मैच में 2748 रन बनाए थे. 16 जुलाई 1910 को जन्मे स्टैन 25 अगस्त 1968 को स्वर्गवासी हो गए थे.
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