'सूरज, चांद, सितारों वाली हमदर्दी की प्यारी-प्यारी ईद मुबारक'
आज पढ़िए केदारनाथ अग्रवाल की कविता 'ईद मुबारक.'
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फोटो - thelallantop
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एक कविता रोज़ में आज केदारनाथ अग्रवाल-
ईद मुबारक
हमको, तुमको, एक-दूसरे की बांहों में बंध जाने की ईद मुबारक. बंधे-बंधे; रह एक वृंत पर, खोल-खोल कर प्रिय पंखुरियां कमल-कमल-सा खिल जाने की, रूप-रंग से मुस्काने की हमको, तुमको ईद मुबारक. और जगत के इस जीवन के खारे पानी के सागर में खिले कमल की नाव चलाने, हंसी-खुशी से तर जाने की, हमको, तुमको ईद मुबारक. और समर के उन शूरों को अनुबुझ ज्वाला की आशीषें, बाहर बिजली की आशीषें और हमारे दिल से निकली- सूरज, चांद, सितारों वाली हमदर्दी की प्यारी-प्यारी ईद मुबारक. हमको, तुमको सब को अपनी मीठी-मीठी ईद-मुबारक.कुछ और कविताएं यहां पढ़िए:
‘पूछो, मां-बहनों पर यों बदमाश झपटते क्यों हैं’
‘ठोकर दे कह युग – चलता चल, युग के सर चढ़ तू चलता चल’
‘जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख'
‘दबा रहूंगा किसी रजिस्टर में, अपने स्थायी पते के अक्षरों के नीचे’
वीडियो देखें-
https://www.youtube.com/watch?v=7KNK_Z5iR1Q
