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हर प्रेग्नेंट महिला और उसके बच्चे के लिए ये 5 टेस्ट बेहद ज़रूरी

ज़्यादातर मामलों में होने वाले बच्चे की हेल्थ का अंदाज़ा पहले से लगाया जा सकता है. नौ महीनों के दौरान कुछ टेस्ट कराएं जाने ज़रूरी है. हम डॉक्टर से जनेगें ऐसे ही 5 टेस्ट्स के बारे में जानेंगे, जो हर प्रेगनेंट महिला को करवाने चाहिए.

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सरवत
| आयूष कुमार
2 अक्तूबर 2023 (पब्लिश्ड: 08:36 PM IST)
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प्रेग्नेंसी के दौरान की गई इन जांचो से लग जाएगा होने वाले बच्चे की सेहत का अंदाजा.
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हर इंसान चाहता है कि जब उसका बच्चा पैदा हो, तो स्वस्थ्य हो. अब वैसे तो हर चीज़ इंसान के हाथ में होती नहीं. पर ज़्यादातर मामलों में होने वाले बच्चे की हेल्थ का अंदाज़ा पहले से लगाया जा सकता है. इसके लिए प्रेग्नेंसी (pregnancy) के नौ महीनों के दौरान कुछ टेस्ट (pregnancy test) कराएं जाने ज़रूरी हैं. ये टेस्ट आने वाले बच्चे की सेहत से जुड़ी ज़रूरी बातें बता देते हैं.

लल्लनटॉप की व्यूअर हैं सितारा. प्रेगनेंट हैं. ये उनकी पहली प्रेग्नेंसी हैं. सितारा हेल्दी खाना खा रही हैं. एक्सरसाइज़ भी कर रही हैं. डॉक्टर की सारी बातें भी मान रही हैं. इन सबके अलावा हम डॉक्टर से जनेगें 5 ऐसे टेस्ट्स के बारे में जानेंगे, जो हर प्रेगनेंट महिला को करवाने चाहिए. साथ ही ये भी जानेंगे कि इन टेस्ट्स से पता क्या चलता है और इनकी क़ीमत क्या है?

प्रेग्नेंसी में ये 5 टेस्ट ज़रूरी -

दी लल्लनटॉप ने बात की डॉक्टर आकार कपूर से. उन्होंने हमें बताया कि प्रेग्नेंसी एक नॉर्मल कंडीशन है, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ टेस्ट करवाने बेहद ज़रूरी हैं. वैसे तो प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत सारे टेस्ट किए ही जाते हैं, लेकिन इनमें से पांच टेस्ट मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद ज़रूरी होते हैं.

(डॉ आकार कपूर, फाउंडर, सिटी इमेजिंग एंड क्लीनिकल लैब्स)
ब्लड प्रेशर टेस्ट

- ब्लड प्रेशर को नियमित रूप से चेक करवाते रहें.

- जब भी डॉक्टर के पास जाएं, बीपी ज़रूर चेक कराएं.

- इससे प्री-एक्लेमप्सिया (Preeclampsia) यानी प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हाई बीपी की समस्या जैसी दिक्कतों का समय रहते पता लग जाता है.

- अगर प्रेग्नेंसी के दौरान कभी भी बीपी बढ़े या प्रेग्नेंसी से पहले अगर महिला को हाई-बीपी रहा हो, तो ऐसे में महिला को घर पर भी एक बीपी की मशीन रखने की सलाह दी जाती है.

- ऐसी बीपी मशीन की क़ीमत 1 हज़ार से 2 हज़ार रुपये तक होती है.

ख़ून की जांच

- प्रेग्नेंसी की शुरुआत में मां के ख़ून की नियमित जांच भी जरूरी है.

- ब्लड टेस्ट से कई चीज़ों और बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है.

- जैसे हीमोग्लोबिन, ब्लड काउंट टेस्ट, ब्लड ग्रुप टेस्ट, RH फैक्टर टेस्ट.

- साथ ही शुगर लेवल, हेपेटाइटिस, HIV और सिफलिस जैसी बीमारियों के टेस्ट शामिल होते हैं.

- खून की जांच से प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज़ और दूसरे इंफेक्शनों का समय रहते पता चल जाता है.

- ये सभी टेस्ट एंटीनेटल पैकेज (प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली जांचो का पैकेज) में भी शामिल होते हैं.

- इनकी क़ीमत 1,500 से 2,500 के बीच होती है.

पेशाब की जांच

- प्रेग्नेंसी में पेशाब की जांच करना भी बेहद ज़रूरी है.

- इससे कई बीमारियों का पता चलता है. जैसे प्री-एक्लेमप्सिया, पेशाब में प्रोटीन का आना, पस आना और पेशाब के रास्ते में होने वाले इन्फेक्शंस का पता चलता है.

- ये टेस्ट 100 से 200 रुपए तक में आसानी से हो जाता है. 

अल्ट्रासाउंड

- अल्ट्रासाउंड स्कैन के ज़रिए मां के पेट में बच्चे के एक-एक अंग को देखा जा सकता है.

- बच्चे का विकास ठीक से हो रहा है या नहीं, इसका भी पता चल जाता है.

- अल्ट्रासाउंड की मदद से जानलेवा बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है. अगर बीमारी गंभीर हुई तो बच्चा भी गिराना पड़ सकता है.

- प्रेग्नेंसी के 18 से 22 हफ्तों के बीच 'लेवल-2' नाम का एक अल्ट्रासाउंड किया जाता है.

- प्रेग्नेंसी के 30 से 34 हफ्तों के बीच 'प्रेग्नेंसी डॉप्लर' नाम से एक टेस्ट किया जाता है.

- ये दोनों टेस्ट 1,500 से 2,000-3,000 रुपए के बीच हो जाते हैं. रंगीन अल्ट्रासाउंड मशीन का टेस्ट महंगा पड़ता है.

जेनेटिक रिस्क स्क्रीनिंग टेस्ट

- अगर माता-पिता में से किसी के परिवार में जेनेटिक या आनुवंशिक बीमारी है, तो ऐसे में बच्चे के लिए ख़तरा बढ़ जाता है. इसलिए जेनेटिक रिस्क स्क्रीनिंग टेस्ट जरूरी है.

- जेनेटिक रिस्क स्क्रीनिंग टेस्ट कई तरह के होते हैं.

- जैसे 11.5 से 14 हफ्तों के बीच होने वाला 'डबल मार्कर' टेस्ट. इसमें क्रोमोज़ोम्स से जुड़ी दिक्कतों का पता चलता है.

- 14 से 21 हफ्तों के बीच होने वाला 'क्वाड्रुपल मार्कर' टेस्ट. इसमें डाउन सिंड्रोम जैसी बीमारी का पता चलता है.

- हमेशा किसी भरोसेमंद लैब से ही टेस्ट कराएं. कोशिश करें कि सारे टेस्ट या ज्यादातर टेस्ट एक ही जगह एक ही लैब में हो जाएं. इससे मरीज को भी आसानी होती है और टेस्ट रिपोर्ट भी जल्दी मिल जाती हैं.

- प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का अच्छा खाना और खुश रहना जरूरी है. साथ ही एक्सरसाइज़ करना भी जरूरी है.

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको ख़ुद से कोई दवाई लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: क्या होती है एक्‍टोपिक प्रेग्रेंसी जिसमें बच्चा गर्भ से बाहर बनता है

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