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कांवड़ यात्रा को उत्तराखंड की 'ना' लेकिन यूपी की 'हां', आखिर होगा क्या?

भगवान शिव के भक्तों के लिए कांवड़ यात्रा बहुत महत्व रखती है. हर साल सावन के सीजन में लाखों की संख्या में ‘बोल बम’ के नारे लगाते शिवभक्त गंगा पहुंचते हैं. वहां से गंगाजल लेकर उस मंदिर में जाते हैं जहां वे मान्यता रखते हैं. और अपने साथ लाए गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं. सैंकड़ों सालों से ये कांवड़ यात्रा बदस्तूर चली आ रही है. लेकिन पिछले साल इस यात्रा पर ब्रेक लग गया. वजह, कोरोना वायरस. और इस साल भी कांवड़ को लेकर काफी ऊहापोह की स्थिति है. उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के कारण इस बार कांवड यात्रा से मना किया है. लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस यात्रा को हरी झंडी दे दी है.

उत्तराखंड सरकार की सख्ती

कुंभ मेले के दौरान कोरोना फैलने की काफी खबरें सामने आई थीं. मामला इतना बढ़ा था कि कुंभ में लोगों की आवाजाही को लेकर पीएम मोदी को भी अपील करनी पड़ी थी. सोशल मीडिया पर कुंभ के लिए ‘कोरोना सुपर स्प्रेडर कुंभ’ तक भी कहा गया. इस कारण उत्तराखंड सरकार पर भी काफी सवाल उठे थे. अब नए सीएम पुष्कर सिंह धामी किसी नए विवाद के मूड में नहीं हैं. लिहाजा उन्होंने इस साल कांवड़ यात्रा को रोक दिया है.

उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने मंगलवार 6 जुलाई को देहरादून में कांवड़ यात्रा को लेकर 8 राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग की. इस बैठक में एक ये सुझाव भी दिया गया कि आसपास के राज्य अपने टैंकर और टीमें भेज सकते हैं जो गंगाजल ले जाएं और वहां से भक्त इसे ले लें. रिपोर्ट लिखे जाने तक इस सुझाव पर मुहर नहीं लगी थी.

इस मीटिंग के बाद अशोक कुमार ने कहा कि साल 2020 की तरह इस साल भी कोरोना के चलते उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा को प्रतिबंधित किया है. इस पर बात करने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने डीजीपी अशोक कुमार को फोन किया. फोन पर उनकी स्टाफ ऑफिसर ने हमें बताया कि कांवड़ यात्रा को लेकर एक मीटिंग 7 जुलाई को होनी थी. उसके बाद ही निश्चित तौर पर कुछ कहा जा सकेगा.

वहीं, इंडिया टुडे ग्रुप के उत्तराखंड संवाददाता दिलीप सिंह ने लल्लनटॉप को बताया,

“उत्तराखंड में पर्यटन कमाई का बड़ा जरिया है. 2020 के शुरू से ही कोविड के कारण पर्यटन ठप है. धार्मिक आयोजन भी बंद ही हैं. कांवड़ यात्रा पिछले साल भी बंद रही थी. चारधाम यात्रा भी बंद है. आर्थिक रूप से इन इलाकों के लोगों को बहुत नुकसान हुआ है. ऐसे में हरिद्वार और आसपास के इलाकों के लोग चाहते हैं कि कांवड़ यात्रा हो. इसके लिए बाकायदा ये लोग सरकार से मांग कर रहे हैं. और सरकार तमाम विकल्पों पर विचार कर रही है.”

“हर के पौड़ी पर खाने पीने की दुकाने हों, होटल हों, अन्य तरीके के व्यापार हों, सब कुछ पर्यटकों पर निर्भर है. लेकिन अब लोग ही नहीं हैं. ऐसे में स्थानीय लोग और व्यापारी काफी परेशान हैं. सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि कांवड़ यात्रा को होने दिया जाना चाहिए. लेकिन कोर्ट ने हाल ही में चारधाम यात्रा को लेकर फैसला दिया है. साथ ही कोविड को लेकर भी सावधानी बरती जानी है. ये उत्तराखंड सरकार के सामने बड़ी चुनौती है.”

यूपी सरकार कर रही कांवड़ की तैयारी

उत्तराखंड सरकार ने भले ही कांवड़ यात्रा को इस बार रोक दिया है, लेकिन यूपी सरकार इसकी तैयारी कर रही है. हालांकि इस बार यात्रा और जलाभिषेक के दौरान कोविड गाइडलाइन्स का पालन कराए जाने पर जोर रहेगा. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर यूपी के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पड़ोसी राज्यों से बात करके श्रद्धालुओं के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएं. उन्होंने कहा कि 25 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू होनी है, उससे पहले यात्रा की तैयारियों और कोविड निर्देशों को लेकर खाका तैयार किया जाए.

इस पर और अधिक जानकारी के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने फोन पर बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला से बात की. उन्होंने कहा,

“यूपी सरकार कांवड़ यात्रा सही और सुचारू रूप से कराने के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन इस बार कोरोना के चलते ये सुनिश्चित किया जाएगा कि कोविड गाइडलाइन्स का पालन हो. अभी राज्य के वरिष्ठ अधिकारी इस पर चर्चा कर रहे हैं कि किस तरह यात्रा को शिवभक्तों के लिए आसान बनाया जाए और कोविड नियमों का भी पालन होता रहे. पश्चिमी यूपी के लोग अधिकतर हरिद्वार या ऋषिकेश जाते हैं कांवड़ के लिए. उत्तराखंड के अधिकारियों से भी इस पर यूपी के अधिकारी चर्चा करेंगे और कोई ना कोई रास्ता जरूर निकाल लिया जाएगा. मैं फिर कह दूं कि कोविड नियमों का पालन कराया जाएगा.”

उत्तराखंड से जल लेने के लिए सबसे अधिक कांवड़िए पश्चिमी यूपी और हरियाणा से पहुंचते हैं. साथ ही दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान से भी काफी भक्त आते हैं. ऐसे में कोरोना संकट के मद्देनजर पश्चिमी यूपी के अफसर इस बार की भीड़ के मैनेजमेंट को लेकर क्या करेंगे और कैसे करेंगे, इस पर अधिक जानकारी के लिए हमने मेरठ मंडल के कमिश्नर सुरेंद्र सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई. उनका वर्जन मिलने पर उसे भी खबर में जोड़ा जाएगा.

चारधाम यात्रा पर 28 जुलाई तक रोक

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बुधवार 7 जुलाई को चारधाम यात्रा को लेकर सुनवाई हुई. इसमें 28 जुलाई तक यात्रा पर रोक जारी रखने का फैसला लिया गया है. इससे पहले ये रोक 7 जुलाई तक थी. कोर्ट ने सरकार से चारधाम की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए चारधाम बोर्ड के साथ मीटिंग में फैसला लेने को कहा है. साथ ही वीकेंड पर पर्यटक स्थलों को खोलने के फैसले पर फिर से सोचने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि यात्रियों की भीड़ से पहाड़ों पर कोविड का संकट हो सकता है.

जगन्नाथ पुरी यात्रा भी सीमित की गई

हर साल बहुत जोर-शोर से होने वाली जगन्नाथ रथयात्रा इस साल केवल पुरी के जगन्नाथ मंदिर में ही होगी. ओडिशा सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी और राज्य में कुछ स्थानों पर यात्रा की अनुमति मांगी गई थी. लेकिन कोर्ट ने ओडिशा सरकार के फैसले को सही बताया है और कहा है कि देश अभी कोरोना की दूसरी लहर से उबर रहा है, ऐसे में राज्य सरकार का फैसला सही है. चीफ जस्टिस रमना ने कहा कि आशा है अगले साल भगवान रथयात्रा की अनुमति देंगे. उन्होंने कहा कि वे खुद भी रथयात्रा में जाना चाहते हैं लेकिन हालातों को देख कर उन्होंने घर पर ही पूजा करने का फैसला किया है.


वीडियो- शिव को कांवड़ से जल चढ़ाने की कहानी क्या है?

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