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जज साहब ने भ्रष्टाचार पर जजों का धागा खोला, मगर फिर जो हुआ वो बहुत बुरा है

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जस्टिस राकेश कुमार. पटना हाईकोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज. बिहार में किसी भी भोजपुरी गाने या हीरो या नेता से ज्यादा चर्चा में हैं. चर्चा की दो वजह हैं. पहली उनका एक आदेश. दूसरा उनका सस्पेंशन.

पहले बात आदेश की.

28 अगस्त. जस्टिस राकेश कुमार पूर्व आईएएस अधिकारी केपी रमैय्या की अग्रिम जमानत पर सुनवाई कर रहे थे. केपी रमैय्या पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं. बिहार महादलित विकास मिशन योजना में 5.55 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप. मामले में निचली अदालत ने रमैय्या को जमानत दे दी थी. इस बात से राकेश बहुत नाराज थे. बोले कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने रमैय्या की जमानत याचिका खारिज कर दी, तो निचली अदालत ने कैसे जमानत दे दी.

अब आप कहेंगे कि ये मामला हाईकोर्ट से निचली अदालत पहुंचा कैसे? तो हुआ ये था कि पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय बेंच ने रमैय्या को निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था. अब चूंकि मामला विजिलेंस से जुड़ा था, तो नियम के मुताबिक विजिलेंस जज मधुकर कुमार की कोर्ट में ही जमानत की सुनवाई होनी चाहिए थी. फिर मधुकर एक दिन की छुट्टी पर चले गए. ठीक उसी दिन जिस दिन ये सुनवाई होनी थी. तो उनकी जगह प्रभारी न्यायिक पदाधिकारी विपुल कुमार सिन्हा को चार्ज मिला. और उसी दिन रमैय्या ने यहां पहुंच बेल कम सरेंडर याचिका पर जमानत ले ली.

पटना हाईकोर्ट.
पटना हाईकोर्ट.

जस्टिस राकेश ने इस मामले में जमानत खारिज करते हुए दो घंटे बोलकर अपना ऑर्डर लिखवाया. आदेश की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम, पीएमओ, कानून मंत्रालय और CBI निदेशक को भी भेजने का आदेश दिया. साथ ही पूरे मामले की जांच करने के आदेश पटना के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दिए. तीन हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के भी आदेश दिए.

मगर ये सब तो ट्रेलर था. असली पिच्चर तो उनके आदेश में की गई टिप्पणियां थीं. और इसकी जद में सबसे ज्यादा खुद पूरा न्यायिक सिस्टम था. कुल मिलाकर जज साहब ने पटना हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार का धागा खोल कर रख दिया. उन्होंने अपने फैसले में चार बड़े सवाल खड़े किए –

1. जमानत मिली कैसे?
जस्टिस राकेश रमैया की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर चुके थे. सुप्रीम कोर्ट से भी रमैया को राहत नहीं मिली. मगर फिर भी रमैया लगे रहे और अंत में उन्हें निचली अदालत से जमानत मिल गई. यही जस्टिस राकेश का सवाल था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बावजूद रमैया को निचली अदालत से बेल कैसे मिल गई?

2. भ्रष्टाचार साबित फिर भी पटना के एडीजे की बर्खास्तगी क्यों नहीं?
जज ने एक पुराने मामले पर सवाल उठाया कि जिस न्यायिक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो जाते हैं. उसे मेरी अनुपस्थिति में फुल कोर्ट की मीटिंग में बर्खास्त करने की बजाय मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाता है. मेरे विरोध को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है. बोले – लगता है कि भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण देना हाईकोर्ट की परिपाटी बनती जा रही है.

3. सरकारी बंगलों में फिजूलखर्ची क्यों?
जस्टिस राकेश ने जजों के सरकारी बंगले के रखरखाव पर होने वाले खर्च पर भी सवाल खड़े किए. कहा- टैक्स पेयर के करोड़ों रुपए साज-सज्जा पर आखिर क्यों खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने अपने साथी जजों पर भी सवाल खड़े किए. कहा कि तमाम जज चीफ जस्टिस के आगे-पीछे ही लगे रहते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे फेवर ले सकें. इसी के सहारे भ्रष्ट लोगों की मदद होती है.

4. स्टिंग मामले में केस दर्ज क्यों नहीं?
पटना सिविल कोर्ट में दरअसल एक स्टिंग ऑपरेशन हुआ था. 2017 में. रिपब्लिक टीवी ने किया था. इसमें घूस मांगते कई कोर्ट कर्मचारी पकड़े गए थे. मगर मामले में अब तक किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई. जबकि इसी मामले में हाईकोर्ट के एक वकील पीआईएल दायर कर पिछले डेढ़ साल से एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. जस्टिस कुमार ने इस मामले में अंतत: स्वतः संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी.

जस्टिस राकेश ने न्यायपालिका को जमकर घेरा.
जस्टिस राकेश ने न्यायपालिका को जमकर घेरा.

अब खबर के दूसरे फेज की बारी.

ये दूसरा फेज पहले फेज के कर्मों के फल स्वरूप ही सामने आया. पटना हाईकोर्ट की 11 जजों की फुल बेंच ने सीनियर जज जस्टिस राकेश कुमार को सस्पेंड कर दिया है. चीफ जस्टिस एपी शाही की 11 सदस्यीय फुल बेंच ने ये आदेश देते हुए कहा कि-

राकेश कुमार के आदेश(वही जो हमने आपको पहले बताया) से न्यायपालिका की गरिमा और प्रतिष्ठा गिरी है. संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से ऐसी अपेक्षा नहीं होती है.

फुल बेंच ने जस्टिस राकेश कुमार की सिंगल बेंच के सभी केसों की सुनवाई पर भी रोक लगा दी है. हालांकि अगले आदेश तक वे डबल बेंच के जिन केसों में शामिल हैं, उसकी सुनवाई कर सकेंगे.

कौन हैं राकेश कुमार?

बहुत बड़े वकील रहे हैं. मार्च 1983 से वकालत शुरू की. करीब 26 साल तक पटना हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की. क्रिमिनल केसेज और संविधान से जुड़े मसलों को निपटाने में मास्टरी थी. 25 दिसंबर 2009 को उनको पटना हाईकोर्ट का अस्थाई जज बनाया गया. 24 अक्टूबर 2011 को वो स्थाई जज बन गए. वो कितने कायदे के वकील थे इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइये कि 12 साल तक उन्होंने सीबीआई के तमाम केसों को डिफेंड किया. भारत सरकार, बीएसएनएल और राज्य सरकार के भी कई मामलों में वकील रहे हैं. और अब करते हैं असली धमाका. जस्टिस राकेश का ही करोड़ों रुपये के पशुपालन घोटाले में आरोपियों को सजा दिलाने में प्रमुख रोल रहा था. चारा घोटाले में भी जब सीबीआई जांच कर रही थी, तो राकेश ही सीबीआई के स्टैंडिंग काउंसिल थे.

पर फिलहाल वो सस्पेंड कर दिए गए हैं. बाकि आप समझदार हैं.


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